chevron_left  भक्षय़ामिarrow_drop_down
वन পর্ব
অধ্যায় ১৩১
श्येन उवाच
भक्षय़ामि महाराज किमन्नाद्येन तेन मे ||
১৭ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায় ১১৬
भीष्म उवाच
भक्षय़ित्वा तु यो मांसं पश्चादपि निवर्तते |
৪৬ ক
वन পর্ব
অধ্যায় ১৪৬
वैशम्पाय़न उवाच
भक्षय़ित्वा निवर्तस्व ग्राह्यं यदि वचो मम ||
৮১ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ৫৯
वासुदेव उवाच
भक्षय़िष्यन्ति मांसानि ये चान्ये पुरुषादकाः ||
১৯ খ
आदि পর্ব
অধ্যায় ১৩৯
वैशम्पाय़न उवाच
भक्षय़िष्याव सहितौ कुरु तूर्णं वचो मम ||
১০ খ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায় ৬৮
वैशम्पाय़न उवाच
भक्षय़िष्ये विषं तीक्ष्णं प्रवेक्ष्ये वा हुताशनम् ||
৯ খ
शान्ति পর্ব
অধ্যায় ১৭২
भीष्म उवाच
भक्षय़े शालिमांसानि भक्षांश्चोच्चावचान्पुनः ||
২১ খ
अनुशासन পর্ব
অধ্যায় ১০৭
भीष्म उवाच
भक्षय़ेच्छास्त्रदृष्टानि पर्वस्वपि च वर्जय़ेत् ||
৬৮ খ
वन পর্ব
অধ্যায় ১৭৭
सर्प उवाच
भक्षय़ेय़महं कस्माद्भ्रातरं ते वृकोदरम् ||
৩৩ খ
आदि পর্ব
অধ্যায় ৬১
वैशम्पाय़न उवाच
भगदत्त इति ख्यातः स आसीन्मनुजेश्वरः ||
৯ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায় ৬৪
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं च राजानं जलसन्धं च पार्थिवम् ||
৭ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৭৯
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं च विव्याध सप्तत्या कङ्कपत्रिभिः ||
৩৫ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৪
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं तथा शूरं मागधं च महारथम् ||
৫৬ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৯
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं त्रिभिश्चैव कृतवर्माणमष्टभिः ||
৩০ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৭
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं रणे क्रुद्धो विव्याध निशितैः शरैः ||
১০ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৪৩
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं रणे शूरं विराटो वाहिनीपतिः |
৪৬ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৮
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं शितैर्वाणैः सहसा समवाकिरत् ||
৩৬ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৫
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं सपाञ्चालः सर्वतः समवारय़त् ||
২৪ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায় ৫১
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तं हि राजानं कोऽन्यः शक्तस्त्वय़ा विना |
৯ ক
शल्य পর্ব
অধ্যায় ২
वैशम्पाय़न उवाच
भगदत्तः कृपः शल्य आवन्त्योऽथ जय़द्रथः |
১৬ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৯
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तः कृपः शल्यः कृतवर्मा च सात्वतः |
১ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৬০
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तः प्रभिन्नेन कुञ्जरेण विशां पते |
৩৭ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৯২
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तः सुशर्मा च धनञ्जय़मुपाद्रवन् ||
১৬ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৭২
धृतराष्ट्र उवाच
भगदत्तविकर्णाभ्यां द्रौणिसौवलवाह्लिकैः ||
১৮ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায় ৪
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तसुतो राजन्कृतप्रज्ञो महावलः |
২৯ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৮
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तस्ततः क्रुद्धः पाण्डवस्य महात्मनः ||
১১ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৭
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तस्ततः क्रुद्धो माधवं निशितैः शरैः |
৭ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১০৪
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तस्ततः पश्चाद्गजानीकेन संवृतः |
১৩ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৪৩
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तस्ततस्तूर्णं विराटं पृथिवीपतिम् |
৪৮ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৬০
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तस्य तं नागं विषाणैस्तेऽभ्यपीडय़न् ||
৫৪ গ
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায় ৭৪
वैशम्पाय़न उवाच
भगदत्तात्मजस्तत्र निर्ययौ रणकर्कशः ||
১ খ
कर्ण পর্ব
অধ্যায় ১৩
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तादनवरः शिक्षय़ा च वलेन च ||
৩ খ
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৬
सञ्जय़ उवाच
भगदत्ताय़ याहीति पार्थः कृष्णमचोदय़त् ||
২৯ খ
उद्योग পর্ব
অধ্যায় ৪
द्रुपद उवाच
भगदत्ताय़ राज्ञे च पूर्वसागरवासिने ||
১১ খ
शल्य পর্ব
অধ্যায় ২৩
सञ्जय़ उवाच
भगदत्ते हते शूरे काम्वोजे च सुदक्षिणे |
২৮ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৫
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तेन समरे काल्यमानेषु पाण्डुषु |
৪২ ক
द्रोण পর্ব
অধ্যায় ২৮
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो गजस्कन्धात्कृष्णय़ोः स्यन्दनस्थय़ोः ||
৩ খ
सभा পর্ব
অধ্যায় ১৩
श्रीकृष्ण उवाच
भगदत्तो महाराज वृद्धस्तव पितुः सखा |
১৪ ক
आदि পর্ব
অধ্যায় ২
सूत उवाच
भगदत्तो महाराजो यत्र शक्रसमो युधि |
১৬১ ক
कर्ण পর্ব
অধ্যায় ৪
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो महीपालः क्षत्रधर्मरतः सदा |
১৬ ক
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৯১
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो महीपालः पुरन्दरसमो युधि ||
১৫ গ
उद्योग পর্ব
অধ্যায় ১৯
वैशम्पाय़न उवाच
भगदत्तो महीपालः सेनामक्षौहिणीं ददौ ||
১৪ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৬০
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो महेष्वासः कृच्छ्रेण परिवर्तते ||
৫৭ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৯১
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो महेष्वासः स्वनागं प्रत्यचोदय़त् ||
৫১ গ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৯১
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो महेष्वासो भीमसेनमथाद्रवत् ||
৩১ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ১৭
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तो यय़ौ राजा यथा वज्रधरस्तथा ||
৩৬ খ
भीष्म পর্ব
অধ্যায় ৯১
सञ्जय़ उवाच
भगदत्तोऽपि समरे तेन नागेन भारत |
৭৯ ক
आश्वमेधिक পর্ব
অধ্যায় ৪৩
व्रह्मो उवाच
भगदेवानुय़ातानां सर्वासां वामलोचना |
১৪ ক
अनुशासन পর্ব
অধ্যায় ১০৯
अङ्गिरा उवाच
भगदैवं तु यो मासमेकभक्तेन यः क्षपेत् |
২১ ক
उद्योग পর্ব
অধ্যায় ১০৩
कण्व उवाच
भगवँल्लोकसारस्य सदृशेन वपुष्मता |
২৭ ক