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द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
अलम्वलोऽपि विक्षिप्य समुत्क्षिप्य च राक्षसम् |
२३ क
स्त्री पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसं च राजानं जलसन्धं च पार्थिवम् ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं तथा युद्धे विचरन्तमभीतवत् |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं प्रत्युदिय़ाद्वलं शक्र इवाहवे ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं भीमरूपं विशीर्णमिव पर्वतम् |
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं राक्षसेन्द्रं कुन्तिभोजो महारथः |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं राक्षसेन्द्रं दृष्ट्वाक्रुध्यन्त पाण्डवाः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं विनिर्भिद्य प्राविशन्त धरातलम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं शरैर्घोरैरभ्याकिरत सर्वशः |
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं शरैर्घोरैर्विव्याध वलिनं वली ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसं शरैस्तीक्ष्णैरर्दय़ामास सर्वतः ||
१९ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
धृतराष्ट्र उवाच
अलम्वुसः कथं युद्धे प्रत्ययुध्यत सञ्जय़ ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अलम्वुसः श्रुताय़ुश्च जलसन्धश्च वीर्यवान् |
१६४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसः सात्यकिं माधवाग्र्य; मवारय़द्राजवरोऽभिपत्य ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसमथो विद्ध्वा सिंहवद्व्यनदन्मुहुः ||
३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्ततो राजन्सात्यकिं युद्धदुर्मदम् |
२९ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसस्तथा राजन्राक्षसश्चाप्यलाय़ुधः |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्तु सङ्क्रुद्धः कुन्तिभोजशरार्दितः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्तु समरे अभिमन्युं महारथम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्तु समरे भीमसेनं महावलम् |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्तु समरे भैमसेनिं महावलम् |
४१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसस्योत्तमवेगवद्भि; र्हय़ांश्चतुर्भिर्निजघान वाणैः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
अलम्वुसा घृताची च चित्रा चित्राङ्गदा रुचिः ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय ८
सुदेष्णो उवाच
अलम्वुसा मिश्रकेशी पुण्डरीकाथ मालिनी |
१४ क
आदि पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसा मिश्रकेषी विद्युत्पर्णा तुलानघा |
४८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसो भृशं क्रुद्धो घटोत्कचमताडय़त् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसो भृशं राजन्नागेन्द्र इव चुक्रुधे ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसो महाराज राक्षसेन्द्रो न्यवारय़त् ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसो महावाहुः सुवाहुश्च महारथः ||
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसो रथश्रेष्ठः श्रुताय़ुश्च महारथः |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसो रथोपस्थे नृत्यन्निव महारथः ||
४४ ख
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
अलम्वुसोग्रसेनस्य गन्धर्वस्य च तुम्वुरोः |
१२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
अलम्वुसोऽपि सङ्क्रुद्धः कार्ष्णिं नवभिराशुगैः |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
अलर्कः कक्षसेनश्च गय़ो गौराश्व एव च |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २६
मार्कण्डेय़ उवाच
अलर्कमाहुर्नरवर्य सन्तं; सत्यव्रतं काशिकरूषराजम् |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३०
पितर ऊचुः
अलर्को नाम राजर्षिरभवत्सुमहातपाः |
२ क
वन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
अलव्धलाभाय़ च लव्धवृद्धय़े; यथार्हतीर्थप्रतिपादनाय़ |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
अलव्धलिप्सा लव्धस्य तथैव च विवर्धनम् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३८
भीष्म उवाच
अलव्धस्य कथं लिप्सा लव्धं केन विवर्धते |
५ क
वन पर्व
अध्याय २७
वैशम्पाय़न उवाच
अलव्धस्य च लाभाय़ लव्धस्य च विवृद्धय़े ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
अलव्ध्वा निपुणं धर्मं पापः पापे प्रसज्जति |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
अलव्ध्वा मद्विधो राज्यं व्रह्मन्किं कर्तुमर्हति ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
कुन्त्यु उवाच
अलव्ध्वा यदि वा लव्ध्वा नानुशोचन्ति पण्डिताः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
विश्वामित्र उवाच
अलसः क्षुत्परो मूर्खस्तेन पीवाञ्शुनःसखः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५८
भीष्म उवाच
अलसग्रहणं प्राप्तो दुर्मेधावी तथोच्यते |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३१
कुन्त्यु उवाच
अलातं तिन्दुकस्येव मुहूर्तमपि विज्वल |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९५
सात्यकिरु उवाच
अलातचक्रप्रतिमं धनुर्द्रक्ष्यन्ति कौरवाः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
अलातचक्रवच्चैव व्यरोचत महीं गतः ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
अलातचक्रवत्सङ्ख्ये क्षिप्रमस्त्राणि दर्शय़न् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
अलातचक्रवत्सर्वांश्चरन्वाणैः समभ्ययात् ||
६ ख