द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण चिच्छेद सज्यं सविशिखं तदा ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण तीक्ष्णेन धनुश्छित्त्वानदद्भृशम् ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण तीक्ष्णेन स छिन्नः प्रापतद्भुवि ||
६७ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
अर्धचन्द्रेण वाणेन किञ्चिदव्रुवतस्तदा ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय
२५५
वैशम्पाय़न उवाच
अर्धचन्द्रेण वाणेन विव्याधोरसि धर्मराट् ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण व्यूहेन प्रत्यव्यूहत तां चमूम् ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण व्यूहेन व्यूहं तमतिदारुणम् ||
१० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रेण समरे तं च विव्याध साय़कैः |
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
अर्धचन्द्रैश्च चन्द्रैश्च मत्स्यैः समृगपक्षिभिः |
१६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
अर्धचन्द्रैस्तथा भल्लैः क्षुरप्रैरसिपट्टिशैः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
अर्धप्रविष्टाः संरव्धा विलानीव महोरगाः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
वासुदेव उवाच
अर्धभोक्तास्मि भोगानां वाग्दुरुक्तानि च क्षमे ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अर्धमण्डलमावृत्य सूतपुत्रमय़ोधय़त् ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
अर्धमादाय़ सर्वेभ्यस्तेजसाभ्यधिकोऽभवत् ||
६२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
३
विदुर उवाच
अर्धमासगतो वापि मासमात्रगतोऽपि वा ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
अर्धमासाश्च मासाश्च ऋतवः षट्च भारत ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
अर्धमासाश्च मासाश्च नक्षत्राणि ग्रहास्तथा ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
च्यवन उवाच
अर्धराज्यं समग्रं वा नाहमर्हामि पार्थिव |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५१
नहुष उवाच
अर्धराज्यं समग्रं वा निषादेभ्यः प्रदीय़ताम् |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
अर्धराज्यस्य गोविन्द विदितं सर्वराजसु ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
अर्धरात्रे महाघोरमतृप्यंस्तत्र राक्षसाः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
अर्धरात्रेऽधिकवलैर्विमुक्ता रक्षसां वलैः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
अर्धसञ्जातसस्येव तोय़ं प्राप्य वसुन्धरा ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अर्धाद्धर्मश्च कामश्च स्वर्गश्चैव नराधिप |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
अर्धासिभिस्तथा खड्गैस्तोमरैः सपरश्वधैः |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय
४१
सूत उवाच
अर्धेन वापि निस्तर्तुमापदं व्रूत माचिरम् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
अर्धेनौघवती नाम त्वामर्धेनानुय़ास्यति |
८३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
अर्धोक्ताः कुरुपाञ्चालाः शाल्वाः कृत्स्नानुशासनाः |
७९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अर्धोन्नतशरीरस्य रूपमासीन्नृपस्य तत् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
अर्धय़ोजनविस्तारां पञ्चय़ोजनमाय़ताम् |
११५ क
विराट पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
अर्पय़ित्वा महात्मानं ननाद समरे कृपः ||
७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२०१
भीष्म उवाच
अर्यमा चैव भगवान्ये चान्ये तनय़ा विभो |
१० क
विराट पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
अर्वाक्कालस्य विज्ञाताः कृच्छ्ररूपधराः पुनः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४७
भीष्म उवाच
अर्वाक्च प्रतितिष्ठन्ति पुलिन्दशवरा इव |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
अर्वाक्स्थितस्तु यः स्थाय़ी कल्पान्ते परिवर्तते |
६२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३७
व्रह्मो उवाच
अर्वाक्स्रोतस इत्येते तैजसा रजसावृताः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
अर्वागेव हि ते सर्वे मरिष्यन्ति शरच्छतात् ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
अर्वावसुः सुमित्रश्च मैत्रेय़ः शुनको वलिः ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
१३९
लोमश उवाच
अर्वावसुस्तदा सत्रमाजगाम पुनर्मुनिः ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
अर्वुदः शक्रवापी च पन्नगौ शत्रुतापनौ |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
अर्वुदानि दशैकं च सराष्ट्रोऽभ्यपतद्दिवम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६५
विश्वामित्र उवाच
अर्वुदेन गवां यस्त्वं न ददासि ममेप्सिताम् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
गन्धर्व उवाच
अर्वुदेन गवां व्रह्मन्मम राज्येन वा पुनः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
८०
प्रकृतय़ ऊचुः
अर्हः पूरुरिदं राज्यं यः सुतः प्रिय़कृत्तव |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४१
भीष्म उवाच
अर्हः प्रष्टुं भवांश्चैव प्रश्नं भरतसत्तम ||
२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९४
वैशम्पाय़न उवाच
अर्हः सत्यवतीं वोढुं सर्वराजसु भारत ||
७२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
अर्हणं तत्कुमारीणामानृशंस्यतमं च तत् |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
३४
शिशुपाल उवाच
अर्हणामर्हति तथा यथा युष्माभिरर्चितः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
अर्हतामनुरूपाणां नादेय़ं ह्यस्ति किञ्चन |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
अर्हते देवमुख्याय़ प्राय़च्छदृषिसंस्तुतः ||
७३ ख