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आदि पर्व
अध्याय १४३
युधिष्ठिर उवाच
अहःसु विहरानेन यथाकामं मनोजवा |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
अहःसु सततं तिष्ठेदभ्याकाशं निशि स्वपेत् |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
अहङ्कार इति ख्यातः सर्वभूतात्मभूतकृत् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
अहङ्कार इति प्रोक्तः सर्वतेजोगतः प्रभुः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २९
श्रीभगवानु उवाच
अहङ्कार इतीय़ं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०४
याज्ञवल्क्य उवाच
अहङ्कारं तथा वुद्धौ वुद्धिं च प्रकृतावपि ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
अहङ्कारं महातेजाः प्रजापतिमहङ्कृतम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३००
याज्ञवल्क्य उवाच
अहङ्कारं महानात्मा भूतभव्यभविष्यवित् ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३८
श्रीभगवानु उवाच
अहङ्कारं वलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
अहङ्कारं वलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् |
५३ क
वन पर्व
अध्याय २२२
वैशम्पाय़न उवाच
अहङ्कारं विहाय़ाहं कामक्रोधौ च सर्वदा |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
अहङ्कारकृतं चैव नाम पर्याय़वाचकम् ||
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
अहङ्कारकृतश्चैव सर्वे निरय़गामिनः |
५ क
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
अहङ्कारनिवृत्तश्च स तीर्थफलमश्नुते ||
३१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारप्रधानस्य महाभूतकृतो गुणः |
३४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारप्रसूतानि तानि वक्ष्याम्यहं द्विजाः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
अहङ्कारप्रसूतानि महाभूतानि भारत ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २५
श्रीभगवानु उवाच
अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४१
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारश्च भूतादिर्वैकारिक इति स्मृतः |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५०
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारसमाय़ुक्तास्ते सकाशे प्रजापतेः ||
२१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
अहङ्कारस्ततो जातो व्रह्मा शुभचतुर्मुखः |
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
अहङ्कारस्तु भूतानां पञ्चानां नात्र संशय़ः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
अहङ्कारस्तु महतस्तृतीय़मिति नः श्रुतम् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
अहङ्कारस्त्वसत्कारश्चिन्ता वैरोपसेवनम् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
अहङ्कारस्य च तथा वुद्धिर्विद्या नरेश्वर ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७६
नारद उवाच
अहङ्कारस्य च त्यागः प्रणय़स्य च निग्रहः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
अहङ्कारस्य यः स्रष्टा सर्वभूतभवाय़ वै |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
अहङ्कारस्य विजितेः पञ्चैते स्युर्वशानुगाः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
याज्ञवल्क्य उवाच
अहङ्काराच्च सम्भूतं मनो भूतगुणात्मकम् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
भीष्म उवाच
अहङ्कारात्परं चापि स्थानानि समवाप्नुय़ात् ||
१०३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारात्परा वुद्धिर्वुद्धेरात्मा ततः परः ||
५४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारात्प्रसूतानि महाभूतानि पञ्च वै |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०२
भीष्म उवाच
अहङ्काराभिभूतस्य सुमहानत्यवर्तत ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
अहङ्कारिकमध्यात्ममाहुस्तत्त्वनिदर्शनम् |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अहङ्कारेण राजानमुपतस्थुर्महावलाः ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४१
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारेणाहरतो गुणानिमा; न्भूतादिरेवं सृजते स भूतकृत् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९१
वसिष्ठ उवाच
अहङ्कारेषु भूतेषु चतुर्थं विद्धि वैकृतम् ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
अहङ्कारैर्विरहिता यान्ति शक्र नरोत्तमाः ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
अहङ्कारो न कर्तव्यो याज्ये तस्मिन्नराधिपे |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १९८
मनुरु उवाच
अहङ्कारोऽभिमानश्च सम्भूतो भूतसञ्ज्ञकः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय १४६
व्राह्मण्यु उवाच
अहङ्कृतावलिप्तैश्च प्रार्थ्यमानामिमां सुताम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
अहतं वा हतं वेति पप्रच्छ सुतमात्मनः ||
९४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
नारद उवाच
अहतांस्तु महावाहो शृणु मे तत्र माधव |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
धृतराष्ट्र उवाच
अहताञ्शंस मे सूत येऽत्र जीवन्ति केचन ||
८८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३८
विदुर उवाच
अहताद्धि भय़ं तस्माज्जाय़ते नचिरादिव ||
२६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
धृतराष्ट्र उवाच
अहतान्मन्यसे यांस्त्वं तेऽपि स्वर्गजितो मताः ||
८९ ख
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
अहतैश्चैव वासोभिर्माल्यैरुच्चावचैरपि ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
अहत्वा च कुतो मांसमेवमेतद्विरुध्यते ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
अहत्वा न निवर्तिष्ये सत्येनाय़ुधमालभे ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
अहत्वा समरे भीष्मं यदि यास्यसि मारिष |
५२ क