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शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
सर्वे वर्णा धर्मकार्याणि सम्य; क्कृत्वा राजन्सत्यवाक्यानि चोक्त्वा |
३९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
सर्वे वर्णा न दुष्येय़ुः शस्त्रवन्तो युधिष्ठिर ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
सर्वे वर्णा व्राह्मणा व्रह्मजाश्च; सर्वे नित्यं व्याहरन्ते च व्रह्म |
८६ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
इन्द्र उवाच
सर्वे वर्णाः स्वधर्मस्थाः सदा चेदिषु मानद |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे ववृधुरल्पेन कालेनाप्स्विव नीरजाः ||
२८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
सर्वे वा पुनरुत्सृष्टाः संसृष्टं ह्यत्र कारणम् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २५
सञ्जय़ उवाच
सर्वे वाचं शृणुतेमां मदीय़ां; वक्ष्यामि यां भूतिमिच्छन्कुरूणाम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
सर्वे विक्रान्तवीर्याश्च अस्मिन्देशे सुदारुणाः |
९६ क
सभा पर्व
अध्याय ९
नारद उवाच
सर्वे विग्रहवन्तस्ते तमीश्वरमुपासते ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
सर्वे विचुक्रुशुः श्रुत्वा पुत्राणां तव सङ्क्षय़म् ||
६२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वित्रस्तमनसस्तस्य शान्तिपराभवन् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय १९३
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वे विद्यासु निष्णाता वलवन्तो दुरासदाः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
सर्वे विध्वस्तकवचास्तावका युधि निर्जिताः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८१
सञ्जय़ उवाच
सर्वे विनेदुः सहिताः समन्ता; त्पुपूजिरे तव पुत्रं ससैन्याः ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
सर्वे विप्राश्च देवाश्च तथागमविदो जनाः |
९९ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
सर्वे विमनसो भूत्वा नेदमस्तीत्यचिन्तय़न् ||
५३ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे विरजसः पुण्याः पुण्यवाग्वुद्धिकर्मिणः ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
सर्वे विवृततूणीराः प्रगृहीतशरासनाः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५०
भीष्म उवाच
सर्वे विषण्णवदना नहुषाय़ न्यवेदय़न् ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्रह्मो उवाच
सर्वे वेदविदः प्राज्ञाः सर्वे च क्रतुय़ाजिनः |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे भास्वरमूर्तय़ः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे सुचरितव्रताः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे सुचरितव्रताः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९६
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे सुचरितव्रताः |
३ क
वन पर्व
अध्याय ८४
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदः शूराः सर्वेऽस्त्रकुशलास्तथा ||
७ ग
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदः सिद्धाः शान्तात्मानो महर्षय़ः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १०८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदश्चैव राजशास्त्रेषु कोविदाः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय २९९
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे वेदविदो मुख्या यतय़ो मुनय़स्तथा |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सर्वे वेदव्रतपराः सर्वे चासन्वहुश्रुताः ||
५९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
सर्वे वेदा न तत्कुर्युः सर्वय़ज्ञाश्च भारत |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
सर्वे व्राह्मणमाविश्य सदान्नमुपभुञ्जते ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६७
अर्जुन उवाच
सर्वे वय़ं परित्रातुं न शक्ष्यामोऽद्य पार्षतम् ||
३९ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
व्राह्मणा ऊचुः
सर्वे वय़ं वै पृच्छामो वृद्धिं ते पृथिवीपते ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
सर्वे शस्त्रजिताँल्लोकान्गतास्तेऽभिमुखं हताः ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे शस्त्रास्त्रसम्पन्नाः सर्वे शूरास्तनुत्यजः ||
१८ ग
विराट पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे शान्तिपरा भूत्वा स्वचित्तानि न लेभिरे |
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे शान्तिपरा योधा धार्तराष्ट्रस्य पश्यतः ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५
इन्द्राण्यु उवाच
सर्वे शिविकय़ा राजन्नेतद्धि मम रोचते ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे शिष्याः सुतश्चास्य शुकः परमधर्मवित् ||
९९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९९
नारद उवाच
सर्वे श्रिय़मभीप्सन्तो धारय़न्ति वलान्युत ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २३
व्राह्मण उवाच
सर्वे श्रेष्ठा न वा श्रेष्ठाः सर्वे चान्योन्यधर्मिणः |
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १०८
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे संसर्गविद्यासु विद्याभिजनशोभिनः ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सर्वे संहतमैश्वर्यमीश्वराः प्रतिपेदिरे |
६० क
विराट पर्व
अध्याय ४६
भीष्म उवाच
सर्वे संहत्य युध्यामः पाकशासनिमागतम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सर्वे संहननोपेताः सर्वे परिघवाहवः ||
५७ ख
विराट पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
सर्वे संहृष्टरोमाणः सन्त्रस्ताः प्रेक्ष्य कीचकम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५४
भीम उवाच
सर्वे सङ्ख्ये कुरवो निष्पतन्तु; मां वा लोकाः कीर्तय़न्त्वाकुमारम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
सर्वे सत्यव्रतपराः सर्वे कामविहारिणः |
५९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्रह्मो उवाच
सर्वे सत्यव्रताश्चैव सर्वे तुल्या महर्षिभिः ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
सर्वे समधिरूढाः स्म सङ्ग्रामान्नः समुद्धर ||
५१ ग