शान्ति पर्व
अध्याय
१९८
मनुरु उवाच
अवताराभिनिःस्रोतं गिरेः शृङ्गादिवोदकम् ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०१
वैशम्पाय़न उवाच
अवतार्य च शूलाग्रात्तच्छूलं निश्चकर्ष ह |
२० क
स्त्री पर्व
अध्याय
३
विदुर उवाच
अवतार्यमाणमापाकादुद्धृतं वापि भारत |
११ क
वन पर्व
अध्याय
८१
पुलस्त्य उवाच
अवतीर्णं च तत्रैव तीर्थं कुरुकुलोद्वह |
१३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२५
विदुर उवाच
अवतीर्णः सकवचस्तत्रैष सुमहास्वनः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्णा ततो रङ्गं द्रौपदी भरतर्षभ ||
३० ख
आदि पर्व
अध्याय
२०८
नार्यु उवाच
अवतीर्णाः स्म तं देशं तपोविघ्नचिकीर्षय़ा ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
अवतीर्णेषु शिष्येषु व्यासः पुत्रसहाय़वान् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्णौ गदाहस्तावेकशृङ्गाविवाचलौ ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य कुरुक्षेत्रं पाण्डवाः सहसोमकाः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
१४०
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य द्रुमात्तस्मादाजगामाथ पाण्डवान् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८०
भीष्म उवाच
अवतीर्य धनुर्न्यस्य पदातिरृषिसत्तमम् ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०७
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य नरश्रेष्ठो व्राह्मणैः सह भारत |
५ क
वन पर्व
अध्याय
११४
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य महाभागा तर्पय़ां चक्रिरे पितॄन् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
अवतीर्य महीं तेऽथ चातुर्होत्रमकल्पय़न् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५
भीष्म उवाच
अवतीर्य महीं शक्रस्तं पक्षिणमुवाच ह ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
अवतीर्य रथश्रेष्ठाद्दम्पती तौ मुमोच ह |
५० क
उद्योग पर्व
अध्याय
९२
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य रथाच्छौरिः कैलासशिखरोपमात् ||
३० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११८
नारद उवाच
अवतीर्य रथात्कन्या नमस्कृत्वा च वन्धुषु |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य रथात्कृष्णो धर्मराजं यथाविधि |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य रथात्तूर्णं कृत्वा शौचं यथाविधि |
२१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य रथात्तूर्णं परिघं गृह्य विष्ठितः ||
८७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य रथात्तूर्णं भ्रातृभिः सहितोऽन्वय़ात् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२८
भीष्म उवाच
अवतीर्य रथात्तूर्णं रासभीं प्रत्यभाषत ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय
३३
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य रथात्तूर्णमाख्यातुं प्रविवेश ह ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य रथादार्तो वाष्पव्याकुलिताक्षरम् |
८ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
अवतीर्य रथाभ्यां तु त्वरमाणा महारथाः |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य रथेभ्यस्तु प्राद्रवन्राजसंनिधौ |
१० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य रथोपस्थाद्दध्यौ सम्प्रय़तः स्थितः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९३
सञ्जय़ उवाच
अवतीर्य हय़ाच्चापि भीष्मं प्राप्य जनेश्वरः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
अवतेरुः क्रमेणेमां महीं स्वर्गाद्दिवौकसः ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६१
सञ्जय़ उवाच
अवतेरुर्महाराज रथेभ्यो रथसत्तमाः ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३९
व्यास उवाच
अवतेरुस्ततः सर्वे देवभागैर्महीतलम् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
अवतेरुस्ततः सर्वे राक्षसस्कन्धतः शनैः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५७
भीष्म उवाच
अवद्यदर्शनाद्व्येति तत्त्वज्ञानाच्च धीमताम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६८
सञ्जय़ उवाच
अवधश्चापि शत्रूणामधर्मः शिष्यतेऽर्जुन |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
८४
वैशम्पाय़न उवाच
अवधानं न गच्छामः काम्यके सह कृष्णय़ा ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
२८९
वैशम्पाय़न उवाच
अवधानेन भूय़ोऽस्य परं यत्नमथाकरोत् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
अवधानेन मौनेन काषाय़ेण जटाजिनैः |
४६ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
अवधानेन सुभगे नित्योत्थानतय़ैव च |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अवधीच्च रथानीकं द्विरदानां च तद्वलम् |
२० क
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्तावकान्योधान्दण्डपाणिरिवान्तकः ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्तावकान्योधान्दण्डपाणिरिवान्तकः |
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्तावकान्योधान्वज्रपाणिरिवासुरान् ||
३० ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्पञ्चविंशत्या पाञ्चालान्पञ्चविंशतिम् ||
३३ ख
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
अवधीत्पितरं पुत्रः पिता पुत्रं च भारत |
४० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४४
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्समरे पुत्रं पिता भरतसत्तम ||
४० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२५
सञ्जय़ उवाच
अवधीत्सैन्धवं सङ्ख्ये नैनं कश्चिदवारय़त् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
दुर्योधन उवाच
अवधीद्देवशत्रूंस्तान्मददर्पवलान्वितान् |
१५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अवधीद्वहुसाहस्रांस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
३८ ख