उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৮১
वैशम्पाय़न उवाच
मङ्गल्यार्थपदैः शव्दैरन्ववर्तन्त सर्वशः |
২৫ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৪০
श्रीभगवानु उवाच
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि |
৫৮ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৩২
श्रीभगवानु उवाच
मच्चित्ता मद्गतप्राणा वोधय़न्तः परस्परम् |
৯ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৪৯
सञ्जय़ उवाच
मच्छन्दादवमानोऽय़ं कृतस्तव महीपते |
১০৯ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৯৬
सञ्जय़ उवाच
मच्छरैरग्निसङ्काशैर्विदेहासून्सहस्रशः ||
১৮ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৪৭
भीम उवाच
मच्छासनमकुर्वाणं मा त्वा नेष्ये यमक्षय़म् ||
১৪ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
৫৭
वैशम्पाय़न उवाच
मच्छिल्लश्च यदुश्चैव राजन्यश्चापराजितः ||
২৯ গ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৪৮
सञ्जय़ उवाच
मज्जतां धार्तराष्ट्रेषु भव पारं परन्तप ||
৫০ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৭
व्यास उवाच
मज्जते मज्जते तद्वद्दाता यश्च प्रतीच्छकः ||
৩৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৬২
सञ्जय़ उवाच
मज्जत्सु चक्रेषु रथान्सत्त्वमास्थाय़ वाजिनः |
১৯ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫১
सञ्जय़ उवाच
मज्जन्तमप्लवे मन्दमुज्जिहीर्षुः सुय़ोधनम् |
৩৩ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫৮
सञ्जय़ उवाच
मज्जन्तमिव कौन्तेय़मुज्जिहीर्षुर्धनञ्जय़ः ||
১ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১২৬
सञ्जय़ उवाच
मज्जन्तमिव चात्मानं धृष्टद्युम्नस्य किल्विषे |
২৫ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৪৩
सञ्जय़ उवाच
मज्जन्तमिव पाताले वलिनोऽप्युज्जिहीर्षवः ||
২২ গ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৩৮
विदुर उवाच
मज्जन्ति तेऽवशा देशा नद्यामश्मप्लवा इव ||
৪০ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১
गौतम्यु उवाच
मज्जन्ति पापगुरवः शस्त्रं स्कन्नमिवोदके ||
১৫ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৩৪
वैशम्पाय़न उवाच
मज्जन्ति पितरस्तस्य नरके शाश्वतीः समाः |
৬ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
১২৯
लोमश उवाच
मज्जन्तीमिव चाक्रान्तां यय़ातेर्यज्ञकर्मभिः ||
৫ খ
सभा পর্ব
অধ্যায়
৫৯
विदुर उवाच
मज्जन्त्यलावूनि शिलाः प्लवन्ते; मुह्यन्ति नावोऽम्भसि शश्वदेव |
১১ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৫২
सञ्जय़ उवाच
मज्जमान इवागाधे विपुले शोकसागरे ||
২ খ
स्त्री পর্ব
অধ্যায়
৭
विदुर उवाच
मज्जमानं महापङ्के निरालम्वे समन्ततः ||
১০ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৭৯
भीष्म उवाच
मज्जमानस्य संसारे यावद्दुःखाद्विमुच्यते ||
১৭ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৮৭
देव उवाच
मज्जमाना जले विप्र वीर्येणासीत्समुद्धृता ||
১১ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২০৭
गुरुरु उवाच
मज्जां चैव सिराजालैस्तर्पय़न्ति रसा नृणाम् ||
১৬ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৩১
सञ्जय़ उवाच
मज्जामांसमहापङ्कां कवन्धावर्जितोडुपाम् ||
১২১ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৮৭
भीष्म उवाच
मज्जास्नेहवसाक्षौद्रमौषधग्राममेव च ||
১৩ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৬৩
भीष्म उवाच
मज्जेत्त्रय़ी दण्डनीतौ हताय़ां; सर्वे धर्मा न भवेय़ुर्विरुद्धाः |
২৮ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৬৮
भीष्म उवाच
मज्जेद्धर्मस्त्रय़ी न स्याद्यदि राजा न पालय़ेत् ||
২১ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১২৪
वैशम्पाय़न उवाच
मञ्चांश्च कारय़ामासुस्तत्र जानपदा जनाः |
১১ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৭৬
वैशम्पाय़न उवाच
मञ्चेषु च परार्ध्येषु पौरजानपदा जनाः |
২৬ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৯২
वैशम्पाय़न उवाच
मञ्जूषा त्वश्वनद्याः सा यय़ौ चर्मण्वतीं नदीम् |
২৫ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৯২
वैशम्पाय़न उवाच
मञ्जूषाय़ामवदधे स्वास्तीर्णाय़ां समन्ततः ||
৬ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৪৬
सञ्जय़ उवाच
मडका लडकाश्चैव तङ्गणाः परतङ्गणाः ||
৪৯ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
২০৭
वैशम्पाय़न उवाच
मणलूरेश्वरं राजन्धर्मज्ञं चित्रवाहनम् ||
১৪ গ
सौप्तिक পর্ব
অধ্যায়
১৫
व्यास उवाच
मणिं चैतं प्रय़च्छैभ्यो यस्ते शिरसि तिष्ठति |
২৭ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
৩
वैशम्पाय़न उवाच
मणिः सुवर्णो भूतादिः कामदः सर्वतोमुखः ||
২৫ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
৩১
द्रौपद्यु उवाच
मणिः सूत्र इव प्रोतो नस्योत इव गोवृषः |
২৫ ক
मौसल পর্ব
অধ্যায়
৪
वैशम्पाय़न उवाच
मणिः स्यमन्तकश्चैव यः स सत्राजितोऽभवत् |
২২ ক
सभा পর্ব
অধ্যায়
৪৭
दुर्योधन उवाच
मणिकाञ्चनचित्राणि गजदन्तमय़ानि च ||
২৮ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
২৬
सूत उवाच
मणिकाञ्चनचित्राणि शोभय़न्ति महागिरिम् ||
২৩ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৯২
वैशम्पाय़न उवाच
मणिकाञ्चनचित्राणि समाजह्रुस्ततस्ततः ||
৪৫ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১
सूत उवाच
मणिकाञ्चनरत्नानि गोहस्त्यश्वधनानि च ||
৮৭ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৫৫
वैशम्पाय़न उवाच
मणिकाञ्चनरम्यं च शैलं नानासमुच्छ्रय़म् ||
২৮ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৯৮
नारद उवाच
मणिजालविचित्राणि प्रांशूनि निविडानि च ||
১২ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
৮২
पुलस्त्य उवाच
मणिनागं ततो गत्वा गोसहस्रफलं लभेत् |
৯১ ক
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৭৭
वैशम्पाय़न उवाच
मणिपूरपतेर्देशमुपाय़ात्सहपाण्डवः ||
৪৬ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৭৮
वैशम्पाय़न उवाच
मणिपूरपतेर्माता ददर्श निहतं पतिम् ||
৩৯ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৮২
अर्जुन उवाच
मणिपूरपतेर्मातुस्तथैव च रणाजिरे ||
১ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৭৮
वैशम्पाय़न उवाच
मणिपूरेश्वरं त्वेवमुपय़ातं धनञ्जय़ः |
২ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
১৫
सञ्जय़ उवाच
मणिप्रतानोत्तमवज्रहाटकै; रलङ्कृतं चांशुकमाल्यमौक्तिकैः |
৩৭ ক