अनुशासन पर्व
अध्याय
१
काल उवाच
अकरोद्यदय़ं कर्म तन्नोऽर्जुनक चोदकम् |
६४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८१
भीष्म उवाच
अकरोद्रथमत्यर्थं रामः सज्जं प्रतापवान् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अकरोद्रौद्रमात्मानं किरञ्शरशतैः परान् ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
अकरोद्वन्धमोक्षांश्च वध्यानां मोक्षणं तथा |
१५ क
विराट पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
अकरोद्विधिवत्सर्वं प्रस्थाने यद्विधीय़ते ||
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
अकरोद्विमुखान्सर्वान्पार्थिवान्पाण्डुनन्दनः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अकरोद्व्यादितास्यश्च भीषय़ंस्तव सैनिकान् ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४४
कर्ण उवाच
अकरोन्मय़ि यत्पापं भवती सुमहात्ययम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८
युधिष्ठिर उवाच
अकर्तव्यमपि ह्येतत्कर्तुमर्हसि मातुल ||
२७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
अकर्ता चाकृतज्ञश्च त्यक्तधर्मः प्रिय़ानृतः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अकर्ता चैव कर्ता च कार्यं कारणमेव च |
५६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२३
भीष्म उवाच
अकर्ता चैव कर्ता च लभते यस्य यादृशम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
अकर्ता ह्येव भवति कर्ता त्वेव करोति तत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
अकर्तारममूर्तं च भगवानाह तीर्थवित् ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८४
सरस्वत्यु उवाच
अकर्दमा मीनवत्यः सुतीर्था; हिरण्मय़ैरावृताः पुण्डरीकैः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
अकर्दमामनुदकाममर्यादामलोष्टकाम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
अकर्मणः फलं चैव स एव परमव्ययः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
अकर्मणश्च वोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५७
सञ्जय़ उवाच
अकर्मणा कत्थितेन सन्तः कुपुरुषं विदुः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३७
विदुर उवाच
अकर्मशीलं च महाशनं च; लोकद्विष्टं वहुमाय़ं नृशंसम् |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१९
व्राह्मण उवाच
अकर्मा चाविकाङ्क्षश्च पश्यञ्जगदशाश्वतम् |
८ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
अकर्माणो हि जीवन्ति स्थावरा नेतरे जनाः ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
अकल्ककस्य विप्रस्य भैक्षोत्करकृतात्मनः |
५३ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
अकल्कको निरारम्भो लघ्वाहारो जितेन्द्रिय़ः |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
अकल्कको ह्यतर्कश्च व्राह्मणो भरतर्षभ |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अकल्प्यन्त च मातङ्गाः समनह्यन्त पत्तय़ः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
२११
मार्कण्डेय़ उवाच
अकल्मषः कल्मषाणां कर्ता क्रोधाश्रितस्तु सः ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३२
महेश्वर उवाच
अकषाय़कृतश्चैव मार्गः सेव्यः सदा वुधैः ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४४
वासुदेव उवाच
अकस्माच्च प्रहसति तथाकस्मात्प्ररोदिति |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
अकस्माच्च स्रवेद्यस्य वाममक्षि नराधिप |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
२८२
गौतम उवाच
अकस्माच्चक्षुषः प्राप्तिर्द्युमत्सेनस्य ते पितुः |
३३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अकस्माच्चैव पार्थानां द्वेषणं नोपपद्यते |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०८
भीष्म उवाच
अकस्मात्क्रोधलोभाद्वा मोहाद्वापि स्वभावजात् |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
अकस्मात्पाण्डवान्हि त्वं द्विषसीति मतिर्मम |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
अकस्मात्प्रक्रिय़ा नॄणामकस्माच्चापकर्षणम् |
८४ क
वन पर्व
अध्याय
७१
वृहदश्व उवाच
अकस्मात्सहसा प्राप्तं स्त्रीमन्त्रं न स्म विन्दति ||
२० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७३
वैशम्पाय़न उवाच
अकस्मात्स्मय़मानश्च रहस्यास्से रुदन्निव |
१० क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
अकस्मादपि यः कश्चिदर्थं प्राप्नोति पूरुषः |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
अकस्मादेव कुप्यन्ति प्रसीदन्त्यनिमित्ततः |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
अकस्माद्द्विषसे राजञ्जन्मप्रभृति पाण्डवान् |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
अकस्माद्धर्मपुत्रस्य धर्मात्मेति यशो गतम् |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२३९
व्यास उवाच
अकस्माद्यदि वा कस्माद्वर्तते सात्त्विको गुणः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
अकस्मान्नो भय़ात्त्यक्ता न च त्राताभय़ैषिणः ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
अकाम इव तं राजा गणय़स्वेत्युवाच ह |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अकाम इव वीभत्सुरिदं वचनमव्रवीत् ||
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७२
व्रह्मो उवाच
अकामं तेन वस्तव्यं मुदितेन शतक्रतो |
४८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६६
वैशम्पाय़न उवाच
अकामं त्वा करिष्यामि व्रह्मवन्धो नराधम |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
अकामं भ्रातृभिः सार्धं राजभिः परिवारितम् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३४
भीष्म उवाच
अकामद्वेषसंय़ुक्तः स परत्र महीय़ते ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
अकामद्वेषसंय़ुक्तमनुरज्यन्ति मानवाः ||
१२ ख