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आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्य स राजानं विनय़ेन समाहितः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
अभिगम्य स्थलीं तस्य गोसहस्रफलं लभेत् ||
८२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०२
नारद उवाच
अभिगम्य स्वय़ं कन्यामय़ं दातुं समुद्यतः |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११३
नारद उवाच
अभिगम्य हताशो हि निवृत्तो दहते कुलम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय २४६
व्यास उवाच
अभिगम्याथ तं विप्रमुवाच मुनिसत्तमः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
अभिगम्याभिगम्यैनं याचन्ते सततं नराः |
१४३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८
व्यास उवाच
अभिगम्यामरवृतः प्रोवाचेदं वचस्तदा ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्यामरश्रेष्ठाः स्तवै स्तुन्वन्ति चाभिभो ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्याव्रवीत्कृष्णा शरण्यं शरणैषिणी ||
४२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्याव्रवीत्प्रीतः पृथां पृथुय़शा हरिः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५०
भीष्म उवाच
अभिगम्याव्रवीदेनं नारदो भरतर्षभ ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
अभिगम्याव्रवीद्राजा मद्रराजमिदं वचः ||
६१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
अभिगम्याव्रवीद्व्यासो धर्मपुत्रं युधिष्ठिरम् ||
५३ ग
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्याश्रमं पुण्यं दृष्ट्वा च यदुपुङ्गवः |
९ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिगम्योदय़ं तस्य कार्यस्य प्रत्यवेदय़त् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्योपसङ्गृह्य जगाम शिरसा महीम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
अभिगम्योपसङ्गृह्य दाशेय़ीमिदमव्रुवम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९४
राम उवाच
अभिगम्योपसङ्गृह्य पर्यपृच्छदनामय़म् ||
१८ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगम्योपसङ्गृह्य पृच्छ यत्ते मनोगतम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
अभिगम्योपसङ्गृह्य यथावृत्तं न्यवेदय़त् ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिगुप्तो महावाहुर्मरुद्भिरिव वासवः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८९
सञ्जय़ उवाच
अभिघ्नन्ति विषाणाग्रैर्वारणानेव संय़ुगे ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय २२
वासुदेव उवाच
अभिघ्नन्तो भृशं वीरा मम चेतो व्यकम्पय़न् ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय ६६
दुर्योधन उवाच
अभिघ्नन्तो रथव्रातान्सेनाय़ोगाय़ निर्ययुः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिचाराभिसंय़ुक्तमव्रवीच्चैव तां मुनिः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १९६
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिचारैरुपाय़ैश्च ईहन्ते पितरः सुतान् ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
भीष्म उवाच
अभिचारैरुपाय़ैश्च दहेय़ुरपि तेजसा |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
अभिचिक्षेप वेगेन युय़ुधानस्त्वपाक्रमत् ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय २६९
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिजग्मुर्गणानेके पिशाचक्षुद्ररक्षसाम् ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजग्मुर्नरपतेराश्रमं विनय़ानताः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय १३४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजग्मुर्नरश्रेष्ठाञ्श्रुत्वैव परय़ा मुदा ||
२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४९
दुर्योधन उवाच
अभिजग्मुर्महात्मानं मन्त्रवद्भूरिदक्षिणम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजग्मुर्महात्मानः सिद्धा व्रह्मर्षिसत्तमाः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अभिजग्मुर्महेष्वासा रुवन्तो भैरवान्रवान् ||
४५ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजग्मुर्वहून्देशान्सरितः पर्वतांस्तथा ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिजग्मुर्हरीन्द्रं तं रामलक्ष्मणसंनिधौ ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजग्मुस्ततो द्रोणमस्त्रार्थे द्विजसत्तमम् |
४६ ख
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
अभिजग्मुस्तदा भीमं राजानो भीमशासनात् ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
अभिजग्मुस्तदाख्यातुं विप्रकारं सुरेतरैः ||
३१ ख
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
अभिजघ्नतुरन्योन्यं प्रहृष्टाविव कुञ्जरौ ||
१२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजज्ञे महावुद्धिं महावुद्धिर्युधिष्ठिरः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
अभिजातवलं नाम तच्चतुर्थं वलं स्मृतम् ||
५० ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजातोऽसि राजेन्द्र पितुर्वृत्तेन मेधय़ा |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
अभिजातोऽस्मि सिद्धोऽस्मि नास्मि केवलमानुषः |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८
अश्मो उवाच
अभिजातोऽस्मि सिद्धोऽस्मि नास्मि केवलमानुषः |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३८
वासुदेव उवाच
अभिजानन्तु कौन्तेय़ं पूर्वजातं युधिष्ठिरात् ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५४
उत्तङ्क उवाच
अभिजानामि जगतः कर्तारं त्वां जनार्दन |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८७
सञ्जय़ उवाच
अभिजानामि तं देशं यत्र यास्याम्यहं प्रभो ||
१४ ग
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिजानामि विक्रान्तौ तथा व्यासः प्रतापवान् |
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
अभिजानामि व्राह्मणमाख्यातारं विचक्षणम् |
३२ क