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भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
स सञ्ज्ञामुपलभ्याथ भारद्वाजः प्रतापवान् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
स सत्कृतः प्रहृष्टात्मा प्रीतः प्रीतेन पार्थिवः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ७६
वृहदश्व उवाच
स सत्कृतो महीपालो नैषधं विस्मय़ान्वितः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
स सत्कृत्य यदुश्रेष्ठं मातुलं शौरिमात्मनः |
२२४ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
स सत्यकञ्चुकं नाम प्रविष्टेन ततोऽनृतम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
स सत्यजितमालक्ष्य तथोदीर्णं महाहवे |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ९७
वैशम्पाय़न उवाच
स सत्यवति सत्यं ते प्रतिजानाम्यहं पुनः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
स सत्यसङ्गरो भूत्वा ममेदमिति निश्चितम् |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
स सत्यसन्धः सतताप्रमत्तः; शास्त्रे स्थितो वन्धुजनस्य साधुः |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
स सत्यसन्धः सुकृती श्रीकामैर्निहतः कथम् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
स सत्यसन्धो वलवान्द्रोणः किमकरोद्युधि ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय १७२
गन्धर्व उवाच
स सत्रं मुञ्च भद्रं ते समाप्तमिदमस्तु ते ||
१४ ग
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
स सदस्यैः सहासीनः श्रावय़ामास भारतम् |
५८ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४५
सनत्सुजात उवाच
स सध्रीचीः स विषूचीर्वसाना; उभे विभर्ति पृथिवीं दिवं च |
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६५
भीष्म उवाच
स सन्तरति दुर्गाणि प्रेत्य चानन्त्यमश्नुते ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
स सन्धाय़ शरांस्तीक्ष्णान्कर्मारपरिमार्जितान् |
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
स सप्त त्वरय़ा युक्तः पुत्रांस्ते प्राप्य मारिष ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
स सप्तकृत्वश्च परैति लोका; न्संहारविक्षेपकृतप्रवासः ||
४९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
स सप्तभिः सप्त शरप्रवेका; न्संवार्य भूरिश्रवसा विसृष्टान् |
१०८ क
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
स सप्तविंशतिं कन्या दक्षः सोमाय़ वै ददौ ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
स सभाद्वारमागम्य विदुरस्मारमोहितः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
स समं धर्मकामार्थान्सिषेवे भरतर्षभः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
स समन्तात्परिवृतः पिता देवव्रतस्तव |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
स समन्तात्परिवृतो भारतो भरतर्षभ |
८८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
स समन्तात्परिवृतो रथौघैरपराजितः |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
स समर्थोऽपि मोक्षाय़ शिष्यान्सर्वानचोदय़त् |
७० क
आदि पर्व
अध्याय ९४
वैशम्पाय़न उवाच
स समाः षोडशाष्टौ च चतस्रोऽष्टौ तथापराः |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
स समाज्ञापय़ामास तिष्ठ त्वमिति नन्दिनम् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
स समानीय़ तान्सर्वान्भ्रातॄनित्यव्रवीद्वचः |
२ क
वन पर्व
अध्याय ९९
लोमश उवाच
स समाप्याय़ितः शक्रो विष्णुना दैवतैः सह |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
भीष्म उवाच
स समाभाष्य राजानमव्रवीद्द्विजसत्तमः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
स समालोक्य दूरान्मां स्मय़न्निव युधिष्ठिर |
१७ क
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
स समाविश्य तु नलं समीपं पुष्करस्य ह |
४ क
आदि पर्व
अध्याय ७२
वैशम्पाय़न उवाच
स समावृत्तविद्यो मां भक्तां भजितुमर्हसि |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
स समाश्वास्य पितरं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् |
१७ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
स समाश्वास्यमानोऽपि हेतुभिः शास्त्रनिश्चितैः |
६ क
वन पर्व
अध्याय २६८
मार्कण्डेय़ उवाच
स समासाद्य पौलस्त्यममात्यैरभिसंवृतम् |
९ क
आदि पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
स समासाद्य मां तत्र प्रिय़कारी प्रिय़ंवदः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
स समासाद्य राजानं क्षेमधूर्तिं महावलम् |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
स समासाद्य वार्ष्णेय़ं योगानामीश्वरं प्रभुम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
स समासाद्य सङ्ग्रामे भीमं भीमपराक्रमम् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५३
सञ्जय़ उवाच
स समास्थाय़ माय़ां तु ववर्ष रुधिरं वहु |
१६ क
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
स समीक्ष्य महीपालः स्वां सुतां प्राप्तय़ौवनाम् |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३३
मातो उवाच
स समीक्ष्यक्रमोपेतो मुख्यः कालोऽय़मागतः |
५ क
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
स समीपगतो भूत्वा धृतराष्ट्रं जनेश्वरम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
स समुद्रमभिप्रेत्य शोकाविष्टो महामुनिः |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
स समुद्रोर्मिवेगेन स्थले न्यस्तो महामुनिः |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
स समुद्वीक्ष्य राजानं कश्मलाभिहतौजसम् |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८९
युधिष्ठिर उवाच
स समेत्य कुरून्सर्वान्सर्वैस्तैरभिनन्दितः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
स समेत्य नमस्कृत्य देवराजं महामुनिः |
१० क