स्वर्गारोहण পর্ব
অধ্যায়
৩
वैशम्पाय़न उवाच
लोहकुम्भ्यः शिलाश्चैव नादृश्यन्त भय़ानकाः |
৫ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৩৯
भीष्म उवाच
लोहघण्टापरिष्कारं श्वय़ूथपरिवारितम् ||
৩০ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৬
वासुदेव उवाच
लोहचर्मवती चापि साग्निः सहुडशृङ्गिका ||
৮ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
১৮
व्राह्मण उवाच
लोहपिण्डं यथा वह्निः प्रविशत्यभितापय़न् |
৯ ক
सभा পর্ব
অধ্যায়
২৪
वैशम्पाय़न उवाच
लोहान्परमकाम्वोजानृषिकानुत्तरानपि |
২৪ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১৫৭
सञ्जय़ उवाच
लोहाभिहारो निर्वृत्तः कुरुक्षेत्रमकर्दमम् |
১৮ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১৫৮
सञ्जय़ उवाच
लोहाभिहारो निर्वृत्तः कुरुक्षेत्रमकर्दमम् |
১১ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৪৪
वैशम्पाय़न उवाच
लोहाशवक्त्रो जठरः कुम्भवक्त्रश्च कुण्डकः |
৭০ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৩৩
सञ्जय़ उवाच
लोहितस्य तु गन्धेन स्पर्शेन च रसेन च |
৬৬ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৫
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहितस्योदधेः कन्या क्रूरा लोहितभोजना |
২২ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৯
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहितस्योदधेः कन्या धात्री स्कन्दस्य सा स्मृता |
৩৯ ক
विराट পর্ব
অধ্যায়
৩৯
वैशम्पाय़न उवाच
लोहिताक्ष महावाहो नागराजकरोपम |
২২ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৫০
सञ्जय़ उवाच
लोहिताक्षं महावाहुं जातं सिंहमिवाद्रिषु |
২৩ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৬১
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताक्षं महावाहुं मत्तमातङ्गगामिनम् |
৯ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
১৫৭
वैशम्पाय़न उवाच
लोहिताक्षः पृथुव्यंसो मत्तवारणविक्रमः |
২৭ ক
विराट পর্ব
অধ্যায়
৫০
अर्जुन उवाच
लोहिताक्षमरिष्टं यं वैय़ाघ्रमनुपश्यसि |
৪ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৫৩
सूत उवाच
लोहिताक्षाय़ सूताय़ तथा स्थपतय़े विभुः |
১২ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৪৫
वैशम्पाय़न उवाच
लोहिताक्षी महाकाय़ा हरिपिण्डी च भूमिप ||
২৩ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১৬৬
भीष्म उवाच
लोहिताक्षो गुडाकेशो नाराय़णसहाय़वान् |
২৮ ক
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৭৯
वैशम्पाय़न उवाच
लोहिताक्षो गुडाकेशो विजय़ः साधु जीवतु ||
১৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৫০
सञ्जय़ उवाच
लोहिताक्षो महाकाय़स्ताम्रास्यो निम्नितोदरः |
৪ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১৭
उपमन्युरु उवाच
लोहिताक्षो महाक्षश्च विजय़ाक्षो विशारदः |
৬৩ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৪০
वैशम्पाय़न उवाच
लोहिताक्षो महावाहुरूर्ध्वकेशो महावलः |
২ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৮৭
सञ्जय़ उवाच
लोहिताक्षो वभौ तत्र मदविह्वललोचनः ||
৬১ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৭৬
सञ्जय़ उवाच
लोहिताक्षौ महावाहू संय़त्तौ कृष्णपाण्डवौ |
৩২ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৪১
सञ्जय़ उवाच
लोहिताङ्ग इवाकाशाद्दीप्तरश्मिर्यदृच्छय़ा ||
১২ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৬৫
सञ्जय़ उवाच
लोहिताङ्ग इवादित्यो दुर्दर्शः समपद्यत |
৫৩ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৫৪
सञ्जय़ उवाच
लोहिताङ्गाविव क्रुद्धौ प्रतपन्तौ महारथौ ||
৩১ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৪
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताभ्रे सुमहति भाति सूर्य इवोदितः ||
১৯ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৪
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताभ्रेण महता संवृतः सह विद्युता |
১৯ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৮
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताम्वरसंवीतं तीक्ष्णदंष्ट्रं मनोरमम् |
২ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২২১
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताम्वरसंवीतो लोहितस्रग्विभूषणः |
৬৩ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৪২
सञ्जय़ उवाच
लोहितार्द्रपताकं तं रक्तमाल्यविभूषितम् |
৩৫ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৩১
सञ्जय़ उवाच
लोहितार्द्रपताकं तमन्त्रमालाविभूषितम् |
২৮ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৩৬
सञ्जय़ उवाच
लोहितार्द्रा भृशं रेजुस्तपनीय़ध्वजा इव ||
২৬ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২২১
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहितास्यो महावाहुर्हिरण्यकवचः प्रभुः ||
৬৩ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭০
सञ्जय़ उवाच
लोहिताय़ति चादित्ये त्वरमाणो धनञ्जय़ः |
৩১ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৯
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहिताय़निरित्येवं कदम्वे सा हि पूज्यते ||
৩৯ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
১৯
सञ्जय़ उवाच
लोहितैः सिच्यमानानि शस्त्राणि कवचानि च |
৬৮ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
১৫৫
वैशम्पाय़न उवाच
लोहितैरञ्जनाभैश्च वैडूर्यसदृशैरपि ||
৬১ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৩
मार्कण्डेय़ उवाच
लोहितैश्च घनैर्युक्तां पूर्वां सन्ध्यां शतक्रतुः |
২৮ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৩৩
सञ्जय़ उवाच
लोहितोदा महाघोरा नदी लोहितकर्दमा |
৬২ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১০
सञ्जय़ उवाच
लोहित्यां करतोय़ां च तथैव वृषभङ्गिनीम् |
৩৪ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২০৫
गुरुरु उवाच
लोहय़ुक्तं यथा हेम विपक्वं न विराजते |
৬ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
২৬
अङ्गिरा उवाच
लौहित्ये विधिवत्स्नात्वा पुण्डरीकफलं लभेत् ||
৪৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১১৪
सञ्जय़ उवाच
लय़मास्थाय़ राधेय़ो भीमसेनमवञ्चय़त् ||
৫৫ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫৭
सञ्जय़ उवाच
लय़स्थितं यथा व्याघ्रं जहि कर्ण धनञ्जय़म् ||
২৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৬০
भीष्म उवाच
लय़े च सप्तमो भागस्तथा शृङ्गे कला खुरे |
২৫ ক