शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২০
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ान्दोषः प्रवर्धेत यस्तं धनमपाश्रय़ेत् ||
৭ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৪৭
भीष्म उवाच
भूय़ान्स्यात्क्षत्रिय़ापुत्रो वैश्यापुत्रान्न संशय़ः |
৪৫ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
৩৩
द्रौपद्यु उवाच
भूय़िष्ठं कर्मय़ोगेषु सर्व एव पराक्रमः ||
৫০ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৮৬
मार्कण्डेय़ उवाच
भूय़िष्ठं कूटमानैश्च पण्यं विक्रीणते जनाः |
৪৬ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৮৩
युधिष्ठिर उवाच
भूय़िष्ठं च नरेन्द्राणां विद्यते न शुभा गतिः ||
২ গ
स्वर्गारोहण পর্ব
অধ্যায়
৩
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़िष्ठं पापकर्मा यः स पूर्वं स्वर्गमश्नुते |
১৩ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
২৩১
व्यास उवाच
भूय़िष्ठं प्राणभृद्ग्रामे निविष्टानि शरीरिषु ||
৬ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায়
৩১
व्राह्मण उवाच
भूय़िष्ठं मे जिता दोषा निहताः सर्वशत्रवः |
৭ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৩৬
सूत उवाच
भूय़िष्ठमुपय़ुञ्जानं फेनमापिवतां पय़ः ||
১৫ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৯৫
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़िष्ठेन तु राजानः श्रिय़ं भुक्त्वाय़ुषः क्षय़े |
৭ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৬২
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ो धर्मपरैर्भावैर्विदितं जनमावसत् ||
১৪ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৫৫
सञ्जय़ उवाच
भूय़ो धीरं मनश्चक्रे युद्धाय़ कुरुनन्दनः ||
৪১ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৩৭
जनमेजय़ उवाच
भूय़ो नाराय़णसुतं त्वमेवैनं प्रभाषसे ||
৭ খ
स्त्री পর্ব
অধ্যায়
৫
विदुर उवाच
भूय़ो भूय़ः समीहन्ते मधूनि भरतर्षभ |
১৬ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৫৩
सूत उवाच
भूय़ो भूय़ः सर्वशस्तेऽव्रुवंस्तं; किं ते प्रिय़ं करवामोऽद्य विद्वन् |
১৯ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৮২
व्राह्मणा ऊचुः
भूय़ो भूय़श्च वृद्धिस्ते क्षिप्रमेव भविष्यति ||
২৪ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৬৬
सञ्जय़ उवाच
भूय़ो भूय़ो हि यद्राजन्पृच्छसे पाण्डवान्प्रति |
৬ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৮
सूत उवाच
भूय़ो मनोहरतरा वभूव तनुमध्यमा ||
১৮ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায়
৬৮
धृतराष्ट्र उवाच
भूय़ो मे पुण्डरीकाक्षं सञ्जय़ाचक्ष्व पृच्छते |
১ ক
सभा পর্ব
অধ্যায়
১২
वैशम्पाय़न उवाच
भूय़ो विममृशे पार्थो लोकानां हितकाम्यया ||
২২ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১২২
मैत्रेय़ उवाच
भूय़ो वुद्ध्यानुपश्यामि सुसमृद्धतपा इव ||
৫ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
১৮৩
मार्कण्डेय़ उवाच
भूय़ोऽथ नानुरुध्यत्स धर्मव्यक्तिनिदर्शनात् |
২ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
৩৫
युधिष्ठिर उवाच
भूय़ोऽपि दुःखं मम भीमसेन; दूय़े विषस्येव रसं विदित्वा |
১৭ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৪৭
भीष्म उवाच
भूय़ोऽपि भूय़सा हार्यं पितृवित्ताद्युधिष्ठिर ||
৩৮ গ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩৩৫
व्यास उवाच
भूय़ोऽप्यमितविक्रान्तं निद्राय़ोगमुपागतम् ||
৫৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৫৯
भीष्म उवाच
भूय़ोऽस्य दक्षिणं पाणिं ममन्थुस्ते महर्षय़ः |
১০৪ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৬৫
सञ्जय़ उवाच
भूय़ोऽहं त्वां विजय़िनं परिष्वक्ष्यामि पार्षत |
৬৪ খ
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৬৯
वसिष्ठ उवाच
भृगवस्तु ददुः केचित्तेषां वित्तं यथेप्सितम् |
১৬ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
২৭
वैशम्पाय़न उवाच
भृगवोऽङ्गिरसश्चैव वासिष्ठाः काश्यपैः सह ||
৭ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায়
১৬৪
सञ्जय़ उवाच
भृगवोऽङ्गिरसश्चैव सूक्ष्माश्चान्ये महर्षय़ः ||
৮৮ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৩৪
भीष्म उवाच
भृगवोऽजय़ंस्तालजङ्घान्नीपानङ्गिरसोऽजय़न् |
১৬ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
৮৫
वसिष्ठ उवाच
भृगित्येव भृगुः पूर्वमङ्गारेभ्योऽङ्गिराभवत् ||
১৫ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
৮৩
पुलस्त्य उवाच
भृगुं निय़ोजय़ामास याजनार्थे महाद्युतिम् ||
৪৭ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৮৫
भीष्म उवाच
भृगुं परमधर्मात्मा विस्मितः प्रत्यपूजय़त् ||
২৬ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৭৫
भीष्म उवाच
भृगुं महर्षिमासीनं भरद्वाजोऽन्वपृच्छत ||
৬ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১০৩
भृगुरु उवाच
भृगुं हि यदि सोऽद्राक्षीन्नहुषः पृथिवीपते |
২৪ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১০৩
भीष्म उवाच
भृगुः स सुमहातेजाः पातनाय़ नृपस्य ह ||
১৪ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
৩২৯
श्रीभगवानु उवाच
भृगुणा महर्षिणा शप्तोऽग्निः सर्वभक्षत्वमुपनीतः ||
৪৩ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
৭
सूत उवाच
भृगुणा वै महाभाग शप्तोऽग्निः कारणान्तरे |
১৬ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৭৫
भीष्म उवाच
भृगुणाभिहितं श्रेष्ठं भरद्वाजाय़ पृच्छते ||
৫ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
৮২
पुलस्त्य उवाच
भृगुतुङ्गं समासाद्य वाजिमेधफलं लभेत् |
৪৫ ক
वन পর্ব
অধ্যায়
১৬৩
अर्जुन उवाच
भृगुतुङ्गमथो गत्वा काम्यकादास्थितस्तपः |
১০ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
২০৭
वैशम्पाय़न उवाच
भृगुतुङ्गे च कौन्तेय़ः कृतवाञ्शौचमात्मनः ||
২ খ
सभा পর্ব
অধ্যায়
৬৯
विदुर उवाच
भृगुतुङ्गे च रामेण दृषद्वत्यां च शम्भुना |
১৩ ক
आदि পর্ব
অধ্যায়
১৬৯
वसिष्ठ उवाच
भृगुपत्न्यो गिरिं तात हिमवन्तं प्रपेदिरे ||
১৯ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায়
৪৪
वैशम्पाय़न उवाच
भृगुभिश्चाङ्गिरोभिश्च यतिभिश्च महात्मभिः |
৮ খ
वन পর্ব
অধ্যায়
২১৩
मार्कण्डेय़ उवाच
भृगुभिश्चाङ्गिरोभिश्च हुतं मन्त्रैः पृथग्विधैः |
২৯ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায়
১৪২
वाय़ुरु उवाच
भृगुभ्यस्ते भय़ं घोरं तत्तु कालाद्भविष्यति ||
২৩ খ
सभा পর্ব
অধ্যায়
১১
नारद उवाच
भृगुरत्रिर्वसिष्ठश्च गौतमश्च तथाङ्गिराः |
১৫ ক
शान्ति পর্ব
অধ্যায়
১৮৩
भृगुरु उवाच
भृगुरुवाच ||
১০ ক