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शान्ति पर्व
अध्याय ३४७
भीष्म उवाच
अपि त्वमसि कल्याणि देवतातिथिपूजने |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
कर्ण उवाच
अपि त्वा कृष्ण पश्याम जीवन्तोऽस्मान्महारणात् |
४५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
अपि त्वां केचिदुन्मत्तं मन्यन्तेऽतद्विदो जनाः ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
अपि त्वां न तपेत्कर्ण राज्यलाभोपपादना |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३२
विदुरो उवाच
अपि त्वां नानुपश्येय़ं दीना दीनमवस्थितम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
अपि दुर्योधनं कृष्ण सर्वे वय़मधश्चराः |
२० क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
अपि दुष्कृतकर्माणं नय़न्ति परमां गतिम् ||
१७४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५२
कुरुरु उवाच
अपि दुष्कृतकर्माणं नय़न्ति परमां गतिम् ||
१८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४५
युधिष्ठिर उवाच
अपि दृष्टस्त्वय़ा तत्र कुशली स कुरूद्वहः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
अपि द्रोणकृपौ वीरौ छादय़िष्यामि ताञ्शरैः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १५७
वैशम्पाय़न उवाच
अपि धर्मेण वर्तध्वं शास्त्रेण च परन्तपाः |
४ क
वन पर्व
अध्याय ३३
द्रौपद्यु उवाच
अपि धाता विधाता च यथाय़मुदके वकः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४८
शौनक उवाच
अपि धिक्क्रिय़माणोऽपि त्यज्यमानोऽप्यनेकधा ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
अपि नः स कुले जाय़ाद्यो नो दद्यात्त्रय़ोदशीम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १८७
वैशम्पाय़न उवाच
अपि नः संशय़स्यान्ते मनस्तुष्टिरिहाविशेत् |
५ क
वन पर्व
अध्याय २९९
वैशम्पाय़न उवाच
अपि नस्तद्भवेद्भूय़ो यद्वय़ं व्राह्मणैः सह |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८८
भीष्म उवाच
अपि नान्ताय़ कल्पेत वेणोरिव फलागमः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २४८
वैशम्पाय़न उवाच
अपि नाम वरारोहा मामेषा लोकसुन्दरी |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७४
भीष्म उवाच
अपि नामाद्य पश्येय़मार्यं तं लोकविश्रुतम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
पराशर उवाच
अपि नामेप्सितः पुत्रो मम स्याद्वै महेश्वरात् |
२८ क
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
अपि नो भागधेय़ं स्यादित्युक्त्वा पुनराव्रजन् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १८७
वैशम्पाय़न उवाच
अपि नो भागधेय़ानि शुभानि स्युः परन्तप ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
अपि नो व्यसनं घोरं दुर्योधनकृतं महत् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
अपि पञ्चाशतिः शूरा मृद्नन्ति परवाहिनीम् ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
अपि पाञ्चालराजस्य विराटस्य च मानद |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
अपि पापकृतां राज्ञां प्रतिगृह्णन्ति साधवः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
अपि पापकृतो रौद्राः सत्यं कृत्वा पृथक्पृथक् |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
अपि पापशरीरस्य आचारो हन्त्यलक्षणम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
अपि पापसमाचारं व्रह्मघ्नमपि वानृतम् |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
अपि पुत्र जिता लोकाः शुभास्ते स्वेन कर्मणा |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ३३
वासुकिरु उवाच
अपि मन्त्रय़माणा हि हेतुं पश्याम मोक्षणे |
८ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अपि मां जीवय़िष्यध्वमपि वः कृतकृत्यता ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
अपि मामिति सर्वेषां तेषामासीन्मनोगतम् ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
मुनिरु उवाच
अपि मूलफलाजीवो रमस्वैको महावने |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
अपि मूलफलैरिज्यो यज्ञः स्वर्ग्यः परन्तप ||
५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
अपि मे जननी चेय़ं शुश्रूषुर्विगतक्लमा |
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२२
मैत्रेय़ उवाच
अपि मे दर्शनादेव भवतोऽभ्युदय़ो महान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११९
सञ्जय़ उवाच
अपि मेरुं वहेत्कश्चित्तरेद्वा मकरालय़म् |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७८
भीष्म उवाच
अपि यत्र त्वय़ा राम कृतं शौचं पुरा पितुः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४१
धृतराष्ट्र उवाच
अपि यौधिष्ठिरात्सैन्यात्कश्चिदन्वपतद्रथी ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय २७८
अश्वपतिरु उवाच
अपि राजात्मजो दाता व्रह्मण्यो वापि सत्यवान् |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अपि राज्यमय़ोध्याय़ां कारय़िष्याम्यहं पुनः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
अपि रुद्रः कुमारो वा व्रह्मा वा विष्णुरेव वा |
७२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२७
वैशम्पाय़न उवाच
अपि लोभाभिभूतस्य पन्थानमनुदर्शय़ेत् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
अपि वज्रधरः साक्षात्किमुतान्ये धनुर्भृतः |
७ क
वन पर्व
अध्याय १४२
युधिष्ठिर उवाच
अपि वज्रधरस्यापि भवेत्कालविषोपमः ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ४७
भीष्म उवाच
अपि वज्रभृता गुप्तं तथावीर्या हि पाण्डवाः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
अर्जुन उवाच
अपि वज्रेण गोविन्द स्वय़ं मघवता युधि ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३२
व्यास उवाच
अपि वर्णावकृष्टस्तु नारी वा धर्मकाङ्क्षिणी |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
अपि वर्षशतस्यान्ते स द्विहाय़नवच्चरेत् ||
२६ ख