वन पर्व
अध्याय
२२९
वैशम्पाय़न उवाच
अगच्छदानुपूर्व्येण पुण्यं द्वैतवनं सरः |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अगच्छद्ग्रहणं तत्र दीर्घसूत्रः सहापरैः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अगच्छद्दारय़न्भूमिं चित्रपुङ्खः शिलीमुखः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
अगच्छद्दारय़न्सेनां सिन्धुवेगो नगानिव ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
अगच्छद्राजशार्दूल दुःखशोकपराय़णा ||
१७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
अगच्छन्द्रौणिमुत्सृज्य विप्रकीर्णरथध्वजाः ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
११८
वैशम्पाय़न उवाच
अगच्छन्नग्रतस्तस्य दीप्यमानाः स्वलङ्कृताः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
अगच्छन्वहवो मासा निघ्नतः पक्षिणो वहून् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५७
वैशम्पाय़न उवाच
अगच्छन्वहवो मासाः पश्यतां महदद्भुतम् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अगच्छन्विलय़ं सर्वे तार्क्ष्यं दृष्ट्वेव पन्नगाः ||
६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अगच्छन्सहितास्तत्र यत्र दुर्योधनो हतः ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
अगणश्चैव लोपश्च महात्मा सर्वपूजितः |
९३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
विश्वामित्र उवाच
अगतिर्वहुपुत्रः स्याद्विसस्तैन्यं करोति यः ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
मुनिरु उवाच
अगतीकगतिर्ह्येषा या राज्ञा सह जीविका ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०
भीम उवाच
अगतीन्कागतीनस्मान्नष्टार्थानर्थसिद्धय़े |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
जनमेजय़ उवाच
अगत्वा गतय़स्तिस्रो यद्गच्छन्त्यव्ययं हरिम् ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय
५१
शकुनिरु उवाच
अगत्वा संशय़महमय़ुद्ध्वा च चमूमुखे |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
६९
विदुर उवाच
अगदं वोऽस्तु भद्रं वो द्रक्ष्यामि पुनरागतान् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
अगदस्याप्यधनुषो विरथस्य विवर्मणः |
४४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
अगन्धमरसस्पर्शमरूपाशव्दमव्ययम् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४६
व्रह्मो उवाच
अगन्धरसमस्पर्शमरूपाशव्दमेव च |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
अगन्धरसमस्पर्शमशव्दमपरिग्रहम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अगमत्प्रत्ययं भूय़ो दृष्टा सीतेति भारत ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
अगमत्सुमहान्कालो न चाधर्ममवुध्यत ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
अगमन्नो मनः कर्णं वन्धुमात्ययिकेष्विव ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
अगमन्प्रक्षय़ं केचिन्न्यवर्तन्त तथापरे ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
अगमन्सहितास्तत्र न कश्चिदवहीय़ते ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५
सूत उवाच
अगम्यं मनसाप्यन्यैर्नदीवृक्षसमन्वितम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
२६
सूत उवाच
अगम्यं मनसाप्यन्यैस्तस्याचख्यौ स कश्यपः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
अगम्यकल्पा पृथिवी क्षणेनासीत्सुदारुणा ||
१९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
अगम्यकल्पा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अगम्यमार्गा समरे विशीर्णैरिव पर्वतैः ||
३० ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा |
७३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा ||
८२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी मांसशोणितकर्दमा ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपा पृथिवी शोणिताक्ता तदाभवत् |
७२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
अगम्यरूपां पृथिवीं मांसशोणितकर्दमाम् |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
अगम्या परभार्येति चतुर्थो धर्मसङ्करः ||
६२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७३
अर्जुन उवाच
अगम्यागमनं कस्माद्वसिष्ठेन महात्मना |
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
अगम्यागमनं चैव वाच्यावाच्यं तथैव च |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
अगम्यागमनाच्चैव वर्तते वर्णसङ्करः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
अगम्यागमने राजन्प्राय़श्चित्तं विधीय़ते |
३१ क
वन पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
अगम्यानि नरैरल्पैस्तीर्थानि मनुजेश्वर ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अगम्याश्च न गच्छेत राजपत्नीः सखीस्तथा |
१०९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३७
व्यास उवाच
अगर्हणीय़ो न च गर्हतेऽन्या; न्स वै विप्रः परमात्मानमीक्षेत् |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
अगस्त्य एव कृत्स्नं तु वातापिं वुभुजे ततः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
अगस्त्यं गोत्रतश्चापि नामतश्चापि शर्मिणम् ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यः परमप्रीतः पूजय़ित्वा यथाविधि ||
३६ ख