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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
यतिरु उवाच
अहिंसा सर्वभूतानां नित्यमस्मासु रोचते |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
अहिंसा सर्वभूतानामानृशंस्यं दमः शमः ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
अहिंसा सर्वभूतानामेतत्कृत्यतमं मतम् |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
अहिंसा सर्वभूतेभ्यः संविभागश्च सर्वशः |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
अहिंसा सर्वभूतेषु धर्मं ज्याय़स्तरं विदुः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसा साधुहिंसेति श्रेय़ान्धर्मपरिग्रहः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०९
भीष्म उवाच
अहिंसां चानृशंस्यं च विधिवत्परिपालय़ ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३०
मतङ्ग उवाच
अहिंसादमदानस्थः कथं नार्हामि विप्रताम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५६
भीष्म उवाच
अहिंसादिकृतं कर्म इह चैव परत्र च |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
श्रीभगवानु उवाच
अहिंसाधर्मसंय़ुक्ताः प्रचरेय़ुः सुरोत्तमाः |
७८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसाधर्मय़ुक्तेन प्रीय़ते हरिरीश्वरः ||
५२ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
अहिंसानिरतः स्वर्गं गच्छेदिति मतिर्मम ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३२
नारद उवाच
अहिंसानिरता ये च ये च सत्यव्रता नराः |
१८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
ऋषय़ ऊचुः
अहिंसानिरताश्चान्ये केचिद्धिंसापराय़णाः |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
अहिंसानिरतो नित्यं जुह्वानो जातवेदसम् ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
अहिंसानिरतो नित्यं जुह्वानो जातवेदसम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४१
भीष्म उवाच
अहिंसानिरतो नित्यं सत्यः सज्जनसंमतः |
३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
अहिंसानिरतो नित्यं सत्यवाङ्निय़तेन्द्रिय़ः ||
४० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११४
वृहस्पतिरु उवाच
अहिंसापाश्रय़ं धर्मं यः साधय़ति वै नरः ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
युधिष्ठिर उवाच
अहिंसाप्रिय़योश्चैव गुरुलाघवमुच्यताम् ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १७८
सर्प उवाच
अहिंसार्थसमाय़ुक्तैः कारणैः स्वर्गमश्नुते ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११५
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसालक्षणं धर्मं वेदप्रामाण्यदर्शनात् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंसालक्षणो धर्म इति वेदविदो विदुः |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
व्रह्मो उवाच
अहिंसालक्षणो धर्मो हिंसा चाधर्मलक्षणा ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
अहिंसासत्यमर्यादं प्राणत्यागमहोर्मिणम् ||
६७ ख
वन पर्व
अध्याय १९९
मार्कण्डेय़ उवाच
अहिंसाय़ां तु निरता यतय़ो द्विजसत्तम |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसाय़ाः फलं रूपं दीक्षाय़ा जन्म वै कुले |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २८
यतिरु उवाच
अहिंसेति प्रतिज्ञेय़ं यदि वक्ष्याम्यतः परम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १९९
मार्कण्डेय़ उवाच
अहिंसेति यदुक्तं हि पुरुषैर्विस्मितैः पुरा |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५७
भीष्म उवाच
अहिंसैव हि सर्वेभ्यो धर्मेभ्यो ज्याय़सी मता ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंस्या यज्ञपशवो युगेऽस्मिन्नैतदन्यथा |
७३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
अहिंस्रः शुचिरक्षुद्रो निराशीः कर्मसंस्तुतः |
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १८२
भृगुरु उवाच
अहिंस्रः सर्वभूतानां मैत्राय़णगतश्चरेत् |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंस्रः सर्वभूतानां यथा माता यथा पिता ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
अहिंस्रः सर्वभूतानामीदृक्साङ्ख्यो विमुच्यते ||
३६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
अहिंस्रः सर्वभूतेषु सत्यवाक्सुदृढव्रतः |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
अहिंस्रश्चाल्पदोषश्च स राजन्केतनक्षमः ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११७
भीष्म उवाच
अहिंस्रस्य तपोऽक्षय़्यमहिंस्रो यजते सदा |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंस्रैर्धर्मपरमैर्नृभिरत्यन्तसेवितम् ||
६२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
अहिंस्रोऽमन्दकोऽजल्पन्मुच्यते सर्वकिल्विषैः ||
३३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
अहिंसय़ा च दानेन तपसा च सनातनः ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
अहिंसय़ा च दीर्घाय़ुरिति प्राहुर्मनीषिणः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३४२
भीष्म उवाच
अहिंसय़ा परे स्वर्गं सत्येन च तथा परे ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २५
युधिष्ठिर उवाच
अहिंसय़ित्वा केनेह व्रह्महत्या विधीय़ते ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २५
भीष्म उवाच
अहिंसय़ित्वा केनेह व्रह्महत्या विधीय़ते ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
अहिच्छत्रं कालकूटं गङ्गाकूलं च भारत |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
अहिच्छत्रं च विषय़ं द्रोणः समभिपद्यत ||
१७ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १३७
द्रोण उवाच
अहितत्वाय़ कल्पन्ते दोषा भरतसत्तम ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
अहितहृदय़भेदनं महद्वै; शकटमवेक्ष्य कृतं ननन्द राजा ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
अहितानि च वाक्यानि सर्वाणि परुषाणि च |
९ क