विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
सहदेवस्य वृत्तानि चिन्तय़न्ती पुनः पुनः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय
२२४
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवाच्च यो जातः श्रुतसेनस्तवात्मजः ||
१० ग
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवाच्छ्रुतसेनमेतान्पञ्च महारथान् |
७३ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवात्सुतं तस्माच्छ्रुतसेनेति तं विदुः ||
७८ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवाय़ राज्ञे च भीमाय़ नकुलाय़ च ||
२२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
सहदेवे ततः षष्टिं साय़कान्दुर्मुखोऽक्षिपत् |
१९ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवे महाराज मा प्रमादं कृथाः क्वचित् |
१० क
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
सहदेवेन वा योत्स्ये भीमेन नकुलेन वा ||
५७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवो जघानाशु ते पेतुः सह सादिभिः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
सहदेवो जय़त्सेनो मेघसन्धिश्च मागधः ||
७ ख
सभा पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवो नृणां देवं वासुदेवमुपस्थितः ||
४० ख
सभा पर्व
अध्याय
३६
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवो नृणां देवः समापय़त कर्म तत् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
सहदेवो महाराज दृष्ट्वा कर्णं व्यवस्थितम् |
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
सहदेवो महाराज धनुश्चिच्छेद संय़ुगे ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८८
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवो महेष्वासः शूरः समितिशोभनः |
३५ क
वन पर्व
अध्याय
२९९
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवो मय़ा नित्यं नकुलश्च निवारितौ |
२३ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवो युधां श्रेष्ठो धर्मराजे महात्मनि ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८२
सञ्जय़ उवाच
सहदेवो रणे छित्त्वा तं च विव्याध पञ्चभिः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
सहदेवोऽपि कौरव्य रजोमेघे समुत्थिते |
६१ क
विराट पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवोऽपि गोपानां कृत्वा वेषमनुत्तमम् |
१ क
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवोऽपि गोपानां वेषमास्थाय़ पाण्डवः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
सहदेवोऽपि माद्रीमेव स्वय़ंवरे विजय़ां नामोपय़ेमे |
८७ क
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
सहदेवोऽय़जद्यत्र शम्याक्षेपेण भारत ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
भीष्म उवाच
सहधर्मचरी भर्तुर्भवत्यग्निसमीपतः ||
३२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३४
महेश्वर उवाच
सहधर्मचरी मे त्वं समशीला समव्रता |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१४५
व्राह्मण उवाच
सहधर्मचरीं दान्तां नित्यं मातृसमां मम |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
सहन्ते तानि दुःखानि दिष्ट्या त्वं न तथा मुने ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
सहपुत्रं जिघांसन्तं परिवव्रुः किरीटिनम् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
सहपुत्रः सहामात्यः शल्येन समसज्जत ||
१९ ग
आदि पर्व
अध्याय
२५
सूत उवाच
सहभार्ये विनिष्क्रान्ते तस्मिन्विप्रे स पक्षिराट् |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
सहभूतास्तु भरतास्तवैव स्युर्जनेश्वर ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सहभ्राता सहपुत्रः ससैन्यो; भ्रष्टैश्वर्यः क्रोधवशोऽल्पचेताः |
६० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
सहमित्रं सहामात्यं ससोदर्यं सहानुगम् |
३१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
सहमित्रमसद्वुद्ध्या जीविताद्भ्रंशय़िष्यसि ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
सहवासं न यास्यामि कालमेतद्धि वञ्चनात् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
सहवासो निवासात्मा नान्योऽहमिति मन्यते |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
भीष्म उवाच
सहसञ्जातवृद्धस्य तथैव सहभोजिनः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७४
भीष्म उवाच
सहसा घातय़ामास देवदेवः पिनाकधृक् ||
३१ ग
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
सहसा चाभवत्तीव्रं संनिपातान्महद्रजः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
सहसा चिक्षिपुस्तत्र सङ्कुले भैरवे सति ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२४
वैशम्पाय़न उवाच
सहसा चुक्रुशुस्तत्र नराः शतसहस्रशः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
सहसा जगृहतुर्वेदान्व्रह्मणः पश्यतस्तदा ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
५९
वृहदश्व उवाच
सहसा दुःखमासाद्य सुकुमारी तपस्विनी ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
सहसा दृष्टवन्तः स्म पुनरेव वृहस्पते ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९७
भीष्म उवाच
सहसा नाम्य भूतानि क्षिप्रमेव प्रसादय़ेत् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
सहसा निःसृतो भावो योऽस्य नित्यं प्रवर्तते ||
१३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
सहसा न्यपतद्भूमौ छिन्नेव कदली वने ||
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
सहसा पाण्डवश्रेष्ठः प्रत्युत्थाय़ानुजैः सह |
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७६
सञ्जय़ उवाच
सहसा पेततुः क्रुद्धौ क्षिप्रं श्येनाविवामिषे ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सहसा प्रत्युदीय़ाय़ भीष्मः शान्तनवोऽर्जुनम् ||
२१ ख