अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
युधिष्ठिर उवाच
व्राह्मणस्वानि ये मन्दा हरन्ति भरतर्षभ |
१ क
आदि पर्व
अध्याय
२०५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणस्वे हृते चोरैर्धर्मार्थे च विलोपिते |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
व्राह्मणा एव जाय़ेरन्नान्यो वर्णः कथञ्चन |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५४
भीष्म उवाच
व्राह्मणा एव जाय़ेरन्पुण्यवाग्वुद्धिकर्मणः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०८
भीष्म उवाच
व्राह्मणा गुरवश्चेमे तथामात्या गुरूत्तमाः |
१७१ क
वन पर्व
अध्याय
३१
द्रौपद्यु उवाच
व्राह्मणा गुरवश्चैव जानन्त्यपि च देवताः ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
व्राह्मणा ज्ञानसम्पन्ना यथावच्छ्रुतनिश्चय़ाः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१८१
भृगुरु उवाच
व्राह्मणा धर्मतन्त्रस्थास्तपस्तेषां न नश्यति |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१९७
व्राह्मण उवाच
व्राह्मणा न गरीय़ांसो गरीय़ांस्ते पतिः कृतः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
व्राह्मणा निन्दिता राजन्हन्युस्त्रिपुरुषं कुलम् ||
४५ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा नैगमाश्चैव परिवार्योपतस्थिरे ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
व्राह्मणा भरतश्रेष्ठ सततं व्रह्मवादिनः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा मानवास्तेषां साङ्गं वेदमदीधरन् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
व्राह्मणा मृष्टवसनाः सुप्रीताः स्म तदाभवन् ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
व्राह्मणा मे सहाय़ाश्चेदेवमस्तु सुरर्षभाः ||
११५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७८
राजो उवाच
व्राह्मणा मे स्वकर्मस्था मामकान्तरमाविशः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
व्राह्मणा यं प्रशंसन्ति पुरुषः स प्रवर्धते |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
पृथिव्यु उवाच
व्राह्मणा यं प्रशंसन्ति पुरुषः स प्रवर्धते |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८
धृतराष्ट्र उवाच
व्राह्मणा राजपुत्राश्च स कथं मृत्युना हतः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
व्राह्मणा लोकसारेण सृष्टा धात्रा गुणार्थिना |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा वहवस्तत्र समन्तात्पर्यवारय़न् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय
४५
दुर्योधन उवाच
व्राह्मणा वाटधानाश्च गोमन्तः शतसङ्घशः |
२४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
व्राह्मणा विस्मिताः सर्वे यदुक्तं चित्रभानुना ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०७
गुरुरु उवाच
व्राह्मणा वेदतत्त्वज्ञास्तत्त्वार्थगतिनिश्चय़ाः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३९
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा वेदविद्वांसस्तपोभिर्विमलीकृताः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२३९
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा वेदवेदाङ्गपारगाः सुदृढव्रताः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२०१
व्याध उवाच
व्राह्मणा वै महाभागाः पितरोऽग्रभुजः सदा |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणा व्रह्मणा सृष्टा मुखात्क्षत्रमथोरसः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
व्राह्मणा व्रह्मय़ोनिष्ठा ह्ययोनिममृतात्मकम् ||
२१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४७
व्रह्मो उवाच
व्राह्मणा व्रह्मय़ोनिस्था ज्ञानं व्रह्म परं विदुः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३८
व्रह्मो उवाच
व्राह्मणा व्रह्मय़ोनिस्थास्ते धीराः साधुदर्शिनः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणा हि परं तेजो व्राह्मणा हि परं तपः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
व्राह्मणा हि परं श्रेय़ो दिवि चेह च भारत ||
२०८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
व्राह्मणा हि महात्मानो देवानामपि देवताः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
व्राह्मणा हि महाभागा देवानामपि देवताः |
४२ क
वन पर्व
अध्याय
२८८
कुन्त्यु उवाच
व्राह्मणा हि महाभागाः पूजिताः पृथिवीपते |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१९७
व्राह्मण उवाच
व्राह्मणा ह्यग्निसदृशा दहेय़ुः पृथिवीमपि ||
२२ ग
आदि पर्व
अध्याय
१६८
वसिष्ठ उवाच
व्राह्मणांश्च मनुष्येन्द्र मावमंस्थाः कदाचन ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणांश्च महावाहुः स च तैरभिनन्दितः |
२६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणांश्च महीपालान्नानादेशसमागतान् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणांश्चात्र मन्त्रज्ञान्वाचय़ामास मङ्गलम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणांश्चापि तान्सर्वान्समुपादाय़ राक्षसाः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२३
कामन्द उवाच
व्राह्मणांश्चापि सेवेत क्षमाय़ुक्तान्मनस्विनः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
व्राह्मणांश्चाभिमन्येत गुरूंश्चाप्यभिपूजय़ेत् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय
१२१
लोमश उवाच
व्राह्मणांस्तर्पय़ामास नानादिग्भ्यः समागतान् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणांस्तर्पय़ित्वा च निष्कान्दत्त्वा पृथक्पृथक् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६२
दुर्योधन उवाच
व्राह्मणांस्तर्पय़िष्यामि गोभिरश्वैर्धनेन च ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
व्राह्मणांस्तर्पय़ेद्द्रव्यैस्ततो यज्ञे यतव्रतः |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणाः कथय़न्तः स्म धृतराष्ट्रमुपासते ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३९
कर्ण उवाच
व्राह्मणाः कथय़िष्यन्ति महाभारतमाहवम् |
५६ क