अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
अपूजय़ं च मनसा रौक्मिणेय़ द्विजं तदा ||
४८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़ंस्तत्र नराधिपं तं; दध्मुश्च शङ्खाञ्शशिसंनिकाशान् ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़ंस्तदा वाग्भिरनुकूलाभिराहवे ||
१५ ग
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
अपूजय़त मां राजन्प्रीतिमांश्चाभवन्मय़ि ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२२०
मार्कण्डेय़ उवाच
अपूजय़दमेय़ात्मा पितरं पितृवत्सलः ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२८
युय़ुत्सुरु उवाच
अपूजय़दमेय़ात्मा युय़ुत्सुं वाक्यकोविदम् ||
९० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
११८
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़न्त तं देवा विस्मितास्तस्य कर्मभिः |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
अपूजय़न्त संहृष्टा वाग्भिः शाल्वं नराधिपाः ||
३४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़न्ननीकानि परेषां तावकानि च ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४२
वैशम्पाय़न उवाच
अपूजय़न्नरव्याघ्रं भीमसेनमरिन्दमम् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
अपूजय़न्महात्मानो व्राह्मणास्तं महावलम् |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
अपूजय़न्महाभागं तथा विद्वत्तय़ैव तु ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़न्महाराज कौरवाः परमाद्भुतम् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़न्महेष्वासा धार्तराष्ट्रा नरोत्तमम् |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़न्मारुतिं च संहृष्टास्ते महावलम् |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अपूजय़ेतां वार्ष्णेय़ं व्रुवाणौ साधु साध्विति |
१५५ क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
अपूजय़ेतामन्योन्यं चित्रसेनधनञ्जय़ौ ||
१५ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अपूपमांसवाट्यानामाशिनः शीलवर्जिताः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
६३
नारद उवाच
अपूपान्पुनर्वसौ दत्त्वा तथैवान्नानि शोभने |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अपूपान्सक्तुपिण्डीश्च खादन्तो मथितान्विताः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
१८४
सरस्वत्यु उवाच
अपूर्णमश्रोत्रिय़माह तार्क्ष्य; न वै तादृग्जुहुय़ादग्निहोत्रम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्यां पूरय़न्निच्छामाय़ुषापि न शक्नुय़ात् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
अपूर्वं चैव पूर्वं च तत्पात्रं मानमर्हति ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वं वा भवेत्पात्रमथ वापि चिरोषितम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३७
भीष्म उवाच
अपूर्वं वापि यत्पात्रं यच्चापि स्याच्चिरोषितम् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५
शल्य उवाच
अपूर्वं वाहनमिदं त्वय़ोक्तं वरवर्णिनि |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६९
भीष्म उवाच
अपूर्वचारकः सौम्यो अनिकेतः समाहितः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
अपूर्वदर्शनं तात रमणीय़ं भविष्यति ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२८
महेश्वर उवाच
अपूर्वभोजनं धर्मो विघसाशित्वमेव च ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अपूर्वमक्षय़ं क्षय़्यमेतत्प्रश्नमनुत्तमम् ||
२९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
अपूर्वममृतं नित्यं य एनमविचारिणम् |
३३ क
वन पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
अपूर्वमिव पश्याम उदकं नात्र नीय़तेति ||
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८३
पराशर उवाच
अपूर्विणा न कर्तव्यं कर्म लोके विगर्हितम् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वोऽप्यथ वा विद्वान्सम्वन्धी वाथ यो भवेत् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
१४०
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वोऽय़ं सम्भ्रमो लोमशस्य; कृष्णां सर्वे रक्षत मा प्रमादम् |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
अपूरय़त लोकांस्त्रीन्वरे दत्ते महात्मना ||
५५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अपूरय़द्दिशः सर्वा दिवं चापि महास्वनः ||
८८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३८
वाय़ुरु उवाच
अपूरय़न्महौघेन महीं सर्वां च पार्थिव ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
अपृच्छं मातलिं राजन्किमिदं दृश्यतेति वै ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अपृच्छंश्चैव तां दृष्ट्वा का त्वं किं च चिकीर्षसि ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
अपृच्छंश्चैव ते तत्र राजानमपराजितम् |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
अपृच्छंश्चैव मां सर्वे पुत्रं तव जनाधिपम् |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अपृच्छच्च तदा राजा मन्त्रिणः स्वान्सुदुःखितः |
१९४ क
आदि पर्व
अध्याय
३७
सूत उवाच
अपृच्छत कथं तातः स मेऽद्य मृतधारकः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
अपृच्छत च तां भूय़ः क्व यासि कमलालय़े ||
५६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
अपृच्छत्कुशलं सर्वान्पाण्डवांश्चामितौजसः |
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
अपृच्छत्क्षत्रिय़ांस्तत्र क्व नु राजा महारथः ||
२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अपृच्छत्तेन चाख्यातं प्रोक्तवान्यन्निवोध तत् ||
६९ ख
सभा पर्व
अध्याय
६
वैशम्पाय़न उवाच
अपृच्छत्पाण्डवस्तत्र राजमध्ये महामतिः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
अपृच्छत्पितरं व्रह्मन्कुतो वाय़ुरभूदय़म् |
२६ क