भीष्म पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यं भीष्मः शान्तनवोऽव्रवीत् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यं भीष्मः शान्तनवोऽव्रवीत् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यं हृष्टरूपो विशां पते |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमव्रवीत्कुरुसंसदि ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमव्रवीत्कुरुसंसदि ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमव्रवीत्साश्रुलोचनम् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमव्रवीद्युद्धलालसः ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय
४६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमुवाच विजने पुनः ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमूचतुः शासनातिगम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमिदं वाक्यमूचतुः शासनातिगम् ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमिमं शूरं कोऽन्यो हन्याद्वृकोदरात् ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुखा दृष्ट्वा क्षय़ं यास्यन्ति कौरवाः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुखा राजन्राजानो विजय़ैषिणः |
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुखानां च पाण्डूनामृषभस्य च ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुखान्सर्वान्पुत्रांस्ते पर्यवारय़त् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमुपागच्छत्तथैव भरतर्षभ ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
दुर्योधनमुपागच्छन्नर्हणानि ततस्ततः |
८७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
दुर्योधनमुपागम्य कृतास्त्रोऽस्मीति चाव्रवीत् ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुपागम्य प्राह प्रहरतां वरः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२२
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमुपाश्रित्य पाण्डवानत्यमन्यत ||
४७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुपासन्ते परिवार्य समन्ततः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमुपाय़ातावक्षौहिण्या पृथक्पृथक् ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
दुर्योधनमुवाचेदं नृपमध्ये जनाधिप ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनमुवाचेदं वचनं हर्षय़न्निव ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनमृते सर्वे भीष्मद्रोणकृपादय़ः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनरथं राजन्नारुरोह विनिःश्वसन् ||
६६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवचः श्रुत्वा ततो भारत दुर्मुखः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२३०
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनवचः श्रुत्वा धार्तराष्ट्रा महावलाः |
४ क
सभा पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनवचः श्रुत्वा धृतराष्ट्रं जनाधिपम् |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवचः श्रुत्वा शल्यः क्रोधसमन्वितः |
१९ क
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवचश्चैव शुश्रुवुः सङ्गता मिथः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवधे यानि रोमाणि हृषितानि नः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७९
सात्यकिरु उवाच
दुर्योधनवधे शान्तिस्तस्य कोपस्य मे भवेत् ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं दृष्ट्वा पुनरासीत्पराङ्मुखम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं राजन्निरुत्साहं कृतव्रणम् ||
७४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं राजन्सर्वमासीत्पराङ्मुखम् ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं सर्वं पुनरासीत्पराङ्मुखम् ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं सर्वं पुनरासीत्पराङ्मुखम् ||
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं सर्वं पुनरासीत्पराङ्मुखम् ||
३८ ग
शल्य पर्व
अध्याय
२०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं सर्वं पुनरासीत्पराङ्मुखम् ||
३० ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनवलं सर्वं यः प्रकर्षन्व्यरोचत ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं हत्वा सह सर्वैः प्रभद्रकैः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनवलं हृष्टः प्रामथद्वै समन्ततः ||
४६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
दुर्योधनवलान्मुक्ता वय़मेव त्रय़ो रथाः |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनशिरो दिष्ट्या पादेन मृदितं त्वय़ा ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च कटुकान्यभ्यभाषताम् ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च वृषसेनोऽथ मद्रराट् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च वृषसेनोऽथ मद्रराट् |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौवलः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
दुर्योधनश्च कर्णश्च शकुनिश्चापि सौवलः |
६५ क