वन पर्व
अध्याय
२४९
कोटिकाश्य उवाच
अजानतां ख्यापय़ नः सुकेशि; कस्यासि भार्या दुहिता च कस्य ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७२
गन्धर्व उवाच
अजानतामदोषाणां सर्वेषां रक्षसां वधात् ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
अजानतीमिषीकेय़ं जनित्रीं हन्त्विति प्रभो |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
शक्र उवाच
अजानतो ममाचक्ष्व नामधेय़ं शुचिस्मिते ||
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५५
अहल्यो उवाच
अजानन्त्या निय़ुक्तः स भगवन्व्राह्मणोऽद्य मे |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
२७८
नारद उवाच
अजानन्त्या यदनय़ा गुणवान्सत्यवान्वृतः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
अजानन्नर्जुनश्चापि निहतं पुत्रमौरसम् |
७५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७७
भगवानु उवाच
अजानन्निव चाकस्मादर्जुनाद्याभिशङ्कसे ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
अजाविकं गोखरोष्ट्रं सुवर्णं रजतं तथा ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
अजाविकं गोहिरण्यं खरोष्ट्रं फलजं मधु |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
अजावुभावप्रजौ च अक्षय़ौ चाप्युभावपि |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१
सञ्जय़ उवाच
अजावय़ इवागोपा वने श्वापदसङ्कुले |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
२०३
नारद उवाच
अजाश्चैवाविमूढाश्च तेजोगर्भास्तपस्विनः |
५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
अजाय़ कृष्णनेत्राय़ विरूपाक्षाय़ चैव ह ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२७
व्यास उवाच
अजाय़ विश्वरूपाय़ धाम्ने सर्वदिवौकसाम् ||
९० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७२
व्यास उवाच
अजाय़त च कार्यार्थं पुत्रो धर्मस्य विश्वकृत् ||
५१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०
भीष्म उवाच
अजाय़त महाराजराजवंशे महाद्युतिः ||
३१ ग
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
अजाय़त सुतः कर्णः सर्वलोकेषु विश्रुतः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
अजाय़न्त कृते राजन्मुनय़ः सुतपोधनाः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१५
धृतराष्ट्र उवाच
अजितं जामदग्न्येन शक्रतुल्यपराक्रमम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८२
भृगुरु उवाच
अजितं जेतुकामेन भाव्यं सङ्गेष्वसङ्गिना ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१६
नारद उवाच
अजितं जेतुकामेन भाव्यं सङ्गेष्वसङ्गिना ||
२२ ख
वन पर्व
अध्याय
२०३
व्याध उवाच
अजितं जेतुकामेन भाव्यं सङ्गेष्वसङ्गिना ||
४८ ख
सभा पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
अजितां वा जितां वापि स्वय़ं व्याहर्तुमर्हति ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
अजितात्मा नरपतिर्विजय़ेत कथं रिपून् ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२७
वैशम्पाय़न उवाच
अजितात्माजितामात्यः सोऽवशः परिहीय़ते ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
अजितेन्द्रिय़ पापात्मन्कामात्मक पुरन्दर |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
११९
धृतराष्ट्र उवाच
अजितो द्रोणराधेय़विकर्णकृतवर्मभिः |
१ क
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
अजितोऽशोकवनिकां यय़ौ कन्दर्पमोहितः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
अजित्वा संय़ुगे पार्थ राज्यं कथमिहेच्छसि ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
अजिनं दण्डकाष्ठं च ज्वलितं च हुताशनम् |
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८४
धृतराष्ट्र उवाच
अजिनानां सहस्राणि चीनदेशोद्भवानि च |
१० क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
अजिनानि प्रवेणीश्च स्रुक्स्रुवं च महीपतिः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८१
वैशम्पाय़न उवाच
अजिनानि विधुन्वन्तः करकांश्च द्विजर्षभाः |
१ क
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
अजिनान्युत्तरीय़ाणि जगृहुश्च यथाक्रमम् ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
६८
वैशम्पाय़न उवाच
अजिनैः संवृतान्दृष्ट्वा हृतराज्यानरिन्दमान् |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
गृध्र उवाच
अजिह्मत्वमशाठ्यं च यत्नतः परिमार्गत ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६६
भीष्म उवाच
अजिह्ममशठं मार्गं सेवमानस्य भारत |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
५३
युधिष्ठिर उवाच
अजिह्ममशठं युद्धमेतत्सत्पुरुषव्रतम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८२
पराशर उवाच
अजिह्मैरशठक्रोधैर्हव्यकव्यप्रय़ोक्तृभिः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय
१०४
वैशम्पाय़न उवाच
अजीजनत्ततो वीरं सर्वशस्त्रभृतां वरम् |
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४३
कुन्त्यु उवाच
अजीजनत्त्वां मय़्येष कर्ण शस्त्रभृतां वरम् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९२
भीष्म उवाच
अजीर्णेनाभिहन्यन्ते ते देवाः पितृभिः सह |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
अजुगुप्सांश्च विज्ञाय़ व्राह्मणान्वृत्तिकर्शितान् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
अजेन यष्टव्यमिति देवाः प्राहुर्द्विजोत्तमान् |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
अजेय़ं समरे राजन्यमेन वरुणेन च ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
अजेय़ः परशुः पुण्ड्रः शम्भुर्देवावृधोऽनघः ||
१७४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
अजेय़ः पुरुषैरेष देवैर्वापि सवासवैः ||
४ ख
विराट पर्व
अध्याय
४०
अर्जुन उवाच
अजेय़ः शत्रुसैन्यानां वैराटे व्येतु ते भय़म् ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
अजेय़ः समरे चैव देवैरपि सवासवैः |
२३ क