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उद्योग पर्व
अध्याय ९८
कण्व उवाच
अरिपक्षेण सम्वन्धं रोचय़िष्याम्यहं कथम् ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
अरिप्रणुत्सुसिंहश्च कृतवेगः कृतिर्निमिः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५८
भीष्म उवाच
अरिमध्यस्थमित्राणां यथावच्चान्ववेक्षणम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
अरिमध्यस्थमित्राणां सम्यक्चोक्तं प्रपञ्चनम् |
५२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३३
धृतराष्ट्र उवाच
अरिमध्यस्थमित्रेषु वर्तसे चानुरूपतः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
अरिर्मित्रमुदासीन इत्येतेऽप्यनुवर्णिताः ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २१
सञ्जय़ उवाच
अरिवधकृतनिश्चय़ौ द्रुतं; तव वलमर्जुनकेशवौ सृतौ ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
अरिव्रतं नित्यमभूतिकामं; धिगस्तु तं पापमतिं मनुष्यम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
अरिश्च मित्रं भवति मित्रं चापि प्रदुष्यति ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
अरिष्ट एष ते भ्राता भीमो मुक्तो महाभुजः |
४४ क
वन पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
अरिष्टं क्षेममध्वानं वाय़ुना परिरक्षितः ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
कुन्त्यु उवाच
अरिष्टं गच्छ पन्थानं पुत्रान्मे परिपालय़ ||
२२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
अरिष्टं गच्छ पन्थानमप्रमत्तो भवानघ ||
२३ ग
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
अरिष्टं व्रज पन्थानं मदनुध्यानवृंहिता ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय २४
सूत उवाच
अरिष्टं व्रज पन्थानं वत्स कार्यार्थसिद्धय़े ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ६९
धृतराष्ट्र उवाच
अरिष्टनेमिं गरुडं सुपर्णं; पतिं प्रजानां भुवनस्य धाम ||
५ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
अरिष्टनेमिः प्रद्युम्नः पृथगश्वोऽजकस्तथा ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
अरिष्टनेमिना प्रोक्तं सगराय़ानुपृच्छते ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
अरिष्टनेमिरित्येकं कश्यपेत्यपरं विदुः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
अरिष्टाः स्युः सदा क्रुद्धात्पवनान्नात्र संशय़ः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २३६
वैशम्पाय़न उवाच
अरिष्टानक्षतांश्चापि सदारधनवाहनान् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०२
जनक उवाच
अरिष्टानि च तत्त्वेन वक्तुमर्हसि सत्तम |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
अरिष्टानि तु वक्ष्यामि विहितानि मनीषिभिः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
अरिष्टाय़ास्तु यः पुत्रो हंस इत्यभिविश्रुतः |
७७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
अरिष्टो धेनुकश्चैव चाणूरश्च महावलः |
४६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
अरीन्विशोकाभिनिरीक्ष्य सर्वतो; मनस्तु चिन्ता प्रदुनोति मे भृशम् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०८
युधिष्ठिर उवाच
अरीन्हि विजिगीषन्ते सुहृदः प्राप्नुवन्ति च ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय ९०
वैशम्पाय़न उवाच
अरुग्वान्खलु मागधीमुपय़ेमेऽमृतां नाम |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
अरुणं दर्शय़ामास ग्रसञ्ज्योतिःप्रभं प्रभुः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणश्चारुणिश्चैव वैनतेय़ा व्यवस्थिताः ||
६२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणस्ताम्रचूडं च प्रददौ चरणाय़ुधम् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
अरुणस्तय़ोस्तु विकल आदित्यस्य पुरःसरः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
अरुणस्य तु तस्यानु जातरूपसमप्रभम् |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणस्य भार्या श्येनी तु वीर्यवन्तौ महावलौ |
६७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अरुणस्याग्रतो यान्ति परिवार्य दिवाकरम् ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
अरुणा मृत्तिका चैव तथा चैव पिपीलकाः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणा रक्षिता चैव रम्भा तद्वन्मनोरमा ||
४८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
अरुणां सरस्वतीं प्राप्य पपुः सस्नुश्च तज्जलम् ||
४९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणाभा महाभागा दीर्घकेश्यः सिताम्वराः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
अरुणाभ्रावृताकारं तस्मिन्देशे वभौ विय़त् ||
७६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणामानय़ामास स्वां तनुं पुरुषर्षभ ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणाय़ां महाराज व्रह्महत्यापहा हि सा ||
२५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणो गरुडश्चैव वृक्षाश्चौषधिभिः सह ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय १४
सूत उवाच
अरुणो दृश्यते व्रह्मन्प्रभातसमय़े सदा ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अरुणोदय़ेषु दृश्यन्ते शतशः शलभव्रजाः ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
अरुणोऽभ्युदय़ां चक्रे ताम्रीकुर्वन्निवाम्वरम् ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३६
हंस उवाच
अरुन्तुदं परुषं रूक्षवाचं; वाक्कण्टकैर्वितुदन्तं मनुष्यान् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय ८२
यय़ातिरु उवाच
अरुन्तुदं पुरुषं रूक्षवाचं; वाक्कण्टकैर्वितुदन्तं मनुष्यान् |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
भीष्म उवाच
अरुन्धती तु तं दृष्ट्वा सर्वाङ्गोपचितं शुभा |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अरुन्धती तय़ाप्येष वसिष्ठः पृष्ठतः कृतः ||
३१ ख