उद्योग पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
अथोक्तवाक्ये नृपतौ तु भीष्मे; निक्षिप्य शस्त्राणि गते च कर्णे |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अथोक्तश्च मय़ा राजन्राजा गन्धर्वसत्तमः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अथोक्तस्तु मय़ा राजन्राजा विश्वावसुस्तदा |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१४
भीष्म उवाच
अथोचुस्ते तदा व्यासं शिष्याः प्राञ्जलय़ो गुरुम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
अथोतथ्य इति ख्यात आसीद्धीमानृषिः पुरा |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१३१
लोमश उवाच
अथोत्कृत्य स्वमांसं तु राजा परमधर्मवित् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं तदा हृष्टैः सर्वैर्देवैरुदाय़ुधैः |
४८ क
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महद्ध्यासीत्पाण्डवैर्जितकाशिभिः |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महाराज धार्तराष्ट्रैः समन्ततः |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महाराज पाञ्चालैर्जितकाशिभिः |
५४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महाराज पाण्डवैर्जितकाशिभिः |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महेष्वासैः पाण्डवैर्युद्धदुर्मदैः |
३८ क
वन पर्व
अध्याय
२४३
वैशम्पाय़न उवाच
अथोत्क्रुष्टं महेष्वासैर्धार्तराष्ट्रैर्महारथैः |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्क उपाध्याय़मभ्यवादय़त् |
१६५ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्कः प्रविश्य उपाध्याय़िनीमभ्यवादय़त् |
१६३ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्कः शीतमन्नं सकेशं दृष्ट्वा अशुच्येतदिति मत्वा पौष्यमुवाच |
१२६ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्कस्तथेत्युक्त्वा प्राङ्मुख उपविश्य सुप्रक्षालितपाणिपादवदनोऽशव्दाभिर् हृदय़ङ्गमाभिरद्भिरुपस्पृश्य त्रिः पीत्वा द्विः परिमृज्य खान्यद्भिरुपस्पृश्यान्तःपुरं प्रविश्य तां क्षत्रिय़ामपश्यत् ||
११५ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्कस्ते कुण्डले भूमौ निक्षिप्योदकार्थं प्रचक्रमे ||
१३६ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
अथोत्तङ्को गुरुशुश्रूषुर्गुरुनिय़ोगमनुतिष्ठमानस्तत्र गुरुकुले वसति स्म ||
८८ क
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
अथोत्तरः शुभैर्गन्धैर्माल्यैश्च विविधैस्तथा |
४८ क
विराट पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
अथोत्तरा च कन्याश्च सख्यस्तामव्रुवंस्तदा |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अथोत्तरेण पाण्डूनां सेनाय़ां ध्वनिरुत्थितः |
१ क
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
अथोत्तरेण प्रहिता दूतास्ते शीघ्रगामिनः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
अथोत्थाय़ जलात्तस्मात्सर्वे ते वै समागमन् |
५२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
अथोत्थाय़ सहामात्यैर्दीनः शिविरमात्मनः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अथोत्थितानि रुण्डानि समदृश्यन्त सर्वशः |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अथोत्थितेषु वहुषु कवन्धेषु जनाधिप |
८० क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अथोत्स्मय़न्हृषीकेशः स्त्रीमध्य इव भारत |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
अथोदतिष्ठद्विप्राणां मध्याज्जिष्णुरुदारधीः ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
अथोद्भ्राम्य गदां भीमः कालदण्डमिवान्तकः |
८७ क
वन पर्व
अध्याय
२९०
वैशम्पाय़न उवाच
अथोद्यन्तं सहस्रांशुं पृथा दीप्तं ददर्श ह |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
अथोद्यम्य गदे घोरे सशृङ्गाविव पर्वतौ |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
अथोपगच्छच्छरविक्षताङ्गं; पदातिनं क्रोधविषं वमन्तम् |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१
भीष्म उवाच
अथोपगम्य कालस्तु तस्मिन्धर्मार्थसंशय़े |
६२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
अथोपगम्य विदुरमपराह्णे जनार्दनः |
१ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
अथोपपत्त्या शकटं पद्मं वज्रं च भारत |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
अथोपविविशुः सर्वे त्रय़स्ते पुरुषर्षभाः |
३६ क
वन पर्व
अध्याय
२३६
वैशम्पाय़न उवाच
अथोपविष्टं राजानं पर्यङ्के ज्वलनप्रभे |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
अथोपविष्टं शय़ने गौतमं वकराट्तदा |
९ क
वन पर्व
अध्याय
२२५
वैशम्पाय़न उवाच
अथोपविष्टः प्रतिसत्कृतश्च; वृद्धेन राज्ञा कुरुसत्तमेन |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
भीष्म उवाच
अथोपविष्टश्च यदा तस्मिन्भद्रासने तदा |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथोपविष्टय़ोस्तत्र मणिभद्रपुरोगमाः |
१६ क
वन पर्व
अध्याय
१४६
वैशम्पाय़न उवाच
अथोपसृत्य तरसा भीमो भीमपराक्रमः |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२१
भीष्म उवाच
अथोपास्य सहस्रांशुं किं करोमीत्युवाच ताम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
अथोपाय़ात्तूर्णममित्रकर्शनो; धनुर्धराणां प्रवरस्तदा वृषः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
११३
लोमश उवाच
अथोपाय़ात्स मुनिश्चण्डकोपः; स्वमाश्रमं मूलफलानि गृह्य |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
अथोपाय़ान्महाराज सव्यसाची परन्तपः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
अथोपेत्य महावाहुरभिवाद्य पितामहम् |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
अथोपोष्य शिरःस्नाता दैवतान्यभिगम्य सा |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२०
भीष्म उवाच
अथोर्वरा मिश्रकेशी रम्भा चैवोर्वशी तथा |
१९ क