वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
गभस्तिमानजः कालो मृत्युर्धाता प्रभाकरः ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
गभस्तिर्व्रह्मकृद्व्रह्मा व्रह्मविद्व्राह्मणो गतिः ||
१३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९९
द्रुपद उवाच
गमनं चापि युक्तं स्याद्गृहमेषां महात्मनाम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९३
यक्ष उवाच
गमनं तव चेतो हि पौलस्त्यस्य च दर्शनम् ||
५२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
गमनं प्रति राजेन्द्र तदिदं समुपस्थितम् ||
१० ख
मौसल पर्व
अध्याय
९
व्यास उवाच
गमनं प्राप्तकालं च तद्धि श्रेय़ो मतं मम ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
गमनं मे न रुचितं तव तन्न कृतं च ते ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
गमनं रोचते मह्यं यत्र यातौ महारथौ ||
१८ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
गमनं विधिना येन धर्मस्य सुमहात्मनः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९८
वैशम्पाय़न उवाच
गमनं सहदाराणामेतदागमनं मम ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गमनादेव तस्यां हि हय़मेधमवाप्नुय़ात् ||
९२ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
गमनादेव राजेन्द्र दीर्घसत्रमरिन्दम |
११७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७६
अर्जुन उवाच
गमनादेवमेव त्वं करिष्यसि न संशय़ः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५०
वैशम्पाय़न उवाच
गमनाय़ मतिं चक्रे तं प्रोवाच सरस्वती ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
गमनाय़ मतिं चक्रे पितुर्दर्शनलालसः |
२ क
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
गमनाय़ मतिं चक्रे भ्रातरश्चास्य ते तदा ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
गमनाय़ मनश्चक्रे वासुदेवरथं प्रति ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
गमनाय़ समागम्य वुद्धिमापेदिरे तदा ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२९४
वैशम्पाय़न उवाच
गमनीय़ो भविष्यामि शत्रूणां द्विजसत्तम ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
गमने कृतवुद्धिं तं पाण्डवं लोमशोऽव्रवीत् |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२८०
सावित्र्यु उवाच
गमने च कृतोत्साहां प्रतिषेद्धुं न मार्हसि ||
२१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
गमने चाभवद्वुद्धिर्धृतराष्ट्रदिदृक्षय़ा ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९
युधिष्ठिर उवाच
गमने निरपेक्षश्च पश्चादनवलोकय़न् |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय
१३१
वैशम्पाय़न उवाच
गमने पाण्डुपुत्राणां जज्ञे तत्र मतिर्नृप ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६७
असित उवाच
गमनेन्द्रिय़ं तथा पादौ कर्मणः करणे करौ ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
गमिष्यतः प्रेतलोकं जीवलोकान्न संशय़ः ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
गमिष्यति क्षय़ान्ते च पुनर्नाराय़णं नृप ||
४८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
गमिष्यति वनं राजन्कार्त्तिकीमागतामिमाम् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
गमिष्यत्यद्य पदवीं भारद्वाजस्य संय़ुगे ||
४७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
गमिष्यथ हताः सद्यः सपाञ्चाला यमक्षय़म् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३
सात्यकिरु उवाच
गमिष्यन्ति सहामात्या यमस्य सदनं प्रति ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
गमिष्यामि तु तत्राहं यत्र भीष्मं तपोधन |
९ क
वन पर्व
अध्याय
१४१
वैशम्पाय़न उवाच
गमिष्यामि न सन्तापः कार्यो मां प्रति भारत ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२७५
राम उवाच
गमिष्यामि पुरीं रम्यामय़ोध्यां शासनात्तव ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
अत्रिरु उवाच
गमिष्यामि महाप्राज्ञे रोचते मे वचस्तव |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
गमिष्यामि विनिर्मुक्तो विशोको विज्वरस्तथा ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
गमिष्यामि स्वकं स्थानमासीद्यन्मे पुरातनम् |
९७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१७७
राम उवाच
गमिष्यामि स्वय़ं तत्र कन्यामादाय़ यत्र सः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८९
पूर्वेन्द्रा ऊचुः
गमिष्यामो मानुषं देवलोका; द्दुराधरो विहितो यत्र मोक्षः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय
२९०
सूर्य उवाच
गमिष्याम्यनवद्याङ्गि लोके समवहास्यताम् |
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
२९०
सूर्य उवाच
गमिष्येऽहं यथा मां त्वं व्रवीषि तनुमध्यमे |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
गम्भीरं तिमिमकरोग्रसङ्कुलं तं; गर्जन्तं जलचररावरौद्रनादैः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
गम्भीरं भीमवेगं च स्थलाज्जलमपातय़त् ||
३४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
गम्भीरघोषाश्च महास्वनाश्च; शङ्खा मृदङ्गाश्च नदन्ति यत्र |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
गम्भीरघोषो गम्भीरो गम्भीरवलवाहनः ||
५२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०३
भीष्म उवाच
गम्भीरशव्दाश्च महास्वनाश्च; शङ्खाश्च भेर्यश्च नदन्ति यत्र |
९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
गम्भीरा त्रिषु गम्भीरेष्विय़ं रक्ता च पञ्चसु ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०२
भीष्म उवाच
गम्भीराक्षा निःसृताक्षाः पिङ्गला भ्रुकुटीमुखाः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
गम्भीरावर्तकलिलं सर्वभूतभय़ङ्करम् ||
८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
गम्यतां द्वारकां चेति सोऽन्वशादनुय़ाय़िनः ||
३२ ग