द्रोण পর্ব  অধ্যায় ৬৯

महेश्वर उवाच

अवश्यं तु मय़ा कार्यं साह्यं सर्वदिवौकसाम् |  ৬২   ক
ममेदं गात्रजं शक्र कवचं गृह्य भास्वरम् |  ৬২   খ
वधानानेन मन्त्रेण मानसेन सुरेश्वर ||  ৬২   গ
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