शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अश्वैश्च व्यपकृष्यन्त वहवोऽत्र गतासवः ||
५० ग
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अश्वो विद्धो ध्वजश्छिन्नः सारोहः पतितो गजः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अश्वोऽश्वं समभिप्रेत्य पदातिश्च पदातिनम् ||
७९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अश्वौघाः पुरुषौघाश्च विपरीतं समाय़युः ||
८२ ख
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अश्वय़ुक्तै रथैश्चापि गोखरोष्ट्रय़ुतैरपि ||
३२ ग
विराट पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टकश्च शिविश्चैव यय़ातिर्नहुषो गय़ः ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२०
नारद उवाच
अष्टकस्त्वथ राजर्षिः कौशिको माधवीसुतः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टकस्य च राजर्षेर्लोमपादस्य चैव ह ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४८
भीष्म उवाच
अष्टकाः पितृदैवत्या वृद्धानामभिपूजनम् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रं हि तद्यानं भूतय़ुक्तं मनोजवम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२१
भीष्म उवाच
अष्टचक्रं हि तद्यानं भूतय़ुक्तं मनोरमम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रसमाय़ुक्तं मेघगम्भीरनिस्वनम् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रसमाय़ुक्तमास्थाय़ प्रवरं रथम् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रसमाय़ुक्तमास्थाय़ विपुलं रथम् ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५०
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रां महाघोरामशनिं रुद्रनिर्मिताम् ||
९० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
अष्टचक्रां महारौद्रामशनीं रुद्रनिर्मिताम् ||
१०३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४७
भीष्म उवाच
अष्टधा तु भवेत्कार्यं क्षत्रिय़स्वं युधिष्ठिर ||
४८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
अष्टपञ्चाशतं राजन्विपुलत्वेन चानघ |
४४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टपञ्चाशतं रात्र्यः शय़ानस्याद्य मे गताः |
२७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३
नारद उवाच
अष्टपादं तीक्ष्णदंष्ट्रं सूचीभिरिव संवृतम् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
अष्टपादूर्ध्वचरणः शरभो वनगोचरः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
अष्टपान्नैकनय़नः शङ्कुकर्णोर्ध्वरोमवान् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
अष्टभिः श्रुतकर्माणं प्रतिविन्ध्यं त्रिभिः शरैः |
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
अष्टभिः सात्यकिं विद्ध्वा पुनर्विव्याध पञ्चभिः ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
अष्टभिर्निशितैश्चैव सोऽश्वत्थामानमार्दय़त् |
४६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
अष्टभ्यो राजसूय़ेभ्यो न च तेनाहमागतः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टमं तमथो वित्त विवाहं कविभिः स्मृतम् ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अष्टमं पर्व निर्दिष्टमेतद्भारतचिन्तकैः |
१७२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९८
याज्ञवल्क्य उवाच
अष्टमं सर्गमित्याहुरेतदार्जवकं वुधाः ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
अष्टमासेन तत्कुर्याद्येन वर्षाः सुखं वसेत् ||
५७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२१
श्रीरु उवाच
अष्टमी वृत्तिरेतासां पुरोगा पाकशासन ||
८२ ख
आदि पर्व
अध्याय
११२
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टमीं वा ऋतुस्नाता संविशेथा मय़ा सह ||
३१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
अष्टमीमथ कौन्तेय़ शुक्लपक्षे चतुर्दशीम् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३०
महेश्वर उवाच
अष्टमीय़ज्ञपरता चातुर्मास्यनिषेवणम् |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अष्टमेन तथा खड्गं पातय़ामास भूतले |
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
अष्टमेन तु भक्तेन जीवन्संवत्सरं नृप |
४४ क
आदि पर्व
अध्याय
१३३
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टमेऽहनि रोहिण्यां प्रय़ाताः फल्गुनस्य ते |
३० क
वन पर्व
अध्याय
१५५
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टमेऽहनि सम्प्राप्ते तमृषिं लोकविश्रुतम् |
२० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
७
धृतराष्ट्र उवाच
अष्टमो ह्यद्य कालोऽय़माहारस्य कृतस्य मे |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टम्यां तान्यगृह्णन्त गोकुलानि सहस्रशः ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८७
भीष्म उवाच
अष्टम्यां तु प्रकुर्वाणो वाणिज्ये लाभमाप्नुय़ात् ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टम्यां पुनरस्माभिरादित्यस्योदय़ं प्रति ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
अष्टम्यां सर्वपक्षाणां व्रह्मचारी सदा भवेत् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२२
भीष्म उवाच
अष्टाङ्गस्य च राज्यस्य पप्रच्छ कुशलं तदा ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२१
भीष्म उवाच
अष्टाङ्गस्य तु युक्तस्य हस्तिनो हस्तिय़ाय़िनः |
४४ क
वन पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टाङ्गां वुद्धिमाहुर्यां सर्वाश्रेय़ोविघातिनीम् |
१७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
अष्टाङ्गे राजशार्दूल राज्ये धर्मपुरस्कृते ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२
शौनक उवाच
अष्टाङ्गेनैव मार्गेण विशुद्धात्मा समाचरेत् ||
७३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
अष्टादश दिनान्यद्य युद्धस्यास्य जनार्दन |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अष्टादश समाजग्मुरक्षौहिण्यो युय़ुत्सय़ा ||
१० ख