उद्योग पर्व
अध्याय
१६०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत कैतव्यं प्रगृह्य विपुलं भुजम् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत कौन्तेय़ः प्रहसन्निव भारत ||
१५ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत कौरव्य घटोत्कचमरिन्दमम् ||
५३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत दाशार्हमृषभं सर्वसात्वताम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत दाशार्हो भीष्मं शान्तनवं शनैः ||
४१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत धर्मात्मा धर्मराजो धनञ्जय़म् ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत धर्मात्मा भीष्मः प्रीतो धनञ्जय़म् ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत धर्मात्मा भीष्मः शान्तनवस्तदा ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत धर्मात्मा भ्रातॄन्सर्वान्युधिष्ठिरः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत धर्मात्मा राज्ञश्चान्यान्यथावय़ः ||
३८ ख
विराट पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत पाञ्चाली भीमसेनमनिन्दिता ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत पुत्रांस्ते राजन्दुर्योधनस्त्वरन् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६१
मार्कण्डेय़ उवाच
अभ्यभाषत भद्रं ते प्रीय़माणः पुरोहितम् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
अभ्यभाषत राजानं धृतराष्ट्रं महातपाः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषत राजेन्द्रं द्रौपदी योषितां वरा ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत राधेय़ः शल्यं युद्धविशारदम् ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत राधेय़ः संनिवार्योत्तरं वचः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत सङ्क्रुद्धो द्रौणिर्दूरे धनञ्जय़े |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत सङ्क्रुद्धो राक्षसं घोरदर्शनम् ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषत हैडिम्वं दाशार्हः प्रहसन्निव ||
३९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यभाषन्त दुर्धर्षं राजानं सुप्तमम्भसि ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यभाषन्महावाहुं भीमसेनमरिन्दमम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाच्चैव समरे द्रोणमस्त्रभृतां वरम् |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाज्जवनैरश्वैः पाण्डवानामनीकिनीम् |
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाज्जवनैरश्वैः फल्गुनं शत्रुसूदनम् ||
५९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाज्जवनैरश्वैर्भारद्वाजस्य वाहिनीम् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९१
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाज्जवनैरश्वैर्युय़ुधानं महारथम् ||
५२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययाज्जवनैरश्वैस्ततो युद्धमवर्तत ||
५५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययातां त्वराय़ुक्तौ जिगीषन्तौ वलं तव ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययातां महाराज नर्दन्तौ गोवृषाविव ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४०
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्कौरवो राजन्भूरिः सङ्ग्राममूर्धनि ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्ययात्तं च पाञ्चाल्यो विजित्य तरसा महीम् |
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४८
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्तुमुले कर्णं तव सैन्यं विभीषय़न् ||
६० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्तूर्णमव्यग्रो निरपेक्षो विशां पते ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितं युद्धे किरञ्शरशतान्वहून् |
६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५३
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितः कर्णं विशिखान्विकिरन्रणे ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितः कर्णं विसृजन्साय़कान्वहून् ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितो भीमं व्यूढानीकः समन्ततः ||
९७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितो भीमं सहितः पुरुषाशनैः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्त्वरितो राजंस्ततो युद्धमवर्तत ||
४६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्पाण्डवं कर्णो वातोद्धूत इवार्णवः ||
२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्पाण्डवं युद्धे त्वरमाणः पराक्रमी ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्पाण्डवानीकं निघ्नञ्शत्रुगणान्वहून् ||
३७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्पाण्डवान्युद्धे राक्षसं च घटोत्कचम् ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्ययात्पाण्डवान्राजन्सह पुत्रैर्महारथैः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३६
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्पाण्डवान्सङ्ख्ये ततो युद्धमवर्तत |
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्समरे राजन्हन्तुकामो यशस्विनम् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्सहसा तत्र यत्रास्ते माधवः प्रभुः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९२
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्सात्यकिस्तूर्णं पुत्रं तव महारथम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
अभ्ययात्सौवलं भूय़ो व्यात्तानन इवान्तकः ||
९ ख