शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৯
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिदक्षिणमिक्ष्वाकुं यजमानं भगीरथम् |
৬২ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১২৬
राजो उवाच
भूरिद्युम्नं सुतं नष्टमन्वेष्टुं वनमागतः ||
২৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১২৬
भीष्म उवाच
भूरिद्युम्नपिता धीमान्रघुश्रेष्ठो महाय़शाः ||
১৪ খ
सभा পর্ব
অধ্যায়
৮
नारद उवाच
भूरिद्युम्नो महाश्वश्च पृथ्वश्वो जनकस्तथा |
১৮ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
২৩
सञ्जय़ उवाच
भूरिद्रुमं शुष्कलतावितानं; भृशं समृद्धो ज्वलनः प्रतापी ||
৬১ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৬৮
सञ्जय़ उवाच
भूरिद्रुमलतागुल्मं शुष्केन्धनतृणोलपम् |
৫৩ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১১৮
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवसमालोक्य युद्धे प्राय़गतं हतम् ||
৩৮ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৬৩
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवसि कर्णे च भीष्मे द्रोणे च श्रीमति ||
১১ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
২৩
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवसि शल्ये च शाल्वे चैव जनार्दन |
২৬ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১২০
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवसि सङ्क्रान्ते परलोकाय़ भारत |
২ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৮৮
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवसि सङ्क्रुद्धः प्राहिणोद्भरतर्षभ |
৩৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৩৩
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवा जय़श्चैव जलसन्धः सुदक्षिणः ||
৫৯ খ
सौप्तिक পর্ব
অধ্যায়
৫
अश्वत्थामो उवाच
भूरिश्रवा महेष्वासस्तथा प्राय़गतो रणे |
২০ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭৭
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवा रणे यत्तो धृष्टकेतुमय़ोधय़त् |
৩০ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৩
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवा रणे राजन्याज्ञसेनिं महारथम् |
৩৯ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৫৩
नारद उवाच
भूरिश्रवा रौहिणेय़ मद्रराजश्च वीर्यवान् |
২৪ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৬১
दुर्योधन उवाच
भूरिश्रवा विकर्णश्च भगदत्तश्च वीर्यवान् |
২৭ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
২
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवा हतो यत्र सोमदत्तश्च संय़ुगे |
৩২ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৬৯
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवा ह्यधर्मेण त्वय़ा धर्मविदा हतः ||
৩৭ গ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১৬২
भीष्म उवाच
भूरिश्रवाः कृतास्त्रश्च तव चापि हितः सुहृत् ||
২৮ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১১২
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः कृपो द्रौणिर्मद्रराजो जय़द्रथः |
১৫ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৭৯
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः कर्णो वृषसेनो जय़द्रथः |
৪ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৯
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यः सोमदत्तश्च वाह्लिकः |
৯ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৪৭
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यो भगदत्तश्च मारिष |
১৭ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৫২
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यो भगदत्तश्च मारिष |
৫ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১১৪
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यो भगदत्तस्तथैव च |
১৫ ক
आश्रमवासिक পর্ব
অধ্যায়
৪০
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यो वृषसेनश्च सानुजः ||
১০ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৫২
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलः शल्यो वृषसेनो दुरासदः ||
১৫ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
৩৭
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः शलश्चैव जलसन्धश्च वीर्यवान् |
৭ ক
स्वर्गारोहण পর্ব
অধ্যায়
৫
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः शलश्चैव भूरिश्च पृथिवीपतिः |
১৪ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৯৮
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः शलश्चैव सौवलश्च विशां पते |
২৬ ক
सभा পর্ব
অধ্যায়
৬৬
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः शान्तनवो विकर्णश्च महारथः |
২৬ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১১৭
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाः सात्यकिश्च ववर्षतुररिन्दमौ |
২১ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৪০
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः सोमदत्तो महाराजश्च वाह्लिकः ||
৪৬ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
২
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः सोमदत्तो महाराजोऽथ वाह्लिकः ||
১৬ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১২২
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाः सौमदत्तिरश्वत्थामा जय़द्रथः |
৪৮ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১০৭
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाभ्ययात्तूर्णं तिष्ठ तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
৪২ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৫৭
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवाश्च शल्यश्च द्रौणिः सांय़मनिः शलः |
১১ ক
मौसल পর্ব
অধ্যায়
৪
वैशम्पाय़न उवाच
भूरिश्रवाश्छिन्नवाहुर्युद्धे प्राय़गतस्त्वय़ा |
২০ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৭৯
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवास्तु सङ्क्रुद्धः प्रतोदं चिच्छिदे हरेः |
৩২ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৮০
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवास्तु समरे धृष्टकेतुं महारथम् |
৩৫ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৩৬
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवास्त्रिभिर्वाणैर्मद्रेशः षड्भिराशुगैः |
১৮ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৭৯
सञ्जय़ उवाच
भूरिश्रवास्त्रिभिर्वाणैर्हेमपुङ्खैः शिलाशितैः ||
২৫ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৪১
सञ्जय़ उवाच
भूरिस्तु समरे राजञ्शैनेय़ं रथिनां वरम् |
১ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৬৫
सञ्जय़ उवाच
भूर्दिशश्चान्तरिक्षं च शव्देनासीत्समावृतम् |
৯ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৬১
भीष्म उवाच
भूर्देय़ा विधिवच्छक्र पात्रे सुखमभीप्सता ||
৬৫ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭৪
सञ्जय़ उवाच
भूर्भाति भरतश्रेष्ठ पर्वतैराचिता यथा ||
৩৪ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
১৪
सञ्जय़ उवाच
भूर्भाति भरतश्रेष्ठ शान्तार्चिर्भिरिवाग्निभिः ||
৪২ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৫৩
सञ्जय़ उवाच
भूर्भाति भरतश्रेष्ठ स्रग्दामैरिव चित्रिता ||
২০ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১১০
भीष्म उवाच
भूर्भुवं चापि देवर्षिं विश्वरूपमवेक्षते ||
৭৪ খ