शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
अंशकामा वय़ं ते च न चास्माभिर्न तैर्जितम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
अंशवो ये प्रकाशन्ते मम ते केशसञ्ज्ञिताः |
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
अंशस्तु शक्तिं जग्राह मृत्युर्देवः परश्वधम् ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अंशाद्द्रोणं समुत्पन्नं भारद्वाजमय़ोनिजम् ||
६३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अंशावतरणं चात्र देवानां परिकीर्तितम् |
७६ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अंशावतरणं राजन्राक्षसानां च कीर्तितम् ||
९९ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अंशावतरणं श्रुत्वा देवगन्धर्वरक्षसाम् |
१०२ क
आदि पर्व
अध्याय
६२
जनमेजय़ उवाच
अंशावतरणं सम्यग्गन्धर्वाप्सरसां तथा ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
अंशावतरणे यासौ व्रह्मणो भवनेऽभवत् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अंशाश्च क्षितिसम्प्राप्ता देवगन्धर्वरक्षसाम् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमन्तं च सम्पूज्य समापय़त तं क्रतुम् ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमन्तं समाहूय़ असमज्ञःसुतं तदा |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१६०
गन्धर्व उवाच
अंशुमन्तं समुद्यन्तं पूजय़ामास भक्तिमान् ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
अंशुमांश्चेकितानश्च श्रेणिमांश्च महावलः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमांस्तु महेष्वासो यदुक्तः सगरेण ह |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमानपि धर्मात्मा महीं सागरमेखलाम् |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमानेवमुक्तस्तु कपिलेन महात्मना |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अंशुमानेवमुक्तस्तु सगरेण महात्मना |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
अंशुमान्भोजराजस्तु सहसैन्यो महारथः |
६७ क
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
अंशेनावतरस्वेति तथेत्याह च तं हरिः ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
अंशो मित्रश्च साध्याश्च वसवो वासवोऽश्विनौ |
१६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
अंशोऽप्यनुचरान्पञ्च ददौ स्कन्दाय़ धीमते ||
३१ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अंसदेशे निहत्यान्यान्काय़े प्रावेशय़च्छिरः ||
१११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अंसे मां पाणिना स्पृष्ट्वा पुत्रस्ते पर्यभाषत ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
अंसय़ोश्च यमौ कृत्वा पृष्ठे वीभत्सुमेव च ||
८३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
अकण्टकाः कण्टकिन्यो गन्धरूपरसान्विताः ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
शुक्र उवाच
अकण्टकानां वृक्षाणां श्वेतप्राय़ाश्च वर्णतः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
अकत्थमानो युध्यस्व कत्थसेऽर्जुन किं वहु |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
अकम्पत महाराज भय़त्रस्तेव चाङ्गना ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अकम्पनीय़ाः शत्रूणां वभूवुस्तत्र पाण्डवाः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
अकम्पन्नव्यथंश्चैव धारय़ामास भार्गवम् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३
शल्य उवाच
अकम्प्यं नहुषं स्थानाद्दृष्ट्वा च वलसूदनः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अकम्पय़ंस्त्वनीकानि स्मरन्तः क्लेशमात्मनः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१९४
मार्कण्डेय़ उवाच
अकम्पय़त्पद्मनालं ततोऽवुध्यत केशवः ||
१७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
अकम्पय़न्महावेगाः सर्पानलविषोपमाः ||
३३ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अकरोच्छिविरे तेषां रजन्यां द्विगुणं तमः ||
९० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
अकरोत्किं महाप्राज्ञस्तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
अकरोत्तात वैषम्यं यस्मिन्यदनुपश्यति ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
अकरोत्तुमुलं युद्धं भीष्मः शान्तनवस्तदा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
अकरोत्तेषु वैषम्यं तत्तु जीवोऽनु पश्यति ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
अकरोत्पाण्डवाह्वानं धृतराष्ट्रः सुतप्रिय़ः ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
अकरोत्पृथिवीं राजन्यज्ञय़ूपशताङ्किताम् |
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५९
वासुदेव उवाच
अकरोत्स ततः कालं शरतल्पगतो मुनिः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अकरोत्स महावाहुः सर्वशस्त्रभृतां वरः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
अकरोत्संविदं तेन पाण्डवेन महात्मना ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
अकरोत्सहसा नादं पाण्डूनां भय़मादधत् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अकरोद्गजसम्वाधां नदीमुत्तरशोणिताम् |
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
अकरोद्दुष्करं कर्म रणे कौरवशासनात् ||
७ ग
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
अकरोद्दुष्करं कर्म शरैरस्त्रानुमन्त्रितैः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
शुक उवाच
अकरोद्यच्छरीरेषु कथं तदुपलक्षय़ेत् |
७ क