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स्त्री पर्व
अध्याय २१
गान्धार्यु उवाच
अनाधृष्यः परैर्युद्धे शत्रुभिर्मघवानिव |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
अनाधृष्यमिवान्येषां शूराणामभवत्तदा ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५३
वैशम्पाय़न उवाच
अनाधृष्या भविष्यामस्त्रिदशानामपि ध्रुवम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
अनापराधिनं यस्मात्पुत्रं हिंसितवान्मम ||
४१ ख
आदि पर्व
अध्याय २०५
वैशम्पाय़न उवाच
अनापृच्छ्य च राजानं गते मय़ि न संशय़ः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय २६
युधिष्ठिर उवाच
अनाप्तः सन्नाप्ततमस्य वाचं; सुय़ोधनो विदुरस्यावमन्य |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
अनाप्तदक्षिणैर्यज्ञैर्न यजेत कथञ्चन ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
अनाप्तानां प्रग्रहात्त्वं नरेन्द्र; तथाप्तानां निग्रहाच्चैव राजन् |
२९ क
आदि पर्व
अध्याय १३३
वैशम्पाय़न उवाच
अनाप्तैर्दत्तमादत्ते नरः शस्त्रमलोहजम् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३९
वैशम्पाय़न उवाच
अनामन्त्र्यैव तान्विप्रांस्तमुवाच महीपतिम् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २५५
अर्जुन उवाच
अनामिषमिदं कर्म कथं वा मन्यते भवान् ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३९
विदुर उवाच
अनाम्नाय़मला वेदा व्राह्मणस्याव्रतं मलम् |
६४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
नारद उवाच
अनाम्नाय़मला वेदा व्राह्मणस्याव्रतं मलम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
भीष्म उवाच
अनामय़ं च राजेन्द्र शुकः सानुचरस्य ह ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २०४
मार्कण्डेय़ उवाच
अनामय़ं च वां कच्चित्सदैवेह शरीरय़ोः ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय १४८
व्राह्मण उवाच
अनामय़ं जनस्यास्य येन स्यादद्य शाश्वतम् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
सनत्सुजात उवाच
अनामय़ं तन्महदुद्यतं यशो; वाचो विकारान्कवय़ो वदन्ति |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
अनामय़ं पृच्छति त्वाम्विकेय़ो; वृद्धो राजा धृतराष्ट्रो मनीषी |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय २३
युधिष्ठिर उवाच
अनामय़ं प्रतिजाने तवाहं; सहानुजैः कुशली चास्मि विद्वन् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
अनामय़ं मद्वचनेन पृच्छे; र्धृतराष्ट्रः पाण्डवैः शान्तिमीप्सुः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २२
धृतराष्ट्र उवाच
अनामय़ं मद्वचनेन पृच्छेः; सर्वांस्तथा द्रौपदेय़ांश्च पञ्च ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
अनामय़ं स्याद्धर्मस्य कुरूणां कुरुनन्दन ||
११ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
वैशम्पाय़न उवाच
अनामय़ं स्वस्ति चेति पृथाथो कर्णमव्रवीत् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
अनामय़ा वीतशोका नित्यं मुदितमानसाः |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
अनामय़ास्तात मनस्विनस्ते; कुरुश्रेष्ठान्पृच्छसि पार्थ यांस्त्वम् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
अनारतं दिवारात्रमविश्रान्तमवर्तत ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
अनारभ्या भवन्त्यर्थाः केचिन्नित्यं तथागताः |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४४
धृतराष्ट्र उवाच
अनारभ्या वसतीहार्य काले; कथं व्राह्मण्यममृतत्वं लभेत ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
अनारमन्तः संवान्ति सर्वगाः सर्वधारिणः ||
५३ ख
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
अनारमन्तो निघ्नन्तो महास्त्रैः शतघातिभिः |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय १४
भीम उवाच
अनारम्भपरो राजा वल्मीक इव सीदति |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
कपिल उवाच
अनारम्भाः सुधृतय़ः शुचय़ो व्रह्मसंश्रिताः |
२० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
अनारम्भात्तु कार्याणां नार्थः सम्पद्यते क्वचित् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
अनारम्भे तु न फलं न गुणो दृश्यतेऽच्युत ||
४८ ग
सभा पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
अनारम्भे तु निय़तो भवेदगुणनिश्चय़ः |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
कपिल उवाच
अनारम्भे ह्यदोषः स्यादारम्भेऽदोष उत्तमः |
१६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
अनार्जवमसञ्ज्ञत्वं कर्म पापमचेतना |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
अनार्जवैरार्जवैश्च शत्रुपक्षस्य भेदनम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
अनार्तवं क्रूरमनिष्टवर्षं; वभूव तत्संहरणं प्रजानाम् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
अनार्तवं पुष्पफलं दर्शय़न्ति वने द्रुमाः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
अनार्तो व्याधिरहितो गच्छेदनशनं तु यः |
५१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
अनार्यं च नृशंसं च कृतघ्नं च हि मे भवेत् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
अनार्यं परमं कृत्वा मिथ्यावादी च पाण्डवः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय २२८
धृतराष्ट्र उवाच
अनार्यं परमं तत्स्यादशक्यं तच्च मे मतम् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६६
सञ्जय़ उवाच
अनार्यं सुनृशंसस्य धर्मपुत्रस्य मे श्रुतम् ||
१९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ११८
सञ्जय़ उवाच
अनार्यकर्म त्वार्येण सुदुष्करतरं भुवि ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
अनार्यकर्मन्कस्मात्त्वमिमां कन्यां जिहीर्षसि |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
जनमेजय़ उवाच
अनार्यकेष्वभिरतं मरणे कृतनिश्चय़म् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३०
सञ्जय़ उवाच
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यं रणे राजन्पलाय़नम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन ||
२ ख