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आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अहत्वा सर्वपाञ्चालान्धृष्टद्युम्नपुरोगमान् |
१८० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
अहत्वा सिन्धुराजं हि धूमकेतुं प्रवेक्ष्यति |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
कृप उवाच
अहनच्छात्रवान्भल्लैः शतशोऽथ सहस्रशः ||
१०० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
अहनत्तु पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं रणे |
४५ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
अहनत्सर्वतो वीरं नानाप्रहरणैर्वली |
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अहनी युय़ुधे द्वे तु कर्णः परवलार्दनः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
अहन्यनुचरेदेवमेष शास्त्रकृतो विधिः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
सञ्जय़ उवाच
अहन्यन्त महाराज धावमानाश्च संय़ुगे ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
द्युमत्सेन उवाच
अहन्यमानेषु पुनः सर्वमेव पराभवेत् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५३
भीष्म उवाच
अहन्यहनि चागम्य ततस्तौ तस्य मूर्धनि |
२६ क
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
अहन्यहनि चाप्येतद्याचतां सम्प्रदीय़ते |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अहन्यहनि तेजस्वी निजघ्ने वसुसम्भवः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अहन्यहनि धर्मस्य योनिः साधुसमागमः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि पार्थानां वृद्धः कुरुपितामहः |
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि पार्थानां वृद्धः कुरुपितामहः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
अहन्यहनि भूतात्मा ततः क्षर इति स्मृतः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
भीष्म उवाच
अहन्यहनि मज्जन्ति यत्र भूतानि भारत ||
४९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि मद्रेश द्रावय़न्दृश्यते युधि ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११५
धृतराष्ट्र उवाच
अहन्यहनि मे दीप्तं यशः पतति सञ्जय़ |
१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
धृतराष्ट्र उवाच
अहन्यहनि मे पुत्राः क्षय़ं गच्छन्ति सञ्जय़ |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि युध्यन्तं क्षोभय़न्तं वलं तव ||
३१ ग
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि शूराणां कुर्वाणः कदनं महत् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
धृतराष्ट्र उवाच
अहन्यहनि सङ्क्रुद्धो नय़ते यमसादनम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
अहन्यहनि सन्दुह्यान्महीं गामिव वुद्धिमान् ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
अहन्यहनि सम्प्राप्तास्तावकानां रथव्रजाः ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १९०
वैशम्पाय़न उवाच
अहन्यहन्युत्तमरूपधारिणो; महारथाः कौरववंशवर्धनाः ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय ४५
शकुनिरु उवाच
अहमक्षेष्वभिज्ञातः पृथिव्यामपि भारत |
३७ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
अहमग्निः कुरुश्रेष्ठा मय़ा दग्धं च खाण्डवम् |
३६ क
वन पर्व
अध्याय २१४
मार्कण्डेय़ उवाच
अहमङ्गिरसो भार्या शिवा नाम हुताशन |
३ क
वन पर्व
अध्याय १२८
लोमश उवाच
अहमत्र प्रवेक्ष्यामि मुच्यतां मम याजकः |
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
अहमद्य गमिष्यामि वैरस्यान्तं सुदुर्गमम् |
५९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
अहमद्य गमिष्यामि सैन्धवस्य वधाय़ हि ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
अहमद्य रणे यत्तो योधय़िष्यामि फल्गुनम् |
१०६ क
सभा पर्व
अध्याय २०
जरासन्ध उवाच
अहमद्य विमुञ्चेय़ं क्षात्रं व्रतमनुस्मरन् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
अहमद्योपय़ोक्ष्यामि विधानं पश्य यादृशम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
अग्निरु उवाच
अहमन्तःशरीरस्थो भूतानां रघुनन्दन |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
अहमन्नं प्रदास्यामि सप्त पञ्च च ते समाः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
अहमन्नं भवान्भोक्ता दुर्वलोऽहं भवान्वली |
१६० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
अर्जुन उवाच
अहमन्यान्महेष्वासान्वारय़िष्यामि साय़कैः |
९९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४२
भीष्म उवाच
अहमप्यत्र मुह्यामि ममाप्येष मनोरथः |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४५
व्राह्मण उवाच
अहमप्यत्र वत्स्यामि गोमत्याः पुलिने शुभे |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय ३६
अर्जुन उवाच
अहमप्यत्र सैरन्ध्र्या स्तुतः सारथ्यकर्मणि |
२२ क
वन पर्व
अध्याय २२७
वैशम्पाय़न उवाच
अहमप्यद्य निश्चित्य गमनाय़ेतराय़ वा |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ७२
वाहुक उवाच
अहमप्यश्वकुशलः सूदत्वे च सुनिष्ठितः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६९
सञ्जय़ उवाच
अहमप्यस्य मूर्धानं पातय़िष्यामि साय़कैः ||
५८ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
अर्जुन उवाच
अहमप्युत्सहे लोकान्विजेतुं युधि पावक ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
गरुड उवाच
अहमप्युत्सहे लोकान्समस्तान्वोढुमञ्जसा ||
१० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ६
युधिष्ठिर उवाच
अहमप्युपवत्स्यामि यथैवाय़ं गुरुर्मम |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११६
नारद उवाच
अहमप्येकमेवास्यां जनय़िष्यामि गालव |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११५
दिवोदास उवाच
अहमप्येकमेवास्यां जनय़िष्यामि पार्थिवम् ||
६ ख