उद्योग पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकजननं सख्यं यय़ोः पुरुषसिंहय़ोः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२८
श्रीभगवानु उवाच
अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यताय़ुधम् ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२०
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकधनरत्नौघो युधिष्ठिरमते तदा ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
अनेकपारिपन्थिके विरूपरौद्ररक्षिते |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
अनेकमिव सन्त्रासान्मेनिरे पाण्डुसृञ्जय़ाः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अनेकमूर्तिरव्यक्तः शतमूर्तिः शताननः ||
९० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
भीष्म उवाच
अनेकरत्नाकरभूषणा च भूः; सुघोषघोषा भुवनौकसां जय़े ||
९० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८६
दुर्योधन उवाच
अनेकरूपं राजेन्द्र न तद्देय़ं कदाचन ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
१४०
लोमश उवाच
अनेकरूपसंस्थाना नानाप्रहरणाश्च ते |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
अनेकरूपसंय़ुक्तैर्मांसमेदोवसाशिभिः |
४८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
अनेकरूपाकृतिभिर्हि वाणै; र्महारथानीकमनुप्रविश्य |
६४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
अनेकवक्त्रनय़नमनेकाद्भुतदर्शनम् |
१० क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
अनेकवर्णानारण्यान्गृहीत्वाश्वान्मनोजवान् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकवर्णैश्च सुगन्धिभिश्च; महाद्रुमैः सन्ततमभ्रमालिभिः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
अनेकवाहूदरवक्त्रनेत्रं; पश्यामि त्वा सर्वतोऽनन्तरूपम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
अनेकशतभौमानि सान्तर्जलवनानि च |
४७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७०
भीष्म उवाच
अनेकशतभौमानि सान्तर्जलवनानि च ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
१३५
लोमश उवाच
अनेकशतवर्षस्य दुर्वलस्य सय़क्ष्मणः ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१०९
लोमश उवाच
अनेकशतवर्षाय़ुस्तपस्वी कोपनो भृशम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अनेकशतविस्तीर्णं योजनानां महोदधिम् |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रं समपश्यन्त लाघवात् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रमनीकमनुकर्षतः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रा नखरप्रासय़ोधिनः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रा भीमसेनस्य रक्षिणः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रास्तावकानां महारथाः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकशतसाहस्रास्ते च सादिवशे स्थिताः ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रे वले दुर्योधनस्य ह |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
अनेकशतसाहस्रैः सर्वाङ्गेषु समर्पिताः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२०
नारद उवाच
अनेकशतय़ज्वानं वचनं प्राह धर्मवित् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकशस्त्वन्निमित्तमय़शस्यं च भारत |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
अनेकशो महाराज वभञ्ज पुरुषर्षभः ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकाग्रं तु तं दृष्ट्वा शकुनिः प्रत्यभाषत |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
अनेकान्तं वहुद्वारं धर्ममाहुर्मनीषिणः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
धृतराष्ट्र उवाच
अनेकान्विप्रकारांश्च सूतपुत्रसमुद्भवान् |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
४४
शकुनिरु उवाच
अनेकैरभ्युपाय़ैश्च त्वय़ारव्धाः पुरासकृत् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकैरभ्युपाय़ैस्ताञ्जिघांसन्ति स्म पाण्डवान् ||
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकैरभ्युपाय़ैस्ताञ्जिघांसन्ति स्म पाण्डवान् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
अनेकैरिषुसङ्घातैरन्तरिक्षं ववर्ष ह ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८७
सञ्जय़ उवाच
अनेकय़ोनय़श्चान्ये तथा मानुषय़ोनय़ः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
अनेन कर्मणा देवि भवन्त्यधनिनो नराः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०३
याज्ञवल्क्य उवाच
अनेन कारणेनैतदव्यक्तं स्यादचेतनम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
अनेन क्रमय़ोगेन पूर्वं पूर्वं न लभ्यते ||
१२० ख
वन पर्व
अध्याय
१०४
लोमश उवाच
अनेन क्रमय़ोगेन मा ते वुद्धिरतोऽन्यथा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१३
जनक उवाच
अनेन क्रमय़ोगेन वहुजातिषु कर्मणा |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
शन्तनुरु उवाच
अनेन च कुमारेण गङ्गादत्तेन किं कृतम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०३
गरुड उवाच
अनेन च मय़ा देव भर्तव्यः प्रसवो महान् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
अनेन चैव देहेन लोकांस्त्वमभिपत्स्यसे |
८५ क
आदि पर्व
अध्याय
१४७
वैशम्पाय़न उवाच
अनेन तं हनिष्यामि राक्षसं पुरुषादकम् ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२८२
गौतम उवाच
अनेन तपसा वेद्मि सर्वं परिचिकीर्षितम् |
१३ क