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द्रोण पर्व
अध्याय १३७
सञ्जय़ उवाच
असम्भ्रान्तस्ततः पार्थो धनुराकृष्य वीर्यवान् |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
असम्भ्रान्तो महावाहुरर्जुनं वाक्यमव्रवीत् ||
५४ ख
विराट पर्व
अध्याय ५६
वैशम्पाय़न उवाच
असम्भ्रान्तो रथे तिष्ठ समेषु विषमेषु च |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
असम्यक्चैव यद्दत्तमसम्यक्च प्रतिग्रहः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५०
नारद उवाच
असम्यगाय़तो भूय़श्चेष्टते विकृतो नृषु ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
असम्यग्दर्शनैर्दुःखमनन्तं नोपशाम्यति ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १४
धृतराष्ट्र उवाच
असम्यग्वा महाभागास्तत्क्षन्तव्यमतन्द्रितैः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
असम्वाधशतद्वारैः शय़नासनशोभितैः |
२२ क
आदि पर्व
अध्याय १५८
अर्जुन उवाच
असम्वाधा देवनदी स्वर्गसम्पादनी शुभा |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
असम्वाधा महाराज तान्निगृह्णन्ति ते गजाः ||
३५ ख
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
असम्वाधा हि सा पार्थ रम्या कामगमा सभा |
३१ क
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
असम्वाधान्समद्वारान्युतानुच्चावचैर्गुणैः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय १७
वासुदेव उवाच
असहन्तोऽभिय़ानं तच्छाल्वराजस्य कौरव |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११२
वृहस्पतिरु उवाच
असहाय़ः पिता माता तथा भ्राता सुतो गुरुः |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
असहाय़ः सहाय़ार्थी मामनुध्यातवान्ध्रुवम् ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
असहाय़वता तात नैवार्थाः केचिदप्युत |
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
असहाय़स्य धीरस्य निर्जितस्य युधिष्ठिर ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
असहाय़स्य लोकेऽस्मिँल्लोकय़ात्रासहाय़िनी ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
असहाय़ा नरेभ्यश्च नोद्विजस्यमरप्रभे ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २७६
मार्कण्डेय़ उवाच
असहाय़ेन रामेण वैदेही पुनराहृता |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय ३०
दुर्योधन उवाच
असहाय़ो हि को राजा राज्यमिच्छेत्प्रशासितुम् ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
धृतराष्ट्र उवाच
असह्यं तमहं मन्ये तन्ममाचक्ष्व सञ्जय़ ||
७६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
असह्यं मन्यमानास्ते नातिप्रमनसोऽभवन् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०३
गरुड उवाच
असह्यं सर्वभूतानां ममापि विपुलं वलम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
युधिष्ठिर उवाच
असह्यमपि तं भारं वोढुमेवोपचक्रमे ||
६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
धृतराष्ट्र उवाच
असह्यमिति वा मत्वा न निवृत्तौ महारथौ ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
असह्यविक्रान्तमदीनसत्त्वं; सर्वे गणा भारत दुर्विषह्यम् |
५ क
वन पर्व
अध्याय १५
युधिष्ठिर उवाच
असांनिध्यं कथं कृष्ण तवासीद्वृष्णिनन्दन |
१ क
वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
असांनिध्यं तु कौरव्य ममानर्तेष्वभूत्तदा |
१४ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
असांनिध्याद्धि पार्थानां केशवस्य च धीमतः ||
१४६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
असांनिध्याद्धि पार्थानामिदं नः कदनं कृतम् ||
११६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
असाक्षिकमनाथं वा परीक्ष्यं तद्विशेषतः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८१
भीष्म उवाच
असाधुः साधुतामेति साधुर्भवति दारुणः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
साध्या ऊचुः
असाधुत्वं च किं तेषां किमेषां मानुषं मतम् ||
४३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
असाधुत्वं परीवादो मृत्युर्मानुषमुच्यते ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१
देवस्थान उवाच
असाधुनिग्रहरतः साधूनां प्रग्रहे रतः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३०
भीष्म उवाच
असाधुभ्यो निरादाय़ साधुभ्यो यः प्रय़च्छति |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
असाधुभ्यो निरादाय़ साधुभ्यो यः प्रय़च्छति |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
असाधुभ्योऽस्य न भय़ं न चोरेभ्यो न राजतः |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५९
सत्यवानु उवाच
असाधुश्चैव पुरुषो लभते शीलमेकदा |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४३
कुन्त्यु उवाच
असाध्यं किं नु लोके स्याद्युवय़ोः सहितात्मनोः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४३
भीष्म उवाच
असाध्व्यश्चापि दुर्वृत्ताः कुलघ्न्यः पापनिश्चय़ाः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
असाध्व्यस्तु समुत्पन्ना कृत्या सर्गात्प्रजापतेः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १२३
वैशम्पाय़न उवाच
असामान्यमिदं तात लोकेष्वस्त्रं निगद्यते |
७६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
असाम्ना केशवे याते समुद्योक्ष्यन्ति पाण्डवाः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९
युधिष्ठिर उवाच
असारमिममस्वन्तं संसारं त्यजतः सुखम् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७७
भीष्म उवाच
असारमिव मानुष्यं सर्वथा मुक्त एव सः ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५०
नारद उवाच
असारश्चासि दुर्वुद्धे केवलं वहु भाषसे |
३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३५
सञ्जय़ उवाच
असावहममुत्रेति प्रवदन्तो मुहुर्मुहुः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय ६५
शकुन्तलो उवाच
असावादित्यसङ्काशो विश्वामित्रो महातपाः |
२३ क