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अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
भृगुरु उवाच
अगस्त्यः परमप्रीतो वभूव विगतज्वरः ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय १०९
पाण्डुरु उवाच
अगस्त्यः सत्रमासीनश्चचार मृगय़ामृषिः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३६
व्यास उवाच
अगस्त्यः सप्त ऋषय़ो मधुच्छन्दोऽघमर्षणः ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यतीर्थं च पवित्रपुण्यं; नारीतीर्थान्यथ वीरो ददर्श ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
अगस्त्यतीर्थं पाण्ड्येषु वारुणं च युधिष्ठिर ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय २०८
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यतीर्थं सौभद्रं पौलोमं च सुपावनम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अगस्त्यमत्यद्भुतवीर्यदीप्तं; तं चार्थमूचुः सहिताः सुरास्ते ||
७ ख
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
अगस्त्यमन्वय़ाद्धित्वा कामान्सर्वानमानुषान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
अगस्त्यमाश्रमस्थं वै समुपेत्येदमव्रवीत् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
अगस्त्यमृषिमासाद्य जीर्णः क्रूरो महासुरः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यवटमासाद्य वसिष्ठस्य च पर्वतम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८
शल्य उवाच
अगस्त्यशापाभिहतो विनष्टः शाश्वतीः समाः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
अगस्त्यशास्तां च दिशं प्रय़ाताः स्म जनार्दन |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय १८४
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यशास्तामभितो दिशं तु; शिरांसि तेषां कुरुसत्तमानाम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय ९५
लोमश उवाच
अगस्त्यश्च परां प्रीतिं भार्याय़ामकरोत्प्रभुः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ९६
लोमश उवाच
अगस्त्यश्च श्रुतर्वा च वध्र्यश्वश्च महीपतिः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
अगस्त्यश्चापि भगवानेतस्मिन्काल एव तु |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११५
नारद उवाच
अगस्त्यश्चापि वैदर्भ्यां सावित्र्यां सत्यवान्यथा |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
अगस्त्यसर आसाद्य पितृदेवार्चने रतः |
६३ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अगस्त्यसहिता देवाः सगन्धर्वमहोरगाः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यस्य च राजेन्द्र तत्राश्रमवरो महान् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
अगस्त्यस्य तदा क्रुद्धो वामेनाभ्यहनच्छिरः ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अगस्त्यस्य प्रभावेन यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ९८
लोमश उवाच
अगस्त्यस्य महाराज प्रभावममितात्मनः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यस्य महाय़ज्ञे पुरावृत्तमरिन्दम ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यस्यातितपसः कर्तुमर्हन्त्यनुग्रहम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १०९
पाण्डुरु उवाच
अगस्त्यस्याभिचारेण युष्माकं वै वपा हुता ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
अगस्त्यस्याश्रमः ख्यातः सर्वर्तुकुसुमान्वितः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
अगस्त्यस्याश्रमश्चैव वहुमूलफलोदकः ||
१५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्याद्भारताचार्यः प्रत्यपद्यत मे पिता ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
अगस्त्याद्वरमासाद्य तन्मे निगदतः शृणु ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्याश्रममासाद्य दुर्जय़ाय़ामुवास ह ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
अगस्त्येन तदा राजंस्तपसा भावितात्मना ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अगस्त्येन पुरा राजन्मृगय़ा येन पूज्यते ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १०८
लोमश उवाच
अगस्त्येन महाराज यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
१९ ग
वन पर्व
अध्याय १०१
विष्णुरु उवाच
अगस्त्येन विना को हि शक्तोऽन्योऽर्णवशोषणे ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय ९७
लोमश उवाच
अगस्त्येनाभ्यनुज्ञाता जग्मू राजर्षय़स्तदा |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३९
विश्वामित्र उवाच
अगस्त्येनासुरो जग्धो वातापिः क्षुधितेन वै |
६७ क
वन पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्येनेह वातापिः किमर्थमुपशामितः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यो भगवान्यत्र गतो वैवस्वतं प्रति |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९५
वैशम्पाय़न उवाच
अगस्त्यो यजमानोऽसौ ददात्यन्नं विमत्सरः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
अगस्त्योऽथ मतङ्गश्च कालो मृत्युस्तथैव च |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०३
भृगुरु उवाच
अगस्त्योऽपि महातेजाः कृत्वा कार्यं शतक्रतोः |
२८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
अगह्वरेण धर्मेण तस्माद्गच्छ दिवं द्विज ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
अगाच्छोषं समुद्रश्च हिमवांश्च व्यशीर्यत ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
अगाधं प्रस्थितं दृष्ट्वा समुद्रमिव कौरवम् ||
७५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
अगाधजन्मामरणं च राज; न्निरामय़ं वीतभय़ं शिवं च |
३८ क
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
अगाधतोय़ाः परिखा मीननक्रसमाकुलाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १९
सूत उवाच
अगाधपारं विस्तीर्णमप्रमेय़ं सरित्पतिम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
अगाधवुद्धिं धर्मज्ञं स्वजेथा मधुसूदन ||
४८ ख