अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
जानीय़ामिति मे वुद्धिस्त्वत्प्रसादात्सुरोत्तम ||
१८८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
जानुजङ्घोऽनरण्योऽर्कः प्रिय़भृत्यः शुभव्रतः ||
१७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
जानुभ्यां च महाभागान्देवान्साध्यानवाप्नुय़ात् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
जानुभ्यां धनुरुत्सृज्य रामो मोहवशं गतः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
जानुभ्यामवनिं गत्वा प्रणम्य च पुनः पुनः ||
१७८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
जाने त्वां वालिशमतिमकृतात्मानमस्थिरम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
विश्वामित्र उवाच
जानेऽहं धर्मतोऽऽत्मानं श्वानीमुत्सृज जाघनीम् ||
८० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
जानेऽहमेतदप्येवं चीर्णं चरसि क्षत्रिय़े ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
जान्वोर्मूर्धानमाधाय़ चिरमास्से प्रमीलितः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
राजो उवाच
जापकस्य दृढीकारः कथमेतद्भविष्यति ||
१०५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८९
युधिष्ठिर उवाच
जापका इति किं चैतत्साङ्ख्ययोगक्रिय़ाविधिः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८९
युधिष्ठिर उवाच
जापकानां फलावाप्तिं श्रोतुमिच्छामि भारत |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९२
भीष्म उवाच
जापकानां फलावाप्तिर्मय़ा ते सम्प्रकीर्तिता |
११७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
जापकानां विशिष्टं तु प्रत्युत्थानं समाधिकम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
जापकार्थमय़ं यत्नस्तदर्थं वय़मागताः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९३
भीष्म उवाच
जापकैस्तुल्यफलता योगानां नात्र संशय़ः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्य इदं वाक्यमव्रवीत्कुरुसंसदि ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८५
अग्निरु उवाच
जामदग्न्य प्रमाणज्ञा वेदश्रुतिनिदर्शनात् ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
जामदग्न्यं प्रति विभो धन्यमाय़ुष्यमेव च ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यं रणे राममाय़ोध्य वसुसम्भवः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यः कुरुक्षेत्रे युधि येन महात्मना |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
जामदग्न्यः पुरा रामः सर्वास्त्रविदनुत्तमः |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यवचः श्रुत्वा कण्वोऽपि भगवानृषिः |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यश्च कौन्तेय़माह धर्मभृतां वरः |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यश्च रामो नः कथामकथय़त्पुरा ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यसमः कुन्ति विष्णुतुल्यपराक्रमः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यस्तथा रामः काम्यश्चेत्येवमादय़ः |
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
जामदग्न्यस्तथा रामः परवीरनिघातिना ||
४५ ख
आदि पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्यस्तपस्तेपे महेन्द्रे पर्वतोत्तमे ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
जामदग्न्यस्य रामस्य चरितं भूरितेजसः ||
११६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
जामदग्न्यस्य रामस्य मार्कण्डेय़स्य धीमतः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
जामदग्न्यस्य रामस्य यदुक्तमृषिसत्तमैः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८६
कर्ण उवाच
जामदग्न्यादुपात्तं यत्तथा द्रोणान्महात्मनः ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
जामदग्न्यान्महाघोरं व्राह्ममस्त्रमशिक्षत ||
६७ ख
विराट पर्व
अध्याय
४३
कर्ण उवाच
जामदग्न्यान्मय़ा ह्यस्त्रं यत्प्राप्तमृषिसत्तमात् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
जामदग्न्याभ्यनुज्ञातमस्त्रे दुर्वारपौरुषम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
जामदग्न्येन गोविन्द रामेणाक्लिष्टकर्मणा ||
१३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८४
भीष्म उवाच
जामदग्न्येन मे युद्धमिदं परमदारुणम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
जामदग्न्येन रामेण आहृते वै महात्मना |
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय
१३
श्रीकृष्ण उवाच
जामदग्न्येन रामेण क्षत्रं यदवशेषितम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
जामदग्न्येन रामेण तीव्ररोषान्वितेन वै |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
जामदग्न्येन रामेण पितुर्वधममृष्यता |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्येन रामेण पुरा यो न पराजितः |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
जामदग्न्येन रामेण महास्त्राणि प्रमुञ्चता |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
जामदग्न्येन रामेण यः स सर्वविदां वरः |
७० क
वन पर्व
अध्याय
२०४
वृद्धावू ऊचतुः
जामदग्न्येन रामेण यथा वृद्धौ सुपूजितौ |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नाग उवाच
जामदग्न्येन रामेण सहस्रनय़नोपमः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७९
भीष्म उवाच
जामदग्न्येन समरे योद्धुमित्यवभर्त्सय़त् ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
जामदग्न्येन सहितास्तथान्ये वेदपारगाः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
जामदग्न्योऽथ रामोऽत्र नाभागसगरौ तथा ||
१७ ख