आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
২
वैशम्पाय़न उवाच
परिमुह्यसि भूय़स्त्वमज्ञानादिव भारत ||
২০ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৫৬
सञ्जय़ उवाच
परिमोक्षं प्रहाराणां वर्जनं परिधावनम् ||
১৮ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৯
स्कन्द उवाच
परिरक्षत भद्रं वः प्रजाः साधु नमस्कृताः ||
২০ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১০৮
सञ्जय़ उवाच
परिरक्षन्ति राजानं यमौ च मनुजेश्वरम् ||
৩৭ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৯
मातर ऊचुः
परिरक्षाम भद्रं ते प्रजाः स्कन्द यथेच्छसि |
২১ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১৪
वैशम्पाय़न उवाच
परिरक्ष्य स सेनां ते दशरात्रमनीकहा |
১১ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১০৩
सञ्जय़ उवाच
परिरक्ष्यं च मम तद्वचः पार्थस्य धीमतः |
৩৬ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৩৭
सञ्जय़ उवाच
परिवर्ज्य गुरुं याहि यत्र राजा सुय़ोधनः |
৪৭ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৭৪
सञ्जय़ उवाच
परिवर्तमाने त्वादित्ये तत्र सूर्यस्य रश्मिभिः |
১ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
১০৯
सुपर्ण उवाच
परिवर्तसहस्राणि कामभोग्यानि गालव ||
১৫ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৮৬
पराशर उवाच
परिवर्हैः सुसम्पन्नमुद्यतं तुल्यतां गतम् |
৫ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৯৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुः सुसङ्क्रुद्धास्त्वदीय़ाः सात्यकिं रथाः ||
৯ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৪০
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुरमित्रघ्नं शतशश्चापरे जनाः ||
৬৫ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৭৩
वैशम्पाय़न उवाच
परिवव्रुर्गुडाकेशं तत्राक्रुध्यद्धनञ्जय़ः ||
২৮ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৩৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्जिघांसन्तः सौभद्रमपलाय़िनम् ||
১২ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्जिघांसन्तो राधेय़ं शरवृष्टिभिः ||
১৫ গ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫৯
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्नरव्याघ्रा नरव्याघ्रं रणेऽर्जुनम् ||
১ গ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
১৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्भृशं क्रुद्धाः पाण्डुपाञ्चालसोमकाः ||
৬ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৬৩
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महात्मानं क्षिप्रमाहवशोभिनम् ||
২৩ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৬৩
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महात्मानं पार्थमप्रतिमं युधि ||
২৪ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৯৩
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महात्मानं प्रज्वलद्भिः समन्ततः ||
৩০ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৪৫
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महाराज पाञ्चालाः पाण्डवैः सह ||
৩ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৩২
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महाराज पाञ्चालानां रथव्रजाः ||
৩৫ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৯
वैशम्पाय़न उवाच
परिवव्रुर्महाराजमस्पृशंश्चैव पाणिभिः ||
৩ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৫৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुर्महेष्वासाः पाण्डवानां महारथाः ||
১৪ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৯১
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुस्ततः शूरा गजानीकेन सर्वतः |
১৮ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭০
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुस्तदा पार्थं सहपुत्रं महारथम् ||
৩৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৪৩
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुस्तदा राजंस्तव पौत्रं जिघांसवः ||
১১ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায়
৩৭
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रुस्तदा सर्वे पाण्डवस्य महारथम् ||
১১ গ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
২৬
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रू रणे भीमं किरन्तो विशिखाञ्शितान् ||
৪৯ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৯৭
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रू रणे भीष्मं जुगुपुश्च समन्ततः ||
৩৫ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
১০০
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रू रणे भीष्मं माधवत्राणकारणात् ||
৩৬ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৯৮
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रू रणे यत्ता भीमसेनं समन्ततः ||
৩০ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
৯০
सञ्जय़ उवाच
परिवव्रू रथैस्तूर्णं कृतवर्माणमाहवे ||
৪৫ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৩৩
भीष्म उवाच
परिवादं च ये कुर्युर्व्राह्मणानामचेतसः |
১৭ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১০৭
भीष्म उवाच
परिवादं न च व्रूय़ात्परेषामात्मनस्तथा |
১২২ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১১৫
भीष्म उवाच
परिवादं व्रुवाणो हि दुरात्मा वै महात्मने |
১৪ ক
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৩৬
व्रह्मो उवाच
परिवादकथा नित्यं देवव्राह्मणवैदिकाः ||
১৭ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৩৩
भीष्म उवाच
परिवादो द्विजातीनां न श्रोतव्यः कथञ्चन |
২৩ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১০৭
भीष्म उवाच
परिवादो न धर्माय़ प्रोच्यते भरतर्षभ ||
১২২ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৮৪
भृगुरु उवाच
परिवादोपघातौ च पारुष्यं चात्र गर्हितम् ||
১৪ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৮৩
युधिष्ठिर उवाच
परिवारेण वै दुःखं दुर्धरं चाकृतात्मभिः |
২ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৩৬
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य गृहं तच्च तस्थू रात्रौ समन्ततः ||
১৪ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৫০
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य च ते सर्वे गाङ्गेय़ं रभसं रणे |
৯৯ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৪৮
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य च विश्वेशं पर्यासत दिवौकसः ||
৪ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৮২
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य चमूं सर्वां प्रय़युः शिविरं प्रति ||
৪৯ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১২৭
लोमश उवाच
परिवार्य जन्तुं सहिताः स शव्दस्तुमुलोऽभवत् ||
৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৫০
वैशम्पाय़न उवाच
परिवार्य ततः सर्वे निषेदुः पुरुषर्षभाः ||
১১ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায়
৭৫
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य ततो भीमं हन्तुकामो जय़द्रथः |
২০ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায়
১২
सञ्जय़ उवाच
परिवार्य तदा शल्यं समन्ताद्व्यकिरञ्शरैः ||
৩০ খ