chevron_left  अहस्तत्रोदगय़नंarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
अहस्तत्रोदगय़नं रात्रिः स्याद्दक्षिणाय़नम् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३९
व्रह्मो उवाच
अहस्त्रिधा तु विज्ञेय़ं त्रिधा रात्रिर्विधीय़ते |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय २२५
वैशम्पाय़न उवाच
अहानि पञ्च चैकं च विरराम सुतर्पितः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अहानि पञ्च द्रोणस्तु ररक्ष कुरुवाहिनीम् ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
अहानि युय़ुधे भीष्मो दशैव परमास्त्रवित् |
२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८४
भीष्म उवाच
अहानि सुवहून्यद्य वर्तते सुमहात्ययम् ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४४
व्रह्मो उवाच
अहान्यस्तमय़ान्तानि उदय़ान्ता च शर्वरी |
१७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९१
भगवानु उवाच
अहापय़न्पाण्डवार्थं यथाव; च्छमं कुरूणां यदि चाचरेय़म् |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय २९
वासुदेव उवाच
अहापय़ित्वा यदि पाण्डवार्थं; शमं कुरूणामथ चेच्चरेय़म् |
४१ क
वन पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
अहार्यमपि शक्रेण गुप्तं गाण्डीवधन्वना ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
अहार्यैरव्यभीचारैः सर्वतः सुपरीक्षितैः ||
१७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८८
वैशम्पाय़न उवाच
अहार्षुश्च वनं यान्तः समूलं हृदय़ं मम ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३७
व्यास उवाच
अहिंसकः समः सत्यो धृतिमान्निय़तेन्द्रिय़ः |
२० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११४
वृहस्पतिरु उवाच
अहिंसकानि भूतानि दण्डेन विनिहन्ति यः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसकैरात्मविद्भिः सर्वभूतहिते रतैः |
५८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८०
भीष्म उवाच
अहिंसको ज्ञानतृप्तः स व्रह्मासनमर्हति |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११३
वृहस्पतिरु उवाच
अहिंसन्व्राह्मणं नित्यं न्याय़ेन परिपाल्य च |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५६
भीष्म उवाच
अहिंसा चैव राजेन्द्र सत्याकारास्त्रय़ोदश ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
अहिंसा तव निर्दिष्टा सर्वधर्मार्थसंहिता ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
अहिंसा दृश्यते गुर्वी ततश्च प्रिय़मिष्यते ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसा परमं दानमहिंसा परमं तपः ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसा परमं मित्रमहिंसा परमं सुखम् |
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अहिंसा परमं सत्यं ततो धर्मः प्रवर्तते ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसा परमं सत्यमहिंसा परमं श्रुतम् ||
३८ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
युधिष्ठिर उवाच
अहिंसा परमो धर्म इत्युक्तं वहुशस्त्वय़ा |
१ क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
अहिंसा परमो धर्मः स च सत्ये प्रतिष्ठितः |
६९ ख
आदि पर्व
अध्याय ११
डुण्डुभ उवाच
अहिंसा परमो धर्मः सर्वप्राणभृतां स्मृतः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११६
भीष्म उवाच
अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः |
३७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसा परमो यज्ञस्तथाहिंसा परं वलम् |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११४
युधिष्ठिर उवाच
अहिंसा वैदिकं कर्म ध्यानमिन्द्रिय़संय़मः |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४६
व्रह्मो उवाच
अहिंसा व्रह्मचर्यं च सत्यमार्जवमेव च |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
अहिंसा सकलो धर्मो हिंसा यज्ञेऽसमाहिता |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २३
भीष्म उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोध आनृशंस्यं दमस्तथा |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३७
व्यास उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोधः क्षमेज्या धर्मलक्षणम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८४
भृगुरु उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोधः सर्वाश्रमगतं तपः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३८
श्रीभगवानु उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागः शान्तिरपैशुनम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४७
भीष्म उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोधो दानमेतच्चतुष्टय़म् |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
अहिंसा सत्यमक्रोधो वृत्तिदाय़ानुपालनम् |
२० क
आदि पर्व
अध्याय ११
डुण्डुभ उवाच
अहिंसा सत्यवचनं क्षमा चेति विनिश्चितम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५५
भीष्म उवाच
अहिंसा सत्यवचनं दानमिन्द्रिय़निग्रहः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसा सत्यवचनं नित्यानि वनचारिणाम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतहितं परम् |
६९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
महेश्वर उवाच
अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतानुकम्पनम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०८
गुरुरु उवाच
अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतेषु चार्जवम् |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८०
भीष्म उवाच
अहिंसा सत्यवचनमानृशंस्यं दमो घृणा |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १९८
व्याध उवाच
अहिंसा सत्यवचनमानृशंस्यमथार्जवम् |
८७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽय़शः |
५ क
वन पर्व
अध्याय २९८
यक्ष उवाच
अहिंसा समता शान्तिस्तपः शौचममत्सरः |
८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
यतिरु उवाच
अहिंसा सर्वधर्माणामिति वृद्धानुशासनम् |
१६ क