द्रोण पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
ते भीमवाणैः शतशः संस्यूता विवभुर्गजाः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३०
सञ्जय़ उवाच
ते भीमसेनं नाराचैर्जघ्नुराशीविषोपमैः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
ते भीमसेनस्य भुजं सव्यं निर्भिद्य पत्रिणः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
ते भीष्मं विविशुस्तूर्णं स्वर्णपुङ्खाः शिलाशिताः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
ते भुजा भोगिभोगाभाश्चन्दनाक्ता विशां पते |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
ते भुजैर्भोगिभोगाभैर्धनूंष्याय़म्य साय़कान् |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६९
वसिष्ठ उवाच
ते भृगूणां धनं ज्ञात्वा राजानः सर्व एव ह |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ते भय़ं सुमहत्त्वक्त्वा पाण्डवान्प्रतिय़ुध्यत ||
१०३ ख
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
ते भय़ार्ता दिशः सर्वाः सहसा विप्रदुद्रुवुः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
ते मनः क्रूरमाधाय़ समभित्यक्तजीविताः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ते मनः क्रूरमास्थाय़ समभित्यक्तजीविताः |
४ क
आदि पर्व
अध्याय
१५
सूत उवाच
ते मन्त्रय़ितुमारव्धास्तत्रासीना दिवौकसः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८३
वसिष्ठ उवाच
ते महादेवमासीनं देवीं च वरदामुमाम् |
४२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२०
सञ्जय़ उवाच
ते महास्त्राणि दिव्यानि तत्र राजन्व्यदर्शय़न् |
५६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ते महास्त्राणि दिव्यानि तत्र वीरा अदर्शय़न् |
७३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४६
सञ्जय़ उवाच
ते महास्त्राणि दिव्यानि विकिरन्तोऽर्जुनं प्रति |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
प्रह्राद उवाच
ते मा कव्यपदे सक्तं शुश्रूषुमनसूय़कम् ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
शम्वर उवाच
ते मा शास्त्रपथे युक्तं व्रह्मण्यमनसूय़कम् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
ते मां गाय़न्ति प्राग्वंशे अधोक्षज इति स्थितिः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
२५०
वैशम्पाय़न उवाच
ते मां निवेश्येह दिशश्चतस्रो; विभज्य पार्था मृगय़ां प्रय़ाताः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
ते मां रक्षत सङ्ग्रामे मा वो मूर्ध्नि धनञ्जय़ः |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
ते मां वीर्येण यशसा तेजसा च वलेन च |
५० क
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
ते मां शरणमापन्नां नान्वपद्यन्त पाण्डवाः ||
६३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ते मां सप्रणय़ं वाक्यमव्रुवन्समरे स्थितम् |
३२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ते मां समन्तात्परिवार्य तस्थुः; स्ववाहुभिः परिगृह्याजिमध्ये ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८६
भीष्म उवाच
ते मां स्मय़न्तो राजेन्द्र शनकैरिदमव्रुवन् ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
ते मातलेश्चक्रुरतीव हृष्टाः; सत्कारमग्र्यं सुरराजतुल्यम् |
२४ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४४
वैशम्पाय़न उवाच
ते मात्रा समनुज्ञाता राज्ञा च कुरुपुङ्गवाः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
ते मामालक्ष्य दैतेय़ा विचित्राभरणाम्वराः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१६४
अर्जुन उवाच
ते मामूचुर्महाराज सान्त्वय़ित्वा सुरर्षभाः |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
ते मिश्रा वह्वशोभन्त जवना वातरंहसः |
१३० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
ते मुहूर्तं ततो गत्वा श्रान्तवाहाः पिपासिताः ||
५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
ते मुहूर्तं तु विश्रम्य लव्धतोय़ैर्हय़ोत्तमैः |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ते मुहूर्ताद्रणे वीरा हस्ताहस्तं विशां पते |
२८ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ते मूर्ध्नि समुपाघ्राताः सर्वकार्याणि चक्रिरे ||
७ ग
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
ते मृगद्विजसङ्घुष्टं नानाद्विजसमाकुलम् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
४२
सूत उवाच
ते मे कन्यां प्रय़च्छन्तु चरतः सर्वतोदिशम् ||
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
द्रौपद्यु उवाच
ते मे वाचं विजानन्तु सूतपुत्रा नय़न्ति माम् ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
द्रौपद्यु उवाच
ते मे वाचं विजानन्तु सूतपुत्रा नय़न्ति माम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
ते मे वेदा हृताश्चक्षुरन्धो जातोऽस्मि जागृहि |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
२२
सूत उवाच
ते मेघा मुमुचुस्तोय़ं प्रभूतं विद्युदुज्ज्वलाः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
ते मोहवशमापन्ना मानवा मनुजर्षभ |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४२
सनत्सुजात उवाच
ते मोहितास्तद्वशे वर्तमाना; इतः प्रेतास्तत्र पुनः पतन्ति ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ते म्लेच्छैः प्रेषिता नागा नरानश्वान्रथानपि |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२१
वासुदेव उवाच
ते मय़ाश्वासिता वीरा यथावद्भरतर्षभ |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
जनमेजय़ उवाच
ते यजन्तो महाय़ज्ञैः कस्य भागं ददन्ति वै ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
ते यज्ञसेनं द्रुपदं गृहीत्वा रणमूर्धनि |
५ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
ते यतध्वं परं शक्त्या विजय़ाय़ेतराय़ वा |
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७०
भीष्म उवाच
ते यतध्वं परं शक्त्या सर्वे मोक्षाय़ पार्थिवाः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ते यतध्वं महेष्वासाः सूतपुत्रस्य रक्षणे ||
१९ ख