आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
अनादिनिधनं लोके चक्रं सम्परिवर्तते ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३७
श्रीभगवानु उवाच
अनादिनिधनं लोके चक्रहस्तं च मां मुने |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनादिनिधनं विष्णुं सर्वलोकमहेश्वरम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
अनादिनिधनः श्रीमान्हरिर्नाराय़णः प्रभुः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४६
युधिष्ठिर उवाच
अनादिनिधनश्चाद्यस्त्वमेव पुरुषोत्तम ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१०८
सुपर्ण उवाच
अनादिनिधनस्यात्र विष्णोः स्थानमनुत्तमम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
अनादिनिधनस्याहं सर्वय़ोनेर्महात्मनः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
अनादिनिधना नित्या वागुत्सृष्टा स्वय़म्भुवा ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०२
जनक उवाच
अनादिनिधनावेतावुभावेव महामुने |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
अनादिनिधनावेतावुभावेवेश्वरौ मतौ |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
अनादिनिधनो देवः स कर्ता जगतः प्रभुः |
८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७५
भीष्म उवाच
अनादिनिधनो देवस्तथाभेद्योऽजरामरः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३५०
नाग उवाच
अनादिनिधनो विप्र किमाश्चर्यमतः परम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३००
याज्ञवल्क्य उवाच
अनादिनिधनो व्रह्मा नित्यश्चाक्षर एव च ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९३
वसिष्ठ उवाच
अनादिनिधनोऽनन्तः सर्वदर्शी निरामय़ः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
अनादिमत्परं व्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६४
भीष्म उवाच
अनादिमध्यनिधनं देवं नाराय़णं प्रति ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
अनादिमध्यनिधनं निर्द्वन्द्वं कर्तृ शाश्वतम् |
९७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य; मनन्तवाहुं शशिसूर्यनेत्रम् |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
अनादिमध्यान्तमपारय़ोगं; लोकस्य सेतुं प्रवदन्ति विप्राः ||
७० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
अनादिरादिर्विश्वस्य तस्मै विश्वात्मने नमः ||
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनादिर्भूर्भुवो लक्ष्मीः सुवीरो रुचिराङ्गदः |
११४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
अनादिष्टस्तु गुरुणा को नु युध्येत मानवः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
अनादृतास्तु यस्यैते सर्वास्तस्याफलाः क्रिय़ाः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०९
भीष्म उवाच
अनादृतास्तु यस्यैते सर्वास्तस्याफलाः क्रिय़ाः ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
१२४
लोमश उवाच
अनादृत्य ततः शक्रं ग्रहं जग्राह भार्गवः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
अनादृत्य ततो भीष्मस्तं शिखण्डिनमाहवे |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अनादृत्य तु तद्वाक्यं दक्षस्य भगवाञ्शशी |
५२ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
अनादृत्य तु तद्वाक्यं नकुलः सुपिपासितः |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अनादृत्य तु तद्वाक्यं मद्रराजेन भाषितम् |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
अनादृत्य तु तद्वाक्यं सहदेवः पिपासितः |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
अनादृत्य तु तद्वाक्यमर्थवद्द्रोणभीष्मय़ोः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
अनादृत्य महात्मानं कपिलं कालचोदिताः |
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
अनादृत्य वचः पथ्यं गाङ्गेय़स्य महात्मनः |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
अनादृत्य वलं वाह्वोर्भीमसेनस्य माधव |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
अनादृत्यैव तद्वाक्यं प्रजहाराथ फल्गुनः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०३
गुरुरु उवाच
अनाद्यं यत्परं व्रह्म न देवा नर्षय़ो विदुः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
अनाद्यन्तमजं दिव्यमजरं ध्रुवमव्ययम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
अनाद्यन्ता तु सा तृष्णा अन्तर्देहगता नृणाम् |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
अनाद्यन्तावुभावेतावलिङ्गौ चाप्युभावपि ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
अनाद्यो ह्यमध्यस्तथा चाप्यनन्तः; प्रगीतोऽहमीशो विभुर्लोकसाक्षी ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
अनादय़न्सिंहनादैः पाण्डवाः सर्वतोदिशम् ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अनाधृष्टिं कुण्डभेदं वैराटं दीर्घलोचनम् |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्टिरदीनात्मा कस्तं द्रोणादवारय़त् ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्टिर्महातेजा उद्धवश्च महाय़शाः |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्टिश्चेकितानश्चेदिराजोऽथ सात्यकिः |
६२ क
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्टिसुतास्तात राजसूय़ाश्वमेधिनः ||
१० ग
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्टिस्तथाक्रूरः साम्वो निशठ एव च |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
१०८
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्यः कुण्डभेदी विरावी दीर्घलोचनः |
१३ क