भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
अनुरूपं शय़ानस्य पाण्डवोपहितं त्वय़ा |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
अनुरूपं हि पापस्य प्राय़श्चित्तमुदाहृतम् |
३९ क
सभा पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
अनुरूपा च भीमस्य गाण्डीवं भवतो यथा ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११९
भीष्म उवाच
अनुरूपाणि कर्माणि भृत्येभ्यो यः प्रय़च्छति |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
अनुरूपादिव कुलादिति चिन्त्य मनो दधे ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५६
सौदास उवाच
अनुरूपेण चामुक्ते तत्प्रमाणे हि जाय़तः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
२७९
अश्वपतिरु उवाच
अनुरूपो हि संय़ोगे त्वं ममाहं तवापि च |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६९
भीष्म उवाच
अनुरोधविरोधाभ्यां समः स्यादचलो ध्रुवः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
अनुलिप्तः परार्ध्येन चन्दनेन सुगन्धिना ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अनुलोमः सुगन्धी च पृषतैश्च समन्वितः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११४
भीष्म उवाच
अनुलोमस्तथास्तव्धस्तेन नाभ्येति वेतसः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
अनुलोमेन जाय़न्ते लीय़न्ते प्रतिलोमतः |
३२ क
वन पर्व
अध्याय
८६
धौम्य उवाच
अनुवंष्यां जगौ गाथां नृगस्य धरणीपतेः ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
अनुवत्स्यन्ति चापीमाः समेषु विषमेषु च |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
अनुवन्धं क्षय़ं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
अनुवन्धं च सम्प्रेक्ष्य विपाकांश्चैव कर्मणाम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
अनुवन्धवधौ ज्ञात्वा पीडां हि परिवर्जय़ेत् ||
५७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
युधिष्ठिर उवाच
अनुवन्धश्च पापोऽत्र शेषश्चाप्यवशिष्यते ||
५७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
अनुवन्धानवेक्षेत सानुवन्धेषु कर्मसु |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६२
वैशम्पाय़न उवाच
अनुवन्धे च कल्याणं यद्वचो व्रह्मवादिनः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
अनुवन्धे तु ये दोषास्तान्न पश्यन्ति मोहिताः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
२८०
मार्कण्डेय़ उवाच
अनुवर्तती तु भर्तारं जगाम मृदुगामिनी |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय
६
सूत उवाच
अनुवर्तती सृतिं तस्या भृगोः पत्न्या यशस्विनः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
अनुवर्तामहे वृत्तमहिंस्राणां महात्मनाम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
अनुवर्तितवान्मोहादन्यमन्यं जनाज्जनम् ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
अनुवर्त्स्यति तं चापि धृतराष्ट्रः सुतप्रिय़ः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
अनुवव्राज सम्भ्रान्तः पृष्ठतः सान्त्वय़न्नृपः |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३०
कुन्त्यु उवाच
अनुवाकहता वुद्धिर्धर्ममेवैकमीक्षते ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०
भीम उवाच
अनुवाकहतावुद्धिर्नैषा तत्त्वार्थदर्शिनी ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अनुविन्दस्तु गदय़ा कुन्तिभोजमताडय़त् |
७१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
अनुविन्दस्तु गदय़ा ललाटे मधुसूदनम् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अनुवुध्यस्व राजेन्द्र वेत्थ धर्मान्सनातनान् |
५२ क
वन पर्व
अध्याय
२२८
शकुनिरु उवाच
अनुवृत्ताश्च ते सर्वे पाण्डवा धर्मचारिणः |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
अनुव्रजति को न्वेष मामित्येव च सोऽव्रवीत् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
अनुव्रजन्ति सङ्कटे व्रजन्तमेकपातिनम् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
६२
वृहदश्व उवाच
अनुव्रजन्ती वहुला न स्वपामि निशाः सदा ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
५६
जनमेजय़ उवाच
अनुव्रजन्नरव्याघ्रं वञ्च्यमानं दुरात्मभिः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७
भीष्म उवाच
अनुव्रजेदुपासीत स यज्ञः पञ्चदक्षिणः ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
२६
वैशम्पाय़न उवाच
अनुव्रता महात्मानं भ्रातरं भ्रातरो नृप |
४ क
वन पर्व
अध्याय
७४
वृहदश्व उवाच
अनुव्रतां साभिकामां पुत्रिणीं त्यक्तवान्कथम् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
अनुशाधि कुरून्सङ्ख्ये धत्स्व दुर्योधने जय़म् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
११
धृतराष्ट्र उवाच
अनुशाधि दुरात्मानं पुत्रं दुर्योधनं मम ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
अनुशाधीति कौरव्य तत्साधु वद मे वचः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
अनुशासन्तु मां सन्तो मिथ्यावृत्तं तदाश्रय़म् ||
९ ग
वन पर्व
अध्याय
११
व्यास उवाच
अनुशास्ता यथान्याय़ं शमाय़ास्य कुलस्य ते ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
ऋषय़ ऊचुः
अनुशास्ति च भूतानि कार्येषु वलसूदनः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
अनुशास्य च कौन्तेय़ं पद्मानि प्रतिगृह्य च |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
अनुशास्यस्त्वय़ा व्रह्मन्निय़ोज्यश्च सुतो यथा ||
६१ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
अनुशास्सि यथाकामं कामात्मा शासनातिगः ||
४१ ख
विराट पर्व
अध्याय
४
युधिष्ठिर उवाच
अनुशिष्टाः स्म भद्रं ते नैतद्वक्तास्ति कश्चन |
४५ क