आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
शतक्रतुमभिप्रेक्ष्य महागम्भीरनिःस्वना ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
शतक्रतुमहं देवं भगवन्तं च शङ्करम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
भीष्म उवाच
शतक्रतुरथापश्यद्वलेर्दीप्तां महात्मनः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुरदृश्येन वज्रेणेतीह नः श्रुतम् ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५२
कुरुरु उवाच
शतक्रतुरनिर्विण्णं पृष्ट्वा पृष्ट्वा जगाम ह ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुरभिक्रुद्धस्तत्र वज्रमवासृजत् ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुरभिक्रुद्धस्तत्र वज्रमवासृजत् ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुरभिक्रुद्धस्तत्र वज्रमवासृजत् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुरभिक्रुद्धस्तासु वज्रमवासृजत् ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५
व्यास उवाच
शतक्रतुरिवौजस्वी धर्मात्मा संशितव्रतः ||
८ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
शतक्रतुर्धनेशश्च प्राप्तमर्चन्त्यभीरुकम् ||
४३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
शतक्रतुश्च भगवान्विष्णुश्चादितिनन्दनौ |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
शतक्रतुश्च सम्प्रेक्ष्य विमुखान्देवतागणान् |
११ क
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
शतक्रतुश्चाभिषिच्य स्कन्दं सेनापतिं तदा |
४२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
११
वासुदेव उवाच
शतक्रतुश्चुकोपाथ गन्धस्य विषय़े हृते |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
११
युधिष्ठिर उवाच
शतक्रतुसभाय़ां तु देवाः सङ्कीर्तिता मुने |
४७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
शतक्रतुस्तु तद्वाक्यमृषिभिस्तत्त्वदर्शिभिः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६
शल्य उवाच
शतक्रतो विवर्धस्व सर्वाञ्शत्रून्निषूदय़ |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१८
वैशम्पाय़न उवाच
शतक्रतोरचिन्त्यस्य सत्रे वर्षसहस्रिके |
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
शतक्रतोरिवाचिन्त्यं पुरा वृत्रेण निर्जय़म् |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
७
नारद उवाच
शतक्रतोर्महाराज याम्यां शृणु ममानघ ||
२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
शतक्रतोर्यथा पूर्वं महत्या दैत्यसेनय़ा ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१९
भीष्म उवाच
शतक्रतोश्च संवादं नमुचेश्च युधिष्ठिर ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
शतघण्टा शतानन्दा भगनन्दा च भामिनी |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीं च कृपो राजञ्शरं शल्यश्च संय़ुगे ||
३५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
शतघ्नीं शतनिर्ह्रादां कथं शक्ष्यन्ति मे सुताः ||
२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीः पश्य चित्राश्च विपुलान्परिघांस्तथा |
३४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीकिङ्किणीशक्तिशूलतोमरधारिणा ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
शतघ्नीचक्रहस्ताश्च तथा मुसलपाणय़ः |
१०४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
द्रौणिरु उवाच
शतघ्नीचक्रहस्ताश्च तथा मुसलपाणय़ः |
२७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीनां सचक्राणां भुजानामूरुभिः सह |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीभिः सुघोराभिः पट्टिशैः सपरश्वधैः |
२ क
वन पर्व
अध्याय
१६६
अर्जुन उवाच
शतघ्नीभिर्भुशुण्डीभिः खड्गैश्चित्रैः स्वलङ्कृतैः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
शतघ्नीभिश्च चित्राभिर्वभौ भारत मेदिनी ||
२० ग
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
शतघ्न्य इव चाप्यन्ये वज्राण्युग्राणि वापरे ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
शतचन्द्रं च कौन्तेय़ सहस्राय़ुततारकम् ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
शतचन्द्रं ततश्चर्म गौतमः पार्षतस्य ह |
१९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
शतचन्द्रं ततश्चर्म सर्वोपकरणानि च ||
८६ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
शतचन्द्रचिते गृह्य चर्मणी सुभुजौ तु तौ |
२७ क
स्त्री पर्व
अध्याय
१८
गान्धार्यु उवाच
शतचन्द्राणि चर्माणि ध्वजांश्चादित्यसंनिभान् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
शतद्रुं चन्द्रभागां च यमुनां च महानदीम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
शतद्रुकनदीं तीर्त्वा तां च रम्यामिरावतीम् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
उमो उवाच
शतद्रुर्देविका सिन्धुः कौशिकी गोमती तथा ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
शतद्रुश्च विपाशा च तृतीय़ेरावती तथा |
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
शतद्रूश्च विपाशा च चन्द्रभागा सरस्वती |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११७
गालव उवाच
शतद्वय़ेन कन्येय़ं भवता प्रतिगृह्यताम् ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
विदुर उवाच
शतधा ते शिरो वज्री वज्रेण प्रहरिष्यति ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
शतधा भिन्नदेहान्त्राः क्षीणप्रहरणौजसः |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
१६७
गन्धर्व उवाच
शतधा विद्रुता यस्माच्छतद्रुरिति विश्रुता ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०२
याज्ञवल्क्य उवाच
शतधा सहस्रधा चैव तथा शतसहस्रधा |
२ क