आदि पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
अमाद्यदिन्द्रः सोमेन दक्षिणाभिर्द्विजातय़ः |
९ क
वन पर्व
अध्याय
८६
धौम्य उवाच
अमाद्यदिन्द्रः सोमेन दक्षिणाभिर्द्विजातय़ः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१२१
लोमश उवाच
अमाद्यदिन्द्रः सोमेन दक्षिणाभिर्द्विजातय़ः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०९
भीष्म उवाच
अमानिता नित्यमेव यस्यैते गुरवस्त्रय़ः ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
४
धौम्य उवाच
अमानितैः सुमानार्हा अज्ञातैः परिवत्सरम् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२३
भीष्म उवाच
अमानिनः सर्वसहा दृष्टार्था विजितेन्द्रिय़ाः |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
अमानी च सदाजिह्मः स्निग्धवाणीप्रदस्तथा |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
अमानी निरभीमानः सर्वतो मुक्त एव सः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
अमानी मानदो मान्यो लोकस्वामी त्रिलोकधृक् |
९३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
अमानी सत्यवाक्षक्तो जितात्मा मान्यमानिता |
१३ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अमानुष इवाकारो वभौ परमभीषणः ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
अमानुषं मनुष्येन्द्रैर्जालं विततमन्तरा |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४३
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषं मानुषजं भीमवेगं महावलम् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
अमानुषकृतस्तत्र दण्डो हन्ति नराधिपम् ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषगतिं प्राप्ताः संसिद्धाः स्म वृकोदर ||
७० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
अमानुषमथो नादं स मुमोच महासुरः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अमानुषश्च सङ्ग्रामस्त्र्यम्वकेन च धीमतः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषाणां जेतारं युद्धेष्वपि धनञ्जय़म् ||
२२ ख
विराट पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषाणां तेषां च भूतानां ध्वजवासिनाम् ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४८
वासुदेव उवाच
अमानुषाणि कर्माणि दर्शितानि च मे विभो ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
अमानुषाणि कर्माणि यस्यैतानि महात्मनः |
४० क
वन पर्व
अध्याय
२३७
दुर्योधन उवाच
अमानुषाणि चास्त्राणि प्रय़ुञ्जानं धनञ्जय़म् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६९
धृतराष्ट्र उवाच
अमानुषाणि सङ्ग्रामे देवैरसुकराणि च ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१६
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषानपि रणे विजेष्यसि न संशय़ः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८८
हंस उवाच
अमानुषान्मानुषो वै विशिष्ट; स्तथाज्ञानाज्ज्ञानवान्वै प्रधानः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
मतङ्ग उवाच
अमानुषी गर्दभीय़ं तस्मात्तप्स्ये तपो महत् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
अमानुषीषु गोवर्जमनावृष्टिर्न दुष्यति |
६६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१०
मरुत्त उवाच
अमानुषेण घोरेण सदस्यास्त्रासिता हि नः ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अमानुषेण रूपेण चरन्तं पितरं तव ||
२६ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
अमानुषेण हन्त्यस्मानस्त्रेण क्षुद्रकर्मकृत् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
८२
यय़ातिरु उवाच
अमानुषेभ्यो मानुषाश्च प्रधाना; विद्वांस्तथैवाविदुषः प्रधानः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
७०
वैशम्पाय़न उवाच
अमानुषैर्वृतः सत्त्वैर्मानुषः सन्महाय़शाः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
जनमेजय़ उवाच
अमानुषो मानुषाणां भवता व्रह्मवित्तम ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
अमानुष्यसमाय़ुक्तान्दास्यकर्मण्यवस्थितान् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
२८७
वैशम्पाय़न उवाच
अमानय़न्हि मानार्हान्वातापिश्च महासुरः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
१३५
इन्द्र उवाच
अमार्ग एष विप्रर्षे येन त्वं यातुमिच्छसि |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
१०५
लोमश उवाच
अमार्गन्त महाराज सर्वं च पृथिवीतलम् ||
१२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
अमार्गेणैवमारभ्य घोरामापदमागतः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
अमावास्यां गतौ यद्वत्सोमसूर्यौ नभस्तले ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
७
सूत उवाच
अमावास्यां च पितरः पौर्णमास्यां च देवताः |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
अमावास्यां तु निवपन्सर्वान्कामानवाप्नुय़ात् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अमावास्यां पौर्णमास्यां चतुर्दश्यां च सर्वशः |
५४ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अमावास्यां महातेजास्तत्रोन्मज्जन्महाद्युतिः |
७० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९१
भीष्म उवाच
अमावास्यां महाप्राज्ञ विप्रानानाय़्य पूजितान् |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अमावास्यां महाराज नित्यशः शशलक्षणः |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
अमावास्यां सम्प्रवृत्तं मुहूर्तं रौद्रमेव च |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
अमाय़या माय़या च निय़न्तव्यं तदा भवेत् ||
२० ख
वन पर्व
अध्याय
३५
युधिष्ठिर उवाच
अमाय़िनं माय़या प्रत्यदेवी; त्ततोऽपश्यं वृजिनं भीमसेन ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
अमितवलपुरःसरा रणे; कुरुवृषभाः शिनिपुत्रमभ्ययुः ||
७ ख