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द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
अमर्षी वलवान्क्रुद्धो दिधक्षन्निव पावकः ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षी वलवान्पार्थः संरम्भी दृढविक्रमः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
अमर्षेण तु सम्पूर्णः कुन्तीपुत्रस्य राक्षसः |
१० क
सभा पर्व
अध्याय ४३
दुर्योधन उवाच
अमर्षेण सुसम्पूर्णो दह्यमानो दिवानिशम् |
२१ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३३
मातो उवाच
अमर्षेणैव चाप्यर्था नारव्धव्याः सुवालिशैः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १३२
सञ्जय़ उवाच
अमर्षय़न्तो निहतं शतचन्द्रं महारथम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
अमर्षय़न्सैन्धवं वध्यमानं; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१४० ख
सभा पर्व
अध्याय ७
नारद उवाच
अमला धूतपाप्मानो दीप्यमाना इवाग्नय़ः |
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९४
ऋषय़ ऊचुः
अमलो ह्येष तपसा प्रीतः प्रीणाति देवताः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अमांसभक्षणं राजन्प्रशंसन्ति मनीषिणः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अमांसभक्षणे राजन्भय़मन्ते न गच्छति ||
२८ ग
वन पर्व
अध्याय १९९
मार्कण्डेय़ उवाच
अमांसाशी भवत्येवमित्यपि श्रूय़ते श्रुतिः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
अमांसाशी व्रह्मचारी सर्वभूतहिते रतः |
८५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१४
भीष्म उवाच
अमांसाशी सदा च स्यात्पवित्रं च सदा जपेत् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९३
भीष्म उवाच
अमांसाशी सदा च स्यात्पवित्री च सदा भवेत् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
मुनिरु उवाच
अमात्यं को न कुर्वीत राज्यप्रणय़कोविदम् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
अमात्यं नृपतिर्वेद राजा राजानमेव च ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
अमात्यः पण्डितो भूत्वा स चिरं तिष्ठति श्रिय़म् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
अमात्यः शूर एव स्याद्वुद्धिसम्पन्न एव च |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
अमात्यः सानुय़ात्रस्तु तं ददर्श महावने |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
युधिष्ठिर उवाच
अमात्यगुणवृद्धिश्च प्रकृतीनां च वर्धनम् ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १२७
लोमश उवाच
अमात्यपरिषन्मध्ये उपविष्टः सहर्त्विजैः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
अमात्यरक्षाप्रणिधी राजपुत्रस्य रक्षणम् |
३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३७
विदुर उवाच
अमात्यलाभो भद्रं ते द्वितीय़ं वलमुच्यते |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
अमात्यवल्लभानां च विवादांस्तस्य कारय़ेत् |
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १९६
कर्ण उवाच
अमात्यसंस्थः कार्येषु सर्वेष्वेवाभवत्तदा ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
अमात्यस्तं समुत्थाप्य वभूव विगतज्वरः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
अमात्या ज्ञातय़श्चैव सुहृदश्चोपतस्थिरे ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
मुनिरु उवाच
अमात्या मे न रोचन्ते वितृष्णस्य यथोदकम् |
५३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४३
सूत उवाच
अमात्या ये वभूवुश्च राज्ञस्तांश्च ददर्श ह ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
भीष्म उवाच
अमात्या ह्युपहन्तारं भूय़िष्ठं घ्नन्ति भारत ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
अमात्यानां च सर्वेषां मध्यस्थानां च सर्वशः |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
अमात्यानां यदि कामस्य हेतो; रेवंय़ुक्तं कर्म चिकीर्षसि त्वम् |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
कुन्त्यु उवाच
अमात्यानामथो हर्षमादधात्यचिरेण सः ||
३५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
अमात्यानुपधातीतान्पितृपैतामहाञ्शुचीन् |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
अमात्यानुपधातीतान्पितृपैतामहाञ्शुचीन् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
अमात्यान्परिरक्षेत भेदसङ्घातय़ोरपि ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५९
भीष्म उवाच
अमात्यान्वा गुरून्वापि जह्याद्धर्मेण धार्मिकः |
३८ क
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
अमात्यान्वृष्णिवीराणां द्रष्टुमिच्छामि माचिरम् ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय ३९
सूत उवाच
अमात्यान्सुहृदश्चैव प्रोवाच स नराधिपः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
अमात्ये ह्यर्थलिप्सा च मन्त्ररक्षणमेव च ||
१८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय ६
द्रुपद उवाच
अमात्येषु च भिन्नेषु योधेषु विमुखेषु च |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
अमात्येषु च सर्वेषु मित्रेषु त्रिविधेषु च |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
अमात्यैः सह संमन्त्र्य कुर्यात्सन्धिं वलीय़सा ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
अमात्यैश्च नृपश्रेष्ठो धर्मो विग्रहवानिव ||
४५ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
अमात्यो मे भव प्राज्ञ पितेव हि प्रशाधि माम् |
१२६ क
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
अमात्यो हि वलाद्भोक्तुं राजानं प्रार्थय़ेत्तु यः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
अमात्सर्यं क्षमा चैव ह्रीस्तितिक्षानसूय़ता ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
अमात्सर्यं वुधाः प्राहुर्दानं धर्मे च संय़मम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
अमाद्यदिन्द्रः सोमेन दक्षिणाभिर्द्विजातय़ः ||
३१ ख