शान्ति पर्व
अध्याय
७८
राजो उवाच
व्राह्मणान्परिरक्षन्ति सङ्ग्रामेष्वपलाय़िनः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्परिरक्षन्तो धर्ममात्मानमेव च ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
सोम उवाच
व्राह्मणान्पूजय़ामास तथैवाहं महाव्रतान् ||
१८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्पूजय़ित्वा च पानाच्छादनभोजनैः |
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्पूजय़ेच्चापि तथा स्नात्वा नराधिप |
१३४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
व्राह्मणान्प्रथमं द्वेष्टि गुरूंश्च मधुसूदन |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
व्राह्मणान्प्रथमं द्वेष्टि व्राह्मणैश्च विरुध्यते ||
७५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५८
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्मा स्म पर्यश्नीर्वासोभिरशनेन च ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्वाचय़ामासुर्गोविन्दस्य च शासनात् ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्वाचय़ित्वा च हुत्वा चैव हुताशनम् |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७२
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्वाचय़ेथास्त्वमर्थसिद्धिजय़ाशिषः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणान्विविधज्ञानान्पर्यपृच्छद्युधिष्ठिरः ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
व्राह्मणान्वेदविदुषः सिद्धान्धर्मविदस्तथा |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
उमो उवाच
व्राह्मणान्वेदविदुषो नेच्छन्ति परिसर्पितुम् ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
व्राह्मणान्वै तदासूय़ाद्यदा वैरोचनो वलिः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
८
भीष्म उवाच
व्राह्मणान्व्रह्म च तथा क्षत्रिय़ः परिपालय़ेत् ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय
३८
सूत उवाच
व्राह्मणान्सिद्धमन्त्रांश्च सर्वतो वै न्यवेशय़त् ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
पृथिव्यु उवाच
व्राह्मणान्सेवमानस्य रजः सर्वं प्रणश्यति ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
व्राह्मणापसदं पुत्रं प्राप्स्यसीति महामुने ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणार्थं हि नो राज्यं जीवितं च वसूनि च |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
७९
भीष्म उवाच
व्राह्मणार्थं हि सर्वेषां शस्त्रग्रहणमिष्यते ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
व्राह्मणार्थमुपाकृत्य नाकपृष्ठमितो गतः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
व्राह्मणार्थे च यच्छौचं तच्च मे शृणु कौरव |
१०३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०४
राजन्य उवाच
व्राह्मणार्थे त्यजन्प्राणान्गतिमिष्टामवाप्स्यसि ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२९५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणार्थे पराक्रान्ता धर्मात्मानो यतव्रताः |
६ क
वन पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणार्थे पराक्रान्ताः शुद्धैर्वाणैर्महारथाः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
व्राह्मणार्थे परित्यज्य गतो लोकाननुत्तमान् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
व्राह्मणार्थे परित्यज्य जग्मतुर्लोकमुत्तमम् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५०
कुन्त्यु उवाच
व्राह्मणार्थे महत्कृत्यं मोष्काय़ नगरस्य च ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२९५
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणार्थे यतन्तस्ते शीघ्रमन्वगमन्मृगम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९८
भीष्म उवाच
व्राह्मणार्थे समुत्पन्ने योऽभिनिःसृत्य युध्यते |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
व्राह्मणार्थे हतो युद्धे मुच्यते व्रह्महत्यया ||
७ ख
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणार्थेषु यत्सिद्धमन्नं तेषां महात्मनाम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
व्राह्मणार्थेऽपि वा प्राणान्सन्त्यजेत्तेन शुध्यति |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
१५५
व्राह्मण उवाच
व्राह्मणावसथं पुण्यमाससाद महीपतिः ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
व्राह्मणाश्च ततः श्रेष्ठास्तेषु यज्ञाः प्रतिष्ठिताः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
१८८
मार्कण्डेय़ उवाच
व्राह्मणाश्च भविष्यन्ति व्रह्मस्वानि च भुञ्जते ||
५७ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च महात्मानः पार्थिवाश्च महावलाः ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
११०
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च महात्मानः सोमपाः संशितव्रताः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च महाभागा देशेभ्यः समुपागमन् |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२४२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च महाभागा धार्तराष्ट्रपुरं प्रति ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च महीपाल वहवो वेदपारगाः |
१८ क
वन पर्व
अध्याय
२३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्च विशश्चैव तथा विषय़वासिनः |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६८
भीष्म उवाच
व्राह्मणाश्चतुरो वेदान्नाधीय़ेरंस्तपस्विनः |
२६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणाश्चैव ते नित्यं प्राज्ञाश्चैव विशेषतः |
५० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
व्राह्मणाश्चैव यज्ञाश्च सहान्नाः सहदक्षिणाः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणास्तत्र शतशः समाजग्मुस्तपोधनाः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
व्राह्मणास्तपसा युक्ता देवेन्द्रमृषय़ो यथा ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९३
श्वशुर उवाच
व्राह्मणास्तपसा युक्ता यथाशक्तिप्रदाय़िनः ||
७० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३६
सोम उवाच
व्राह्मणास्तपसा सर्वे सिध्यन्ते वाग्वलाः सदा |
१३ क