आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युमिति प्राहुरार्जुनिं पुरुषर्षभम् ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युमुखाश्चैव द्रौपदेय़ा महारथाः |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युमुखाश्चैव पाण्डवानां महारथाः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युमुखास्तत्र नामृष्यन्त महारथाः |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युमुपादाय़ सह मात्रा परन्तपाः ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युरथं राजन्समन्तात्पर्यवारय़न् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युरविध्यत्तौ दशभिर्दशभिः शरैः ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युरिव प्रीता द्वारवत्यां रता भृशम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्गदापाणिरश्वत्थामानमाद्रवत् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्दधारैको वेलेव मकरालय़म् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्महाराज तव पुत्रमय़ोधय़त् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्महाराज तावकान्समकम्पय़त् |
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६७
भीष्म उवाच
अभिमन्युर्महाराज रथय़ूथपय़ूथपः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्महाराज सैन्यमध्ये व्यरोचत ||
२४ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
अर्जुन उवाच
अभिमन्युर्महावाहुः पुत्रो मम विशां पते |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्महेष्वासो द्रुपदश्च महारथः |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्महेष्वासो वृहद्वलमय़ोधय़त् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युर्यथा कृष्ण तथा ते तव धर्मतः ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्यथा वृत्तः श्रोतुमिच्छाम्यहं तथा ||
७१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युर्विकर्णस्य हय़ान्हत्वा महाजवान् |
२१ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्युर्वृहत्कीर्तिरर्जुनस्य सुतोऽभवत् ||
८६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युवधं श्रुत्वा ध्रुवमार्तो धनञ्जय़ः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अभिमन्युवधः पर्व प्रतिज्ञापर्व चोच्यते |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युश्च तद्दृष्ट्वा घोररूपं महत्तमः |
२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१३८
वासुदेव उवाच
अभिमन्युश्च ते नित्यं प्रत्यासन्नो भविष्यति |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
वासुदेव उवाच
अभिमन्युश्च यद्वाल एको वहुभिराहवे |
४६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युश्च राजानमम्वष्ठं लोकविश्रुतम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युश्च विक्रान्तो वाहिनीं दहते मम ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युश्च सङ्क्रुद्धः सप्तैते क्रोधमूर्छिताः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११३
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युश्च समरे द्रौपद्याः पञ्च चात्मजाः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्ततः क्रुद्धो नवतिं नतपर्वणाम् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्ततः पश्चाद्विराटश्च महारथः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्ततस्तूर्णमिरावांश्च ततः परम् |
१६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८५
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तथा वीरो हैडिम्वश्च महारथः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तदानीकं लोडय़न्वह्वशोभत ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तु राधेय़ं त्रिसप्तत्या शिलीमुखैः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५८
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तु सङ्क्रुद्धो धृष्टद्युम्ने निपीडिते |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तु सङ्क्रुद्धो भ्रातरं भरतर्षभ |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय
६९
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्युस्तु सङ्क्रुद्धो लक्ष्मणं शुभलक्षणम् |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्यू रथोदारः पिशङ्गैस्तुरगोत्तमैः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्यो कुशलिनो मातुलास्ते महारथाः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्यो रथं तूर्णमारुरोह परन्तपः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्यो वरं तात याचतां दातुमर्हसि |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्योः परेषां च नासीत्कश्चित्पराङ्मुखः ||
१४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७१
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्योः पिता वीरः स एनमनुय़ास्यति ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्योः पितुर्भीतः सव्रीडो वाक्यमव्रवीत् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
अभिमन्योः शरै राजन्न प्राज्ञाय़त किञ्चन ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्योः सुतात्कृष्ण मृताज्जातादरिन्दम ||
८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्योः सुतो जातो मृतो जीवत्वय़ं तथा ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
अभिमन्योः सुतो वीर न सञ्जीवति यद्ययम् |
१४ क