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कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
अभिभूः काशिराजश्च काशिकैर्वहुभिर्वृतः |
७४ क
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
अभिभूः सर्वगोऽनन्तो हृषीकेश उरुक्रमः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
अभिभूः सह पुत्रेण सुदाम्ना च सुवर्चसा |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय १८
वासुदेव उवाच
अभिभूतास्ततो देवा विषय़ान्न प्रजज्ञिरे |
१२ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ७
द्रौणिरु उवाच
अभिभूतास्तु कालेन नैषामद्यास्ति जीवितम् ||
६३ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
अभिभूय़ स मां वालां तेजसा वशमानय़त् |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
अभिभूय़ार्जुनस्यैको ध्वजस्तस्थौ महाकपिः ||
२८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
अभिभूय़ेह चार्चिष्मद्व्यसृजत्सप्त मानसान् |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्त्रितमर्चिष्मानुदय़ं भास्करो यथा ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
अभिमन्त्रितानां धनुषा दिव्येन विधिनाक्षिपम् ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २७०
मार्कण्डेय़ उवाच
अभिमन्त्र्य महाशक्तिं चिक्षेपास्य शिरः प्रति ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
अभिमन्त्र्य महास्त्रेण सन्दधे शत्रुनाशनम् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्त्र्याङ्कुशं क्रुद्धो व्यसृजत्पाण्डवोरसि ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्त्र्याथ तच्छुक्रमारात्तिष्ठन्तमाशुगम् |
४२ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
अभिमन्त्र्याहमतुलं द्विषतां च निवर्हणम् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
अभिमन्यत्यभीमानात्तथैव सुकृतान्यपि ||
७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
अभिमन्यत्यसम्वोधात्तथैव त्रिविधान्गुणान् |
२४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं च दुर्धर्षं द्रष्टुमिच्छामि नारद ||
२६ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं च दुर्धर्षं द्रौपदेय़ांश्च भारत ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं च मां चैव हतौ तुल्यं जनार्दन ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७
युधिष्ठिर उवाच
अभिमन्युं च यद्वालं जातं सिंहमिवाद्रिषु |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं तदाय़ान्तं भीष्माय़ाभ्युद्यतं मृधे |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं त्रिभिश्चैव केकय़ान्पञ्चभिस्तथा ||
६७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं द्रौपदेय़ान्विराटद्रुपदावपि |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं पिशङ्गास्तं कुमारमवहन्रणे ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं पुरस्कृत्य महत्या सेनय़ा वृताः ||
५४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८०
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं पुरस्कृत्य योत्स्यन्ति कुरुभिः सह ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं महात्मानं व्यात्ताननमिवान्तकम् |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं महाराज प्रतपन्तं द्विषद्गणान् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं महाराज यान्तं भीष्मरथं प्रति |
१४ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं महेष्वासं निशाकरसमद्युतिम् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं रणे दृष्ट्वा तदा रणविशारदम् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं विनिर्भिद्य प्राविशन्धरणीतलम् ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युं वृहन्तं च द्रौपदेय़ांश्च सर्वशः |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युं समुद्दिश्य वालमेकं महारथम् |
४२ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अभिमन्युं समुद्दिश्य सौभद्रमरिघातिनम् ||
१३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः कृतोत्साहः कृतोत्साहानरिन्दमान् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः प्रविश्यैव तावकान्निशितैः शरैः |
३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युः प्रिय़ः कृष्ण पितॄणां नात्र संशय़ः |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः शरैस्तीक्ष्णैः षड्विंशत्या समर्पय़त् ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः शरैस्तीक्ष्णैश्चिच्छेद भुजगोपमाम् ||
३५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युः सुभद्राय़ामर्जुनादभ्यजाय़त |
१०० क
भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः सुसङ्क्रुद्धः पिशङ्गैस्तुरगोत्तमैः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः स्थितो राजन्विधूमोऽग्निरिव ज्वलन् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युः स्मय़न्धीमान्दुःशासनमथाव्रवीत् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अभिमन्युना च वैराट्याः पर्व वैवाहिकं स्मृतम् |
४९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युप्रभृतय़ः पाण्डवानां महारथाः |
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युप्रभृतय़स्ते द्वादश महारथाः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युमपश्यन्ती शोकव्याकुललोचना ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३३
धृतराष्ट्र उवाच
अभिमन्युमहं सूत सौभद्रमपराजितम् |
११ क