वन পর্ব
অধ্যায়
১২৩
लोमश उवाच
ऊचतुः समभिद्रुत्य नासत्यावश्विनाविदम् ||
২ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
২০১
नारद उवाच
ऊचतुश्च प्रभुं देवं ततस्तौ सहितौ तदा |
১৮ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৩৫
व्यास उवाच
ऊचतुश्च समाविष्टौ रजसा तमसा च तौ |
৬০ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৫৮
सञ्जय़ उवाच
ऊचतुश्चापि यद्वीरौ तत्ते वक्ष्यामि भारत ||
২ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১২৩
लोमश उवाच
ऊचतू राजपुत्रीं तां पतिस्तव विशत्वपः ||
১৫ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
৭১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः कचमुपागम्य ज्येष्ठं पुत्रं वृहस्पतेः ||
১০ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৯
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः कथाः कर्णसुखाः समुपेत्य ततस्ततः ||
৯ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৮৩
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः परममित्येवं पूजय़न्तोऽस्य तद्वचः ||
১১ খ
विराट পর্ব
অধ্যায়
৬২
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः प्रणम्य सम्भ्रान्ताः पार्थ किं करवाम ते ||
৪ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৭০
गन्धर्व उवाच
ऊचुः प्रसीदेति तदा प्रसादं च चकार सः ||
৭ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः प्राञ्जलय़ः सर्वे तान्कुन्तीमाद्रिनन्दनान् ||
১৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৫৯
भीष्म उवाच
ऊचुः प्राञ्जलय़ः सर्वे दुःखशोकभय़ार्दिताः ||
২৩ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১৪
उपमन्युरु उवाच
ऊचुः प्राञ्जलय़ः सर्वे नमस्कृत्वा वृषध्वजम् ||
১৭২ খ
विराट পর্ব
অধ্যায়
৩২
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः प्राञ्जलय़ः सर्वे युधिष्ठिरपुरोगमाः ||
৪০ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১০৩
लोमश उवाच
ऊचुः प्राञ्जलय़ः सर्वे सागरस्याभिपूरणम् ||
১৯ গ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৯৪
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुः शक्रं समागम्य नाय़ं यज्ञविधिः शुभः ||
১২ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
৪৫
सूत उवाच
ऊचुः सर्वे यथावृत्तं राज्ञः प्रिय़हिते रताः ||
১৯ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭০
सञ्जय़ उवाच
ऊचुः सर्वे सुसंरव्धा यूपकेतुं महारणे ||
১২ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৭২
भीष्म उवाच
ऊचुरेकाग्रमनसो जहि वृत्रमिति प्रभो ||
৩৩ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২৪৩
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुर्दिष्ट्या नृपाविघ्नात्समाप्तोऽय़ं क्रतुस्तव ||
২ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩২৪
भीष्म उवाच
ऊचुर्द्विजातय़ो देवानेष छेत्स्यति संशय़म् ||
৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৯
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुर्नैतद्वचोऽस्माकं श्रीरस्तु तव पार्थिव ||
৩১ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১২
शल्य उवाच
ऊचुर्वचनमव्यग्रा लोकानां हितकाम्यया ||
২৮ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩২৪
भीष्म उवाच
ऊचुर्वसुं विमानस्थं देवपक्षार्थवादिनम् ||
১৪ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৪৬
भीष्म उवाच
ऊचुर्वाक्यमसन्दिग्धमातिथेय़स्य वान्धवाः ||
৪ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुर्विगतसन्त्रासाः समागम्य परस्परम् ||
১১ গ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৭২
भीष्म उवाच
ऊचुर्वृत्रविनाशार्थं लोकानां हितकाम्यया ||
২৯ গ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৩৬
भरद्वाज उवाच
ऊचुर्वेदोक्तय़ा पूर्वं गाथय़ा तन्निवोध मे ||
১২ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৬
सूत उवाच
ऊचुश्च कूर्मराजानमकूपारं सुरासुराः |
১০ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৮১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुश्च वाचः परुषास्ते राजानो जिघांसवः |
৬ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১০
शल्य उवाच
ऊचुश्च सर्वे देवेशं विष्णुं वृत्रभय़ार्दिताः |
৬ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৮১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुश्च सहितास्तत्र साध्विमे व्राह्मणर्षभाः |
২৭ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৩৫
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुश्चाथ महाभागं प्राप्ता भागार्थिनो वय़म् ||
৪১ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৫
मार्कण्डेय़ उवाच
ऊचुश्चापि त्वमस्माकं पुत्रोऽस्माभिर्धृतं जगत् |
১৮ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৬০
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुश्चैनं तथैवाद्यं मानुषाणां त्वमीश्वरः |
৬৭ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১৩
शल्य उवाच
ऊचुश्चैनं समुद्विग्ना वाक्यं वाक्यविशारदाः ||
৯ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩২৩
भीष्म उवाच
ऊचुश्चैनमसम्भ्रान्ता न रोषं कर्तुमर्हसि |
১৭ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৬৯
वसिष्ठ उवाच
ऊचुश्चैनां महाभागां क्षत्रिय़ास्ते विचेतसः |
২৩ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৮১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुस्तं भीर्न कर्तव्या वय़ं योत्स्यामहे परान् ||
১ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩২৪
भीष्म उवाच
ऊचुस्तं हृष्टमनसो राजोपरिचरं तदा ||
১৯ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১১৩
लोमश उवाच
ऊचुस्ततस्तेऽभ्युपगम्य सर्वे; धनं तवेदं विहितं सुतस्य ||
১৭ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২৮০
मार्कण्डेय़ उवाच
ऊचुस्तपस्विनः सर्वे तपोवननिवासिनः ||
১২ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৪২
वैशम्पाय़न उवाच
ऊचुस्तान्वै मुनीन्सर्वान्कृपाय़ुक्तान्पुनः पुनः ||
১৪ গ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩১৪
भीष्म उवाच
ऊचुस्ते सहिता राजन्निदं वचनमुत्तमम् |
৩৬ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৮১
वैशम्पाय़न उवाच
ऊढात्प्रभृति दुःखानि श्वशुराणामरिन्दम |
৪২ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৪৬
वैशम्पाय़न उवाच
ऊढास्तिस्रः पुरा कन्यास्तमस्मि मनसा गतः ||
১৩ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
৫৭
इन्द्र उवाच
ऊधः पृथिव्या यो देशस्तमावस नराधिप ||
৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৭২
भीष्म उवाच
ऊधश्छिन्द्याद्धि यो धेन्वाः क्षीरार्थी न लभेत्पय़ः |
১৬ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৭৫
भीष्म उवाच
ऊधस्या भरितव्या च वैष्णवीति च चोदय़ेत् ||
১৫ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৭৫
भीष्म उवाच
ऊधस्योढा भारत यश्च विद्वा; न्व्याख्यातास्ते वैष्णवाश्चन्द्रलोकाः ||
১৮ খ