chevron_left  अन्योन्यमासाद्यarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यमासाद्य हतं महद्भि; र्नराश्वनागैर्गिरिकूटकल्पैः ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यमासादय़तोः पृषत्कै; र्विषाणघातैर्द्विपय़ोरिवोग्रैः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १८१
वैशम्पाय़न उवाच
अन्योन्यमाह्वय़न्तौ तौ मत्ताविव महागजौ |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
अन्योन्यमिथुनाः सर्वे तथान्योन्यानुजीविनः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यमीक्षां चक्राते दहन्ताविव लोचनैः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
अन्योन्यमेवमुक्त्वा च सम्प्रहस्य च ते मिथः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यरक्षितं वीर वलं त्वामभिवर्तते ||
४८ ग
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यवधसंय़ुक्तमन्योन्यप्रीतिवर्धनम् ||
३८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
अन्योन्यवन्धनावेतौ विनान्योन्यं न सिध्यतः ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यवेगाभिहतौ निपेततुररिन्दमौ ||
२४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
अन्योन्यव्यतिषक्ताश्च त्रिगुणाः पञ्च धातवः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यशृङ्गाभिहतौ रेजतुर्वृषभाविव ||
७० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अन्योन्यसचिवा राजंस्तान्पाहि महतो भय़ात् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यसमदुःखास्ते अन्योन्यसमसाहसाः |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
विदुर उवाच
अन्योन्यसमुपष्टम्भादन्योन्यापाश्रय़ेण च |
६३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५
कर्ण उवाच
अन्योन्यस्पर्धिनां तेषां यद्येकं सत्करिष्यसि |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धिनोर्वीर्ये शक्रशम्वरय़ोरिव ||
६३ ख
शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धिनौ तौ तु शरैः संनतपर्वभिः |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धय़ा राजँल्लज्जय़ान्येऽवतस्थिरे ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धय़ा राजञ्श्रेय़स्कामाः सुमध्यमाः ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धय़ा राजन्व्याय़च्छन्त महारथाः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अन्योन्यस्पर्धय़ारूढावावामादित्यसंसदम् ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
व्रह्मदत्त उवाच
अन्योन्यस्य च विश्वासः श्वपचेन शुनो यथा ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य तदा योधा निकृन्तन्तो विशां पते |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य धनुश्चैव चिच्छिदुस्ते महारथाः ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य धनुश्छित्त्वा हय़ान्हत्वा च भारत |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
अन्योन्यस्य प्रिय़करावन्योन्यस्य प्रिय़ंवदौ |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ६९
विदुर उवाच
अन्योन्यस्य प्रिय़ाः सर्वे तथैव प्रिय़वादिनः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य रणे क्रुद्धौ चिक्षिपाते मुहुर्मुहुः ||
४५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य वधार्थाय़ जिगीषूणां रणाजिरे ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य वधे यत्नं कुर्वाणौ तौ महारथौ |
७१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य वधे यत्नं चक्रतुस्तौ महारथौ |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
अन्योन्यस्य स आख्येय़ इति तद्वै मृषा कृतम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
अन्योन्यस्य स आख्येय़ो मृषा शापोऽन्यथा भवेत् ||
८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य हय़ान्विद्ध्वा ध्वजौ च सुमहावलौ |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य हय़ान्विद्ध्वा विभिदाते परस्परम् ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्य हय़ान्हत्वा धनुषी विनिकृत्य च |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
जमदग्निरु उवाच
अन्योन्यस्यातिथिश्चास्तु विसस्तैन्यं करोति यः ||
६४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
अन्योन्यस्यानभिद्रोहे तौ सङ्क्रामय़तां ततः ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
अन्योन्यस्यान्तरं प्रेप्सू परस्परजय़ैषिणौ ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्यान्तरप्रेप्सू प्रचक्रातेऽन्तरं प्रति ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
अन्योन्यस्याभिसङ्क्रुद्धावन्योन्यं जघ्नतुः शरैः |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
करालजनक उवाच
अन्योन्यस्याभिसम्वन्धादन्योन्यगुणसंश्रय़ात् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यस्यावलुम्पन्ति सारमेय़ा इवामिषम् ||
७१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
व्राह्मण उवाच
अन्योन्यस्योत्तरं नास्ति यदिष्टं तत्समाचर ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यागस्कृतां राजन्यमराष्ट्रविवर्धनम् ||
५५ ग
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
अन्योन्यातिशय़ैर्युक्तं यथा वृत्रमहेन्द्रय़ोः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
अन्योन्यानुग्रहे वृत्ते नास्ति भूय़ः समागमः ||
१५८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३९
व्रह्मो उवाच
अन्योन्यापाश्रय़ाः सर्वे तथान्योन्यानुवर्तिनः ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
अन्योन्यापाश्रय़ाश्चैव तथान्योन्यानुवर्तिनः |
५ क