द्रोण पर्व
अध्याय
९९
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं च रथशक्तिं च भल्लाभ्यां परमास्त्रवित् |
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
ध्वजं च वाहनं चैव तस्मात्स वृषभध्वजः ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजं च सिंहं सौवर्णमुच्छ्रय़न्तु तवाभिभोः ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजं च सिंहमुच्छ्रित्य सारथ्ये समकल्पय़त् ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चास्य त्रिभिर्भल्लैश्चिच्छेद परमौजसः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चास्य शरेणाजौ धनुश्चैकेन चिच्छिदे ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चिच्छेद भल्लेन त्रिभिर्विव्याध पाण्डवम् |
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चिच्छेद भल्लेन त्वरमाणः पराक्रमी ||
६२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चिच्छेद भल्लेन सौवलस्य हसन्निव ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चिच्छेद राधेय़ः पताकाश्च न्यपातय़त् ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं चिच्छेद समरे सारथिं च न्यपातय़त् ||
१४ ग
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
ध्वजं चेदिपतिः क्षिप्रमहार्षीत्स्वय़मुद्यतम् ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजं चैवास्य कौन्तेय़ः शरैरभ्यहनद्दृढम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं छत्रं च भल्लाभ्यां तथोभौ पार्ष्णिसारथी ||
२९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं छत्रं पताकां च रथं शक्तिं गदां तथा ||
१२५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं धनुश्च निशितैः सारथिं चाप्यपातय़त् ||
१२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं धनुश्च सूतं च संममर्दाहवे रिपोः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं धनुश्चास्य तथा क्षुराभ्यां समकृन्तत ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं धनुस्तथा छत्रमुभौ च पार्ष्णिसारथी |
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं निपतितं दृष्ट्वा पाण्डवं च व्यवस्थितम् |
५८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं षोडशभिर्वाणैर्यन्तारं चास्य सप्तभिः ||
६५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं सांय़मनेश्चापि सोऽष्टाभिरपवर्जय़त् ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजं सिंहं रथात्तस्मादपनीय़ महारथः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं सूतं हय़ांश्चास्य छित्त्वा नृत्यन्निवाहवे ||
२७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजं सौभद्रविशिखैः पतितं भरतर्षभ |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजः सूर्य इवाभाति सोमश्चात्र प्रदृश्यते ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७०
सञ्जय़ उवाच
ध्वजद्रुमं शस्त्रशृङ्गं हतनागमहाशिलम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजपत्तिगणानुग्रैर्वाणैर्विव्याध पाण्डवः ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८९
धृतराष्ट्र उवाच
ध्वजभूषणसम्वाधं रत्नपट्टेन सञ्चितम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
ध्वजभूषणसम्वाधं रत्नपट्टेन सञ्चितम् |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमस्य समासाद्य तस्थौ स धरणीतले ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमाधिरथेश्छित्त्वा सूतमभ्यहनत्तदा ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजमिन्दीवरश्यामं वंशं कनकभूषणम् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमुन्मथितं दृष्ट्वा युय़ुत्सुः क्रोधमूर्छितः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन चिच्छेद छत्रं द्वाभ्यां विशां पते |
५५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन चिच्छेद पार्ष्णिमेकेन सारथिम् |
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन चिच्छेद भीमसेनस्य पत्रिणा ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन चिच्छेद सारथिं चास्य सप्तभिः ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन वाणेन चिच्छेदाञ्जनपर्वणः ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन वाणेन विव्याध युधि मारिष ||
२२ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन विव्याध जाम्वूनदविभूषितम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन विव्याध माधवस्य रथे स्थितम् ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन विव्याध सारथिं चास्य पञ्चभिः |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन विव्याध सारथिं चास्य सप्तभिः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेन विव्याध साय़केन शितेन ह ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजमेकेषुणोन्मथ्य त्रिभिस्तं हृद्यताडय़त् ||
६३ ग
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ध्वजवन्तोऽस्त्रवन्तश्च शस्त्रवन्तस्तथैव च |
५४ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
ध्वजवृक्षं पत्तितृणं रथसिंहगणाय़ुतम् |
१२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
ध्वजश्च दिव्यो द्युतिमान्वानरो विस्मय़ङ्करः ||
४८ ग
विराट पर्व
अध्याय
४१
उत्तर उवाच
ध्वजस्य चापि रूपं मे दृष्टपूर्वं न हीदृशम् |
१४ ख