आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पाण्डवांस्तत्र वासुदेवं च भारत |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पितरं वृद्धं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पुत्रं वीभत्सुर्मघवानिव तं यथा ||
७० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पुत्रांस्तान्सर्वान्ये चान्येऽपि रणे हताः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पृथिवीं चिह्नैर्भीमस्य परिचिह्निताम् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श फल्गुनस्तत्र सह देव्या महाद्युतिम् ||
५५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श भारतान्सर्वान्स्थितान्सम्परिवार्य तम् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१२२
लोमश उवाच
ददर्श भार्गवो धीमांश्चरन्तीमिव विद्युतम् ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
ददर्श भृशदुर्दर्शं सर्वदेवैरपीश्वरम् |
५६ क
वन पर्व
अध्याय
५४
वृहदश्व उवाच
ददर्श भैमी पुरुषान्पञ्च तुल्याकृतीनिव ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
ददर्श मकरावासं गम्भीरोदं महोदधिम् ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श मलदिग्धाङ्गं जटिलं चीरवाससम् |
३० क
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
ददर्श मृगय़ूथानि द्रवमाणानि सर्वशः |
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ददर्श यदुवीराणामापाने वैशसं महत् ||
२२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श यौवनं प्राप्ता ऋतुं सा चान्वचिन्तय़त् ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श राजन्पाञ्चाली यथा मत्तं महाद्विपम् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ददर्श राजन्पाञ्चाल्यः सेनापतिरमित्रजित् ||
१४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श राजा कौन्तेय़स्तान्यदृश्यानि चाभवन् ||
५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
ददर्श रामस्तं चापि कृमिं सूकरसंनिभम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
ददर्श रावणस्तं च रथं पुत्रविनाकृतम् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
११६
अकृतव्रण उवाच
ददर्श रेणुका राजन्नागच्छन्ती यदृच्छय़ा ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
ददर्श लोकः कुरुसृञ्जय़ाश्च; तद्द्वैरथं भीष्मधनञ्जय़ाभ्याम् ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श वासुदेवेन शेषितं पूर्ववैरिणा ||
७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श विपरीतानि निमित्तानि युधिष्ठिरः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६१
गन्धर्व उवाच
ददर्श विपुलश्रोणीं तामेवाभिमुखे स्थिताम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श विमलं तोय़ं शिवं वहु च पाण्डवः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श वीरुधं तत्र लम्वमानां यदृच्छय़ा ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
उत्तङ्क उवाच
ददर्श वृक्षांश्च वहून्नानाद्विजगणाय़ुतान् ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श व्राह्मणः कश्चिन्मन्त्रसिद्धो महावलः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श व्राह्मणांश्चैव सोऽभिरूपानुपस्थितान् ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
ददर्श शय़ने तस्मिञ्शय़ानं भृगुनन्दनम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श स तदा गावः शतशोऽथ सहस्रशः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श स महावाहुर्भय़ादागतसाध्वसः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
ददर्श सा भीमसुता पतिमन्वेषती तदा ||
१०५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श सा वुद्धिमती दूरादपि यथान्तिके |
४ क
वन पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श साक्षाद्देवेन्द्रं पितरं पाकशासनम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
ददर्श सुतमाय़ान्तं दिवाकरसमप्रभम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७३
गन्धर्व उवाच
ददर्श सुपरिक्लिष्टः कस्मिंश्चिद्वननिर्झरे |
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
ददर्श सुरलोकस्थं शक्रेण सचिवं सह ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श स्वेषु धिष्ण्येषु दीप्तिमन्ति स्वय़ार्चिषा ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्शाथ ततो जिष्णुः पुरुषं काञ्चनप्रभम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
ददर्शाथ महासार्थं हस्त्यश्वरथसङ्कुलम् ||
१०६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्शाथ मुनिश्रेष्ठमुत्तङ्कममितौजसम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७२
भीष्म उवाच
ददर्शाथाग्रतो वृत्रं विष्ठितं पर्वतोपमम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्शाद्भुतरूपाणि विमानानि सहस्रशः ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
ददर्शाद्भुतसङ्काशं धनदस्य गृहाद्वरम् ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
नारद उवाच
ददर्शाद्भुतसङ्काशं पुलस्त्यमृषिसत्तमम् ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्शानन्तरं कृष्णां धौम्यं चापि जनार्दनः ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्शानन्तरं कृष्णो भगिनीं स्वां महाय़शाः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
ददर्शापदि कष्टाय़ां गाण्डीवस्य पराभवम् ||
२२६ ख