chevron_left  अप्रिय़ेarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
अप्रिय़े तु समुत्पन्ने व्यथां जातु न चार्च्छति ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
अप्रिय़ेऽतिष्ठदत्यन्तं वाल्यान्न द्रोहचेतसा ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
अप्रिय़ो यः परुषो निष्ठुरो हि; क्षुद्रः क्षेप्ता क्षमिणश्चाक्षमावान् |
२० क
वन पर्व
अध्याय ७९
वैशम्पाय़न उवाच
अप्रीतमनसः सर्वे वभूवुरथ पाण्डवाः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
अप्रीय़त महाराज धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ||
२९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
अप्रीय़माणः शोकार्तः पाण्डवं परिषस्वजे ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६८
वैशम्पाय़न उवाच
अप्रेक्षणीय़मभवदार्तस्वरनिनादितम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २
सञ्जय़ उवाच
अप्रेक्षमाणाः शोकार्ता नाभ्यभाषन्परस्परम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
अप्रेक्षापूर्वकरणात्प्राय़श्चित्तं विधीय़ते ||
१२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
अप्रेक्षापूर्वकरणादशुभानां शुभं फलम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
अप्रैषं शाल्वराजाय़ शार्ङ्गमुक्तान्सुवाससः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
अप्रैषीत्समरे तीक्ष्णैः परलोकाय़ मारिष ||
८६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
अप्रैषीद्धेमसञ्छन्नान्द्रोणानीकाय़ पाण्डुरान् ||
१ ख
विराट पर्व
अध्याय १५
द्रौपद्यु उवाच
अप्रैषीद्राजपुत्री मां सुराहारीं तवान्तिकम् |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
अप्रैषीद्विशिखान्घोरान्यमदण्डोपमान्वहून् ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अप्रोक्षितं वृथामांसं विधिहीनं न भक्षय़ेत् |
४२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
अप्रय़च्छंश्च सर्वाणि नित्यं देय़ानि भारत ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
अप्रय़त्नागताः सेव्या गृहस्थैर्विषय़ाः सदा |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१५
भीष्म उवाच
अप्रय़त्नेन पश्यामः केषाञ्चित्तत्स्वभावतः ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अप्रय़त्नेन वीराणामेतद्यतितुमागतः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
अप्लवाः प्लवमासाद्य तर्तुकामा इवार्णवम् ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ६४
कर्ण उवाच
अप्लवेऽम्भसि मग्नानामप्रतिष्ठे निमज्जताम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
अप्लवो हि महादोषमुह्यमानोऽधिगच्छति |
२० क
आदि पर्व
अध्याय २००
युधिष्ठिर उवाच
अप्सरा देवकन्या वा कस्य चैषा तिलोत्तमा |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २४८
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सरा देवकन्या वा माय़ा वा देवनिर्मिता |
१० क
आदि पर्व
अध्याय २०८
नार्यु उवाच
अप्सरास्मि महावाहो देवारण्यविचारिणी |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सरोगणसंय़ुक्ताः शैले क्रीडन्ति नित्यशः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२७
भीष्म उवाच
अप्सरोगणसङ्कीर्णे भूतसङ्घनिषेविते ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
अप्सरोगणसङ्घाश्च समाजग्मुरनेकशः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
अप्सरोगणसम्पूर्णं गन्धर्वैरभिनादितम् ||
११७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
अप्सरोगीतवादित्रैर्नादितं च मनोरमम् |
३८ क
वन पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सरोनूपुररवैः प्रनृत्तवहुवर्हिणम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय १५६
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सरोभिः परिवृतः समृद्ध्या नरवाहनः |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
अप्सरोभिः परिवृतान्मोदमानांस्त्रिविष्टपे ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११
शल्य उवाच
अप्सरोभिः परिवृतो देवकन्यासमावृतः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
अप्सरोभिः समाकीर्णं किंनरैश्चोपशोभितम् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९८
भीष्म उवाच
अप्सरोभिश्च सततं देवैश्च भरतर्षभ ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय १७१
पितर ऊचुः
अप्सु तं मुञ्च भद्रं ते लोका ह्यप्सु प्रतिष्ठिताः ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
अप्सु देवीं तथा सक्तामपस्तेजसि चाश्रिताः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५०
नारद उवाच
अप्सु वर्षसहस्राणि सप्त चैकं च पार्थिव ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
अप्सु वै शय़नं चक्रे महात्मा पुरुषोत्तमः |
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अप्सु वैहाय़सं गच्छेन्मय़ा योऽन्यः सहेति वै ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९७
नारद उवाच
अप्सु सोमप्रभां पीत्वा वसन्ति जलचारिणः ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सुजाता च गोपाली वृहदम्वालिका तथा |
४ क
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
अप्सुहोम्यश्च धौम्यश्च आणीमाण्डव्यकौशिकौ ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
अप्सूपस्पृशतो राजन्मृगी तच्चापिवत्तदा ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
अप्स्विवोत्पलिनी शीघ्रमग्नेरिव शिखा शुभा ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
अप्स्वेव शय़नं चक्रे निद्राय़ोगमुपागतः |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
अप्स्वेव शय़नं चक्रे महात्मा पुरुषोत्तमः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
भीम उवाच
अपय़ात इतो राजा धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः |
५८ क